Ganesh Chaturthi 2022 Date, Puja Vidhi, Mantra: ऐसे करें गणेश चतुर्थी व्रत का पारण, जानें तिथि और विधि
Ganesh Chaturthi 2022 Date Kab Hai, Puja Vidhi, Muhurat, Time, Samagri, Mantra in Hindi: गणेश उत्सव का पर्व शुरू हो चुका है। भारत में गणेश चतुर्थी का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। यहां देखें इस वर्ष गणेश चतुर्थी की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, कथा, आरती समेत सभी महत्वपूर्ण जानकारी।
Ganesh Chaturthi 2022 Date, Puja Vidhi, Muhurat, Time, Samagri, Mantra in Hindi: ज्ञान, बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता भगवान गणेश का पर्व प्रारंभ हो गया है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि बेहद महत्वपूर्ण मानी गई है। यह तिथि भगवान गणेश को समर्पित है, इस दिन गणपति बप्पा का जन्म दिवस मनाया जाता है। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर गणपति बप्पा का जन्म हुआ था।
गणेश चतुर्थी से प्रारंभ होने के बाद गणेश उत्सव पूरे 10 दिन तक मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी तिथि पर लोग अपने घरों में शुभ मुहूर्त पर भगवान गणेश की स्थापना करते हैं। 10 दिनों तक विधि अनुसार श्रद्धालु विघ्नहर्ता गणेश की पूजा करते हैं और दसवें दिन उनकी प्रतिमा को पवित्र नदी, सरोवर या झील में विसर्जित करते हैं।
भारत में गणेशोत्सव बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। हर जगह गणेश चतुर्थी की रौनक देखी जाती है। लोग गणेश चतुर्थी पर व्रत रखकर उनकी पूजा करते हैं। अगर आप भी व्रत रख रहे हैं तो यहां देखें वर्ष 2022 में गणेश चतुर्थी की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा, आरती और उपाय समेत अन्य सभी जानकारी।
Ganesh Chaturthi 2022: जरूर करें व्रत का पारण
गणपति बप्पा का आशीर्वाद पाने के लिए लोग गणेश चतुर्थी से व्रत प्रारंभ करते हैं और 10 दिनों तक व्रत रखते हैं। गणेश चतुर्थी पर व्रत रखने वाले भक्तों को पारण जरूर करना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि पारण करने से ही व्रत पूरा माना जाता है और लाभ मिलता है।
अर्पिता खान के घर बप्पा के दर्शन करने पहुचें कैटरीना कैफ और वक्की कौशल
Ganesh Chaturthi 2022: शाहरुख खान ने दी फैंस को बधाई
Ganesh Puja: ना पहनें काले रंग के कपड़े
भगवान गणेश की पूजा करते समय भक्त पीले या सफेद वस्त्र ही धारण करें। इसके साथ यह भी ध्यान रखें कि गणेश पूजन में काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए।
Ganesh Ji Ke Mantra: सफलता हासिल करने के लिए करें इन मंत्रों का जाप
त्रयीमयायाखिलबुद्धिदात्रे बुद्धिप्रदीपाय सुराधिपाय।
नित्याय सत्याय च नित्यबुद्धि नित्यं निरीहाय नमोस्तु नित्यम्।
Ganesh Chaturthi 2022 Ka Upay: धन प्राप्ति के लिए उपाय
गणेश चतुर्थी पर विशेष उपाय किए जाते हैं। कहा जाता है कि इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से भक्तों को धन की प्राप्ति होती है। इस दिन एक साफ पीले कपड़े में 11 गांठ दूर्वा और 1 गांठ हल्दी को लेकर पोटली बनाएं। फिर गणेशोत्सव में इसकी पूजा करें फिर तिजोरी में रख दें।
गणेश जी के प्रिय फल
गणेश जी को यह फल प्रिय हैं:
1. केला
2. सीताफल
3. अमरूद
4. बेल
5. काला जामुन
कब है अनंत चतुर्दशी 2022?
आज गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जा रहा है। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष अनंत चतुर्दशी 9 सितंबर 2022 को पड़ रही है। अनंत चतुर्दशी पर बप्पा का विसर्जन विधि-विधान से किया जाता है।
सातवें दिन कब होगा विसर्जन?
सातवें दिन भी गणेश जी का विसर्जन किया जाता है। 6 सितंबर को सुबह 9:11 से दोपरह 1:55 बजे तक शुभ मुहूर्त है। इसके बाद दोपहर 3:29 से 5:04 फिर शाम को 8:03 से 9:28 तक विसर्जन के लिए शुभ मुहूर्त बताया जा रहा है।
पांचवे दिन विसर्जन करने के लिए शुभ मुहू्र्त
यदि आप 5 दिन बाद गणेश जी का विसर्जन करना चाहते हैं तो 4 सितंबर को सुबह 7:34 से लेकर 12:19 तक मुहूर्त रहने वाला है। इसके साथ दोपहर में 1:56 से 3:31 तक फिल शाम को 6:40 से 10:55 तक शुभ मुहूर्त रहेगा।
Ganesh Chaturthi 2022: डेढ़ दिन बाद कब है विसर्जन का मुहूर्त?
अगर आप डेढ़ दिन बाद गणेश जी का विसर्जन करना चाहते हैं तो शुभ मुहूर्त दोपहर 12:22 से लेकर 3:32 तक है। इसके साथ शाम को 5:07 से 6:45 तक भी विसर्जन के लिए अच्छा मुहूर्त है।
Ganesh Chaturthi 2022: कब से कब तक था गणेश स्थापना का मुहूर्त
आज पूरे भारत में गणेश चतुर्थी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। आज घर में गणेश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 11:05 से दोपहर 01:38 तक था।
ग्रह दोष निवारण गणेश मंत्र
गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:।
नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक:।।
धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:।
गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम।।
गणेश चतुर्थी पर कब बन रहा है शुभ मुहूर्त?
विजय मुहूर्त- रात 02:44 मिनट से रात 03:34 मिनट तक
निशिता मुहूर्त- सितंबर 01 को सुबह 12:16 मिनट से सितंबर 01 को सुबह 01:02 मिनट तक
रवि योग- सुबह 06:23 मिनट से 01 सितंबर को सुबह 12:12 मिनट तक
गणेश चतुर्थी पर इस दिन करें एकदंत स्वरूप की पूजा
भगवान गणेश के एकदंत स्वरूप की पूजा गणेश चतुर्थी के दौरान चौथे दिन यानी भाद्रपद शुक्ल पक्ष के सप्तमी को करना विशेष फलदायी होता है। गणेश जी की एकदंत कथा व्यक्ति को संघर्ष का सामना कर विजय प्राप्त करने की सीख देती है। इसके साथ ही गणेश जी टूटे हुए दांत से इस बात की सीख मिलती है कि कैसे टूटी हुई चीज का सदुपयोग करना चाहिए।
300 साल बाद बना संयोग
गणेश चतुर्थी पर ग्रहों की स्थिति एक विशेष संयोग बन रही है। इस गणेश चतुर्थी पर चार प्रमुख ग्रह अपनी-अपनी राशि में मौजूद रहेंगे। गणेश चतुर्थी पर ग्रहों का ऐसा संयोग 300 साल बाद बना है। ऐसे में गणेश पूजा का महत्त्व बहुत अधिक बढ़ गया है। पंचांग के मुताबिक, सूर्य सिंह राशि में, बुध कन्या राशि में, गुरु मीन राशि में और शनि मकर राशि में विराजमान रहेंगे।
बिगड़े कार्यों को सफल बनाने का मंत्र
त्रयीमयायाखिलबुद्धिदात्रे बुद्धिप्रदीपाय सुराधिपाय।
नित्याय सत्याय च नित्यबुद्धि नित्यं निरीहाय नमोस्तु नित्यम्।
गणेश चतुर्थी पर करें ये आरती
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
एकदंत, दयावन्त, चार भुजाधारी,
माथे सिन्दूर सोहे, मूस की सवारी।
पान चढ़े,फूल चढ़े और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे,सन्त करें सेवा,
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश, देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया,
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया,
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा,
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जय बलिहारी।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
गणेश चतुर्थी की व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान शिव और माता पार्वती नर्मदा नदी के किनारे बैठे थे। माता पार्वती ने वहां भगवान शिव से चौपड़ खेलने को कहा। भगवान शिव भी इस खेल को खेलने के लिए तैयार हो गए। लेकिन इस खेल में होने वाले हार-जीत का निर्णय कौन लेगा यह समझ नहीं आ रहा था, इसलिए भगवान शिव ने कुछ तीनके को इकट्ठा करके एक पुतला बनाया और उसमें जान डाल दी। जान डालते ही वह पुतला एक बालक बन गया। उसी बालक को इस खेल का निर्णय लेना था।
अब भगवान शिव और माता पार्वती चौपड़ का खेल शुरू कर दिए। तीन बार चौपड़ का खेल खेला गया। हर बार माता पार्वती जीती, लेकिन भगवान शिव द्वारा निर्मित उस बालक ने भगवान शिव को ही विजय बताया। इस बात को सुनकर माता पार्वती बेहद क्रोधित हो गई और उन्होनें क्रोध में आकर उस बालक को लंगड़ा होने और कीचड़ में कीचड़ में पड़े रहने का श्राप दे दिया। बालक ने माता पार्वती से बहुत माफी मांगी। बालक के बार-बार क्षमा मांगने पर माता पार्वती ने उस बालक से कहा, कि यहां गणेश पूजन के लिए नागकन्या आएंगी उनके कहें अनुसार तुम भगवान श्री गणेश का व्रत पूरी श्रद्धा पूर्वक रखना। इस व्रत के प्रभाव से तुम इस श्राप से मुक्त हो जाओगें।
एक वर्ष के बाद उस स्थान पर नागकन्या आई। तब उस बालक ने नागकन्याओं से गणपति बप्पा के व्रत का विधि-विधान पूछा। उनके बताए अनुसार उस बालक ने 21 चतुर्थी तक बप्पा का व्रत किया। बालक की भक्ति को देखकर गणपति बप्पा बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने उस बालक को मनोवांछित वर मांगने को कहा। तब उस बालक नें सिद्धिविनायक से कहां 'हे प्रभु' मुझे इतनी शक्ति दीजिए कि मैं अपने पैरों से चलकर अपने माता-पिता के साथ कैलाश पर्वत पर जा सकूं। तब बप्पा ने तथास्तु कहा।
भगवान श्री गणेश के तथास्तु कहने के बाद वह बालक अपने माता-पिता के साथ कैलाश पर्वत पहुंचा। वहां उसने भगवान शिव को अपने ठीक होने की पूरी बात बताई। बालक की बात सुनकर भगवान शिव ने भी माता पार्वती को प्रसन्न करने के लिए 21 चतुर्थी का व्रत रखा। व्रत के प्रभाव से माता पार्वती भी प्रसन्न हो गई। इसके बाद भगवान शिव ने माता पार्वती को इस व्रत की पूरी महिमा बताई। इस बात को सुनकर माता पार्वती की मन में अपने बड़े पुत्र कार्तिक से मिलने की प्रबल इच्छा जाग उठी।
तब माता पार्वती ने भी 21 चतुर्थी का व्रत रखा। इस व्रत के प्रभाव से भगवान कार्तिकेय माता पार्वती से मिलने स्वयं आ गए। तभी से यह व्रत संसार में विख्यात हो गया और इसे हर मनोकामना को पूर्ण करने वाला व्रत माना जाने लगा। ऐसा कहा जाता है, कि यदि कोई व्यक्ति 21 चतुर्थी का व्रत पूरी श्रद्धा पूर्वक करें, तो बप्पा उसकी हर मनोकामना अवश्य पूर्ण कर देते हैं।
गणेश चतुर्थी मूर्ति स्थापना विधि
गणेश चतुर्थी के दिन सबसे पहले आप सूर्य उदय होने से पहले नित्यक्रिया से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें। अब पूजा का संकल्प लेते हुए भगवान श्री गणेश का स्मरण करते हुए अपने कुलदेवता का मनन करें। अब पूजा स्थल के स्थान पर पूर्व की दिशा में मुंह करके आसन पर बैठ जाए। अब एक चौकी पर लाल या सफेद कपड़ा बिछाकर उसके ऊपर एक थाली में चंदन, कुमकुम से स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं। थाली पर बने स्वास्तिक के निशान के ऊपर भगवान श्री गणेश की मूर्ति स्थापित करते हुए पूजा शुरू करें। पूजा करने के बाद इस मंत्र का जाप करें। गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारु भक्षणम्ं। उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥
गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं
आपकी खुशियां गणेश जी की सूंड की तरह लंबी हो,
आपकी जिंदगी उनके पेट की तरह मोटी हो,
और जीवन का हर पल लड्डू की तरह मीठा हो
गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं!
Ganesh Chaturthi 2022: गणेश जी को लगाएं इस चीज का भोग
गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश को तरह-तरह के भोग लगाए जाते हैं। लकिन इस दिन लोगों को उन्हें मोदक का भोग जरूर लगाना चाहिए। माना जाता है कि जो भक्त गणेश चतुर्थी पर मोदक का भोग लगाता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।
गणपति स्थापित करते समय दिशा का रखें ध्यान
गणपति की मूर्ति को कभी भी दक्षिण दिशा की ओर मुख करके नहीं रखना चाहिए और ना ही दक्षिण कोने में मूर्ति की स्थापना करनी चाहिए। गणपति की मूर्ति स्थापित करने के लिए उत्तर पूर्व यानी ईशाण कोण को सबसे उत्तम माना गया है। साथ ही मूर्ति को घर की पश्चिम या उत्तर दिशा में भी रख सकते हैं।
गणपति को क्यों लगाया जाता है लड्डू का भोग
एक बार देवताओं ने अपनी संयुक्त शक्ति से माता पार्वती की श्रद्धा में एक दिव्य लड्डू उत्पन्न किया। जब भगवान शिव के दोनों पुत्रों ने इसे मांगा तो पार्वती ने उन्हें पहले अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने को कहा। तब गणपति महाराज ने अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की और वो दिव्य लड्डू हासिल किया। कहते हैं कि तभी से भगवान गणेश को लड्डू या मोदक चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।
गणेश चतुर्थी में बन रहे हैं ये शुभ योग
इस साल गणपति बप्पा का उत्सव बुधवार के दिन यानी बप्पा के प्रिय वार के दिन मनाया जा रहा है इस दिन तीन बेहद शुभ योग बन रहे हैं रवि ब्रह्म और शुक्ल युग का संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक यह योग बेहद शुभ माना जा रहा है इस दिन कोई भी किया गया कार्य सफल साबित होगा ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक ऐसा योग 20 साल पहले बना था। हिंदू पंचांग के अनुसार रवि योग 31 अगस्त 2022, 06.06 सुबह, 1 सितंबर 2022, 12.12 सुबह। शुक्ल योग 31 अगस्त 2022, 12.05 एएम से 10:48 पीएम। ब्रह्म योग 31 अगस्त 2022, 10.48 पीएम 1 सितंबर 2022, 09.12 पीएम।
गणेश चतुर्थी की सामग्री
गणेश चतुर्थी से पहले भगवान गणेश की पूजा में प्रयोग होने वाली कुछ खास चीचों का इंतजाम अभी से कर लें। मूर्ति स्थापित करने के लिए चौकी, लाल रंग का कपड़ा, गंगाजल, धूप, दीप, कपूर, दूर्वा, जनेऊ, रोली, कलश, मौली, पंचामृत, लाल चंदन, पंचमेवा, मोदक, फल, सुपारी, लड्डू आदि।
गणेश चतुर्थी मूर्ति स्थापना विधि
गणेश चतुर्थी के दिन सबसे पहले आप सूर्य उदय होने से पहले नित्यक्रिया से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें। अब पूजा का संकल्प लेते हुए भगवान श्री गणेश का स्मरण करते हुए अपने कुलदेवता का मनन करें। अब पूजा स्थल के स्थान पर पूर्व की दिशा में मुंह करके आसन पर बैठ जाए। अब एक चौकी पर लाल या सफेद कपड़ा बिछाकर उसके ऊपर एक थाली में चंदन, कुमकुम से स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं। थाली पर बने स्वास्तिक के निशान के ऊपर भगवान श्री गणेश की मूर्ति स्थापित करते हुए पूजा शुरू करें। पूजा करने के बाद इस मंत्र का जाप करें। गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारु भक्षणम्ं। उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥
खरीदें ऐसी गणेश मूर्ति
यदि आप गणेश चतुर्थी के मौके पर घर में ही भगवान श्री गणेश की मूर्ति स्थापित करके उनकी पूजा करना चाहते हैं, तो आप मूर्ति खरीदते समय ध्यान रखें कि मूर्ति खंडित नहीं होनी चाहिए। भगवान के हाथों में अंकुश, पास, लड्डू, सूंड, धुमावदार और हाथ वरदान देने की मुद्रा में होनी चाहिए। भगवान श्री गणेश के शरीर पर जनेऊ और उनका वाहन चूहा जरूर होना चाहिए। ऐसी प्रतिमा की पूजा करना बहुत ही शुभ माना जाता है।
गणेश चतुर्थी का महत्व
हिंदू शास्त्र के अनुसार इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती के छोटे पुत्र भगवान श्री गणेश का जन्म हुआ था। गणेश चतुर्थी का महोत्सव भारत में हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है, कि गणेश चतुर्थी की पूजा करने से जीवन की सभी विघ्न-बाधाएं खत्म हो जाती हैं।
गणेश चतुर्थी का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि की शुरुआत 30 अगस्त 2022 को दोपहर 03 बजकर 34 मिनट से शुरू होकर 31 अगस्त 2022 को दोपहर 03 बजकर 23 मिनट पर खत्म हो जाएगा। पद्म पुराण के अनुसार भगवान श्री गणेश का जन्म स्वाति नक्षत्र में मध्य काल में हुआ था, इसी वजह से 31 अगस्त को भगवान श्री गणेश की पूजा करना शुभ और लाभकारी होगा।
भगवान गणेश को अर्पित करें लाल सिंदूर
मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश जी को लाल रंग का सिंदूर बहुत ही पसंद है। भगवान गणेश की पूजा करते समय लाल रंग के सिंदूर से उनका तिलक करना चाहिए। गणेश जी को लाल सिंदूर से तिलक करने से उनकी कृपा दृष्टि और आशीर्वाद बनी रहती है।
Ganesh Chaturthi 2022: इस वर्ष कब है अनंत चतुर्दशी?
गणेश चतुर्थी का पर्व इस वर्ष 31 अगस्त को मनाया जा रहा है। 10 दिनों तक गणेशोत्सव मनाया जाता है जिसके बाद अनंत चतुर्दशी पर गणेश जी का विसर्जन किया जाता है। इस साल अनंत चतुर्दशी 9 सितंबर 2022 को पड़ रही है।
Ganesh Chaturthi 2022 Mantra: करें इस मंत्र का पाठ
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
Ganesh Sthapana Time 2022: किस मुहूर्त में करें गणेश जी की स्थापना?
गणेश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त: 31 अगस्त को सुबह 11.05 AM से दोपहर 1.38 PM तक घर में गणेश जी की स्थापना के लिए अच्छा मुहूर्त है।
Ganesh Visarjan 2022 Date: कब होगा गणेश विसर्जन?
इस वर्ष गणेश चतुर्थी 31 अगस्त को मनाई जा रही है। गणेश चतुर्थी पर लोग अपने घरों में बप्पा की पूजा करते हैं। इसी दिन लोग अपने घर में गणेश जी की स्थापना करते हैं। इस वर्ष गणेश विसर्जन 09 सितंबर को है।
Ganesh Ji Ki Aarti: जय गणेश जय गणेश
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥
एक दंत दयावंत,
चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे
मूसे की सवारी ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥
पान चढ़े फल चढ़े,
और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे
संत करें सेवा ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥
अंधन को आंख देत,
कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत
निर्धन को माया ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥
'सूर' श्याम शरण आए,
सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥
दीनन की लाज रखो,
शंभु सुतकारी ।
कामना को पूर्ण करो
जाऊं बलिहारी ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥
दूर्वा घास चढ़ाने का मंत्र
ऊँ गं गणपतेय नम:, ऊँ गणाधिपाय नमः , ऊँ उमापुत्राय नमः ,ऊँ विघ्ननाशनाय नमः ,ऊँ विनायकाय नमः , ऊँ ईशपुत्राय नमः , ऊँ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः , ऊँएकदन्ताय नमः , ऊँ इभवक्त्राय नमः, ऊँ मूषकवाहनाय नमः, ऊँ कुमारगुरवे नमः।
चूहे का बाहर जाना शुभ संकेत
यदि गणेश चतुर्थी के दिन घर से चूहा बाहर जाता हुआ नजर आ रहा है, तो यह शुभ संकेत देता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ऐसा माना जाता है कि चूहा घर से दरिद्रता अपने साथ लेकर जा रहा है और सुख समृद्धि छोड़कर जाता है।
दूर्वा घास चढ़ाने के नियम
गणेश जी को अर्पित करने के लिए हमेशा साफ-सुथरी जगह से ही दूर्वा घास तोड़े। आप घर पर भी किसी गमले में इसे लगा सकते हैं। दूर्वा घास का जोड़ा बनाकर गणेश जी को चढ़ाय जाता है। आप 11 या फिर 21 दूर्वा घास का जोड़ा बनाएं और पूजा मे मंत्रोच्चाण के साथ इसे चढ़ाएं।
Ganesh Chaturthi 2022 पर करें गणेश स्त्रोत का पाठ
प्रणम्य शिरसा देवं गौरी विनायकम् ।
भक्तावासं स्मेर नित्यमाय्ः कामार्थसिद्धये ॥1॥
प्रथमं वक्रतुडं च एकदंत द्वितीयकम् ।
तृतियं कृष्णपिंगात्क्षं गजववत्रं चतुर्थकम् ॥2॥
लंबोदरं पंचम च पष्ठं विकटमेव च ।
सप्तमं विघ्नराजेंद्रं धूम्रवर्ण तथाष्टमम् ॥3॥
नवमं भाल चंद्रं च दशमं तु विनायकम् ।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजानन् ॥4॥
द्वादशैतानि नामानि त्रिसंघ्यंयः पठेन्नरः ।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो ॥5॥
विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मो क्षार्थी लभते गतिम् ॥6॥
जपेद्णपतिस्तोत्रं षडिभर्मासैः फलं लभते ।
संवत्सरेण सिद्धिंच लभते नात्र संशयः ॥7॥
अष्टभ्यो ब्राह्मणे भ्यश्र्च लिखित्वा फलं लभते ।
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः ॥8॥
॥ इति श्री नारद पुराणे संकष्टनाशनं नाम श्री गणपति स्तोत्रं संपूर्णम् ॥
मोरया गोसावी थे भगवान गणेश के महान भक्त
कहा जाता है कि मोरया गोसावी भगवान गणेश के महान भक्त थे। यही कारण है कि उनके नाम पर बना मोरया गोसावी समाधि मंदिर आज लोगों के बीच आस्था का केंद्र है। पुणे से करीब 18 किलोमीटर दूर चिंचवाड़ में स्थित इस मंदिर की स्थापना स्वयं मोरया गोसावी ने की थी। इस मंदिर से जुड़ी कहानी बेहद रोचक है। मोरया गोसावी का जन्म 1375 ईं में हुआ था। मोरया बचपन से ही गणेश जी के भक्त थे। मोरया गोसावी बचपन से ही हर साल गणेश चतुर्थी के दिन चिंचवाड़ से पैदल चलकर 95 किलोमीटर दूर मयूरेश्वर मंदिर भगवान गणेश के दर्शन के लिए जाते थे। ये सिलसिला 117 सालों तक चलता रहा। लेकिन इसके बाद वृद्धावस्था के कारण मोरया गोसावी पैदल गणपति के मंदिर जाने में सक्षम नहीं थे। तब एक दिन गणेश जी उनके सपने में आए और कहा कल जब तुम स्नान करके कुंड से निकलोगे तो मुझे अपने समक्ष पाओगे। भक्त मोरया का सपना सच हुआ। जब मोरया गोसावी स्नान करके निकले तो उनके समक्ष गणेश जी की ठीक वैसी ही प्रतिमा थी जैसा कि उन्होंने सपने में देखा था। मोरिया ने चिंचवाड़ में उस मूर्ति की स्थापना कर दी। धीरे-धीरे इस मंदिर की लोकप्रियता बढ़ती गई और आज दूर-दूर से लोग चिंचवाड़ स्थित इस मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
कैसे हुई गणेशोत्सव की शुरुआत (Ganesh Chaturthi 2022 Bappa Morya Story)
कहा जाता है कि गणेशोत्सव की शुरुआत महाराष्ट्र से हुई है और इसे लोकमान्य तिलक ने सबसे पहले शुरु किया। महाराष्ट्र के बाद यह उत्सव धीरे-धीरे देशभर में मनाया जाने लगा। महाराष्ट्र में पिता बप्पा कहा जाता है। भक्तों ने गणपति को पिता के रूप मे माना और बप्पा कहकर भक्ति करने लगे। इस तरह भगवान गणेश ‘गणपति बप्पा’ कहलाएं। लेकिन गणपति बप्पा के ‘मोरया’ कहलाने की कहानी बेहद रोचक है।
Ganesh Chaturthi 2022 Puja Time, Muhurat
इस साल गणेश चतुर्थी की पूजा 31 अगस्त बुधवार से प्रारंभ होने वाली है। चूंकि बुधवार भगवान गणेश को समर्पित है, इसलिए इस बार गणेश चतुर्थी की पूजा भक्तों के लिए बहुत खास होगा। 10 दिवसीय इस महोत्सव का शुभ मुहूर्त भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि यानी 30 अगस्त दोपहर से शुरू होकर 31 अगस्त दोपहर 03:30 पर समाप्त हो जाएगी। पंडितों के अनुसार इस बार बप्पा की मूर्ति की स्थापना का शुभ मुहूर्त 31 अगस्त दोपहर करीब 03:30 तक है। आपको बता दें कि गणेश विसर्जन के दिन से ही पितृ पक्ष की शुरुआत हो जाती है।
किस दिशा में रखें गणेश की मूर्ति?
यदि इस गणेश चतुर्थी पर आप भी घर में गणपति को स्थापित करने जा रहे हैं तो कुछ खास बातें याद रखें। गणेश की मूर्ति की स्थापना अगर दिशा और कोण के आधार पर करेंगे तो निश्चित ही आपकी पूजा फलदायी होगी। गणपति की सही दिशा में स्थापना आर्थिक समृद्धि के द्वार खोलती है। घर में भगवान गणेश की मूर्ति को ईशान कोण में स्थापित करना उत्तम होता है।
Ganesh Chaturthi 2022 : गणेश जी की ज्योति से नूर मिलता है
गणेश जी की ज्योति से नूर मिलता है,
सबके दिलों को सुकून मिलता है,
जो भी आता है गणपति बाप्पा के द्वार,
उन्हें कुछ न कुछ जरूर मिलता है.
गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं
Ganesh Chaturthi 2022: कैसी होनी चाहिए गणेश जी की मूर्ति?
गणेश चतुर्थी पर लोग अपने घरों में गणेश जी की मूर्ति की स्थापना करते हैं। कहा जाता है कि गणेश जी की मूर्ति की खरीदारी बहुत ध्यान से करना चाहिए। माना जाता है कि घर में गणेश जी की ऐसी मूर्ति लानी चाहिए जिसमें गणपति की मूर्ति बाईं ओर हो।
Ganesh Chaturthi 2022: गणपति की 108 नामावली
1.बालगणपति: सबसे प्रिय बालक
2. भालचन्द्र: जिसके मस्तक पर चंद्रमा हो
3. बुद्धिनाथ: बुद्धि के भगवान
4. धूम्रवर्ण: धुंए को उड़ाने वाला
5. एकाक्षर: एकल अक्षर
6. एकदन्त: एक दांत वाले
7. गजकर्ण: हाथी की तरह आंखें वाला
8. गजानन: हाथी के मुँख वाले भगवान
9. गजवक्र: हाथी की सूंड वाला
10. गजवक्त्र: जिसका हाथी की तरह मुँह है
11. गणाध्यक्ष: सभी जणों का मालिक
12. गणपति: सभी गणों के मालिक
13. गौरीसुत: माता गौरी का बेटा
14. लम्बकर्ण: बड़े कान वाले देव
15. लम्बोदर: बड़े पेट वाले
16. महाबल: अत्यधिक बलशाली वाले प्रभु
17. महागणपति: देवातिदेव
18. महेश्वर: सारे ब्रह्मांड के भगवान
19. मंगलमूर्त्ति: सभी शुभ कार्य के देव
20. मूषकवाहन: जिसका सारथी मूषक है
21. निदीश्वरम: धन और निधि के दाता
22. प्रथमेश्वर: सब के बीच प्रथम आने वाला
23. शूपकर्ण: बड़े कान वाले देव
24. शुभम: सभी शुभ कार्यों के प्रभु
25. सिद्धिदाता: इच्छाओं और अवसरों के स्वामी
26. सिद्दिविनायक: सफलता के स्वामी
27. सुरेश्वरम: देवों के देव
28. वक्रतुण्ड: घुमावदार सूंड
29. अखूरथ: जिसका सारथी मूषक है
30. अलम्पता: अनन्त देव
31. अमित: अतुलनीय प्रभु
32. अनन्तचिदरुपम: अनंत और व्यक्ति चेतना
33. अवनीश: पूरे विश्व के प्रभु
34. अविघ्न: बाधाओं को हरने वाले
35. भीम: विशाल
36. भूपति: धरती के मालिक
37. भुवनपति: देवों के देव
38. बुद्धिप्रिय: ज्ञान के दाता
39. बुद्धिविधाता: बुद्धि के मालिक
40. चतुर्भुज: चार भुजाओं वाले
41. देवादेव: सभी भगवान में सर्वोपरी
42. देवांतकनाशकारी: बुराइयों और असुरों के विनाशक
43. देवव्रत: सबकी तपस्या स्वीकार करने वाले
44. देवेन्द्राशिक: सभी देवताओं की रक्षा करने वाले
45. धार्मिक: दान देने वाला
46. दूर्जा: अपराजित देव
47. द्वैमातुर: दो माताओं वाले
48. एकदंष्ट्र: एक दांत वाले
49. ईशानपुत्र: भगवान शिव के बेटे
50. गदाधर: जिसका हथियार गदा है
51. गणाध्यक्षिण: सभी पिंडों के नेता
52. गुणिन: जो सभी गुणों क ज्ञानी
53. हरिद्र: स्वर्ण के रंग वाला
54. हेरम्ब: माँ का प्रिय पुत्र
55. कपिल: पीले भूरे रंग वाला
56. कवीश: कवियों के स्वामी
57. कीर्त्ति: यश के स्वामी
58. कृपाकर: कृपा करने वाले
59. कृष्णपिंगाश: पीली भूरी आंखवाले
60. क्षेमंकरी: माफी प्रदान करने वाला
61. क्षिप्रा: आराधना के योग्य
62. मनोमय: दिल जीतने वाले
63. मृत्युंजय: मौत को हरने वाले
64. मूढ़ाकरम: जिन्में खुशी का वास होता है
65. मुक्तिदायी: शाश्वत आनंद के दाता
66. नादप्रतिष्ठित: जिसे संगीत से प्यार हो
67. नमस्थेतु: सभी बुराइयों और पापों पर विजय प्राप्त करने वाले
68. नन्दन: भगवान शिव का बेटा
69. सिद्धांथ: सफलता और उपलब्धियों की गुरु
70. पीताम्बर: पीले वस्त्र धारण करने वाला
71. प्रमोद: आनंद
72. पुरुष: अद्भुत व्यक्तित्व
73. रक्त: लाल रंग के शरीर वाला
74. रुद्रप्रिय: भगवान शिव के चहीते
75. सर्वदेवात्मन: सभी स्वर्गीय प्रसाद के स्वीकार्ता
76) सर्वसिद्धांत: कौशल और बुद्धि के दाता
77. सर्वात्मन: ब्रह्मांड की रक्षा करने वाला
78. ओमकार: ओम के आकार वाला
79. . शशिवर्णम: जिसका रंग चंद्रमा को भाता हो
80. शुभगुणकानन: जो सभी गुण के गुरु हैं
81. श्वेता: जो सफेद रंग के रूप में शुद्ध है
82. सिद्धिप्रिय: इच्छापूर्ति वाले
83. स्कन्दपूर्वज: भगवान कार्तिकेय के भाई
84. सुमुख: शुभ मुख वाले
85. स्वरुप: सौंदर्य के प्रेमी
86. तरुण: जिसकी कोई आयु न हो
87. उद्दण्ड: शरारती
88. उमापुत्र: पार्वती के बेटे
89. वरगणपति: अवसरों के स्वामी
90. वरप्रद: इच्छाओं और अवसरों के अनुदाता
91. वरदविनायक: सफलता के स्वामी
92. वीरगणपति: वीर प्रभु
93. विद्यावारिधि: बुद्धि की देव
94. विघ्नहर: बाधाओं को दूर करने वाले
95. विघ्नहर्त्ता: बुद्धि की देव
96. विघ्नविनाशन: बाधाओं का अंत करने वाले
97. विघ्नराज: सभी बाधाओं के मालिक
98. विघ्नराजेन्द्र: सभी बाधाओं के भगवान
99. विघ्नविनाशाय: सभी बाधाओं का नाश करने वाला
100. विघ्नेश्वर: सभी बाधाओं के हरने वाले भगवान
101. विकट: अत्यंत विशाल
102. विनायक: सब का भगवान
103. विश्वमुख: ब्रह्मांड के गुरु
104. विश्वराजा: संसार के स्वामी
105. यज्ञकाय: सभी पवित्र और बलि को स्वीकार करने वाला
106. यशस्कर: प्रसिद्धि और भाग्य के स्वामी
107. यशस्विन: सबसे प्यारे और लोकप्रिय देव
108. योगाधिप: धयान के प्रभु
ऐसे बनाएं मोदक
सबसे पहले एक कढ़ाई में घी लें और उसमें नारियल डालें। फिर इसे सही से फ्राई करें और इसके बाद इसमें गुड़ डालें और ठीक से मिला लें। जब गुड़ पिघलने न लगे और मिक्सचर गाढ़ा न होने लगे तब तक पकाते रहें, फिर इसमें इलायची पाउडर डालें और सही से मिलाएं। स्टफिंग तैयार हैं अब पानी में घी, नमक, डालकर उबाल लें। फिर इसमें चावल का आटा लें और मिलाएं जब तक आटा सारा पानी न सोख ले। उसके बाद इसे ढक कर एक तरफ रख दें और थोड़ी देर बाद इसे किसी बर्तन में निकालकर गूंथ लें। अब मोदक को मोल्ड करने की बारी है। सांचे में घी लगाकर उसपर गूंथा हुआ आटा रखें और फिर उसमें थोड़ा सा स्टफिंग रखें। अब आराम से मोदक को बाहर निकाल लें। अब एक स्टीमर लें और उसमें सारे तैयार मोदक को रख लें और कम से कम 10 मिनट के लिए स्टीम करें, लीजिए मोदक बनकर तैयार है।
कैसे रिद्धि-सिद्धि बनी गणपति की पत्नी ?
एक दूसरी कथा के मुताबिक भगवान गणेश की शरीर की बनावट के चलते उनसे कोई शादी करने को तैयार नहीं था. गणपति देवी-देवताओं के विवाह में विघ्न डालने लगे। गणपति के इस व्यवहार के चलते देवतागण अपनी परेशानी लेकर ब्रह्माजी के पास पहुंचे. ब्रह्माजी ने अपनी दो मानस पुत्रियों रिद्धि और सिद्धि को गणेश जी से शिक्षा लेने के लिए उनके पास भेज दिया। जब गणेश जी के समक्ष किसी के विवाह की सूचना पहुंचती, रिद्धि और सिद्धि उनका ध्यान भटका देती। सभी विवाह बिना विघ्न के संपन्न हो गए, लेकिन जब इस बात का पता गणेश जी को लगा तो वो रिद्धि और सिद्धि पर क्रोधित होकर उन्हें श्राप देने लगे। तब ब्रह्मा जी ने गणपति के सामने रिद्धि-सिद्धि से विवाह का प्रस्ताव रखा। गणेश जी ने इसे स्वीकार कर लिया. इस तरह गणपति की दो पत्नियां हुईं।
क्यों हुए गणपति के दो विवाह ?
पौराणकि कथा के अनुसार एक बार गणेश जी को तपस्या में लीन देखकर तुलसी जी उन पर मोहित हो गईं। तुलसी जी ने गणपति के सामने शादी का प्रस्ताव रखा लेकिन गणेश जी ने खुद को ब्रह्मचारी बताते हुए शादी करने से इनकार कर दिया, गणपति की बात सुनकर तुलसी जी क्रोधित हो गईं और उन्होंने गजानन को श्राप दे दिया कि तुम्हारे दो विवाह होंगे।
इस गणेश चतुर्थी सुधारें बुध ग्रह की अशुभ स्थिति
जिसके कुंडली में बुध ग्रह अशुभ स्थिति में हो तो गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश को सिंदूर, चंदन, यज्ञोपवीत, दूर्वा अर्पित करें तथा उन्हें मोदक, लड्डू अथवा गुड़ से बनी मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद उनकी आरती करें।
Ganesh Chaturthi 2022: गणेश चतुर्थी कब?
गणेश चतुर्थी का पर्व भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से प्रारंभ होकर अगले 10 दिनों तक मनाया जाता है। अंतिम दिन चतुर्दशी के दिन गणपति बप्पा की विधिवत पूजा के बाद उनका विसर्जन करते हैं, पंचांग के मुताबिक, इस बार गणेश चतुर्थी 31 अगस्त को है।
बुध दोष से मुक्ति के लिए करें ये उपाय
गणेश चतुर्थी पर सुबह जल्दी स्नान आदि कर भगवान श्री गणेश को दूर्वा की ग्यारह या इक्कीस गांठें अर्पित करें और मन ही मन बुध दोष से मुक्ति देने की प्रार्थना करें।
सिंदूर से करें गणेश जी का श्रृंगार
शास्त्रों के अनुसार भगवान श्री गणेश जी का श्रृंगार सिंदूर से ही किया जाता है। मान्यता है कि इससे साधक की समस्त समस्याएं दूर होती हैं। गणेशोत्सव के दिन करने से बुध और केतु दोनों ग्रहों की अशुभता से मुक्ति मिल जाती है।
समृद्धि और सौभाग्य के देवता हैं श्री गणेश
भक्त इस बेहद खास दिन को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता भगवान श्री गणेश की विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं। पूजा के दौरान उन्हें सिंदूर, चंदन, यज्ञोपवीत, दूर्वा, लड्डू या गुड़ से बनी मिठाई आदि अर्पित करते हैं। गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी की विभिन्न प्रकार की पूजा से और इन उपायों के माध्यम से बुध और केतु जैसे हानिकारक ग्रहों के दोष का निवारण किया जा सकता है।
मोदक चढ़ाने से मिलती है कर्ज से भी मुक्ति
ऐसी मान्यता है कि भगवान गणेश को यदि कोई मोदक चढ़ाता है तो वह उसकी मुराद जल्दी पूरी करते हैं। साथ ही मान्यता है कि मोदक चढ़ाने से व्यक्ति को कर्ज से भी मुक्ति मिलती है। इसके अलावा भगवान गणेश को बूंदी के लड्डू भी अत्यंत प्रिय हैं। लड्डू का भोग लगाने से गणेशजी व्यक्ति को धन समृद्धि को वरदान देते हैं।
मूर्ति को ईशान कोण में करें स्थापित
ज्योतिषविद कहते हैं कि घर में भगवान गणेश की मूर्ति को ईशान कोण में स्थापित करना उत्तम होता है। घर में पूर्व-उत्तर दिशा के कोने को ईशान कोण कहते हैं। आप निसंकोच इस दिशा में गणेश मूर्ति स्थापित कर सकते हैं। जबकि घर की दक्षिण दिशा में गणेश की मूर्ति की स्थापना नहीं करनी चाहिए।
किस दिशा में रखें गणेश की मूर्ति?
यदि इस गणेश चतुर्थी पर आप भी घर में गणपति को स्थापित करने जा रहे हैं तो कुछ खास बातें याद रखें। गणेश की मूर्ति की स्थापना अगर दिशा और कोण के आधार पर करेंगे तो निश्चित ही आपकी पूजा फलदायी होगी। गणपति की सही दिशा में स्थापना आर्थिक समृद्धि के द्वार खोलती है।
घर में गणेश जी की कैसी मूर्ति लाएं?
हिंदू धर्म के जानकार कहते हैं कि घर में गणेश की मूर्ति लाने से पहले उसकी सूंड देख लें। गणेश की जिस मूर्ति की सूंड दाईं तरफ मुड़ी होती है वो सिद्धीपीठ से जुड़ी होती है। इसे दक्षिण मूर्ति या दक्षिणाभिमुखी मूर्ति भी कहा जाता है। दक्षिण दिशा यमलोक की दिशा मानी जाती है। इसलिए गणेश की ऐसी मूर्ति घर में नहीं रखनी चाहिए। घर में गणेश जी की बाईं ओर सूंड वाली मूर्ति ही लेकर आएं। इस प्रकार की मूर्ति की पूजा करना शुभ होता है।
गणपति की 108 नामावली
1.बालगणपति: सबसे प्रिय बालक
2. भालचन्द्र: जिसके मस्तक पर चंद्रमा हो
3. बुद्धिनाथ: बुद्धि के भगवान
4. धूम्रवर्ण: धुंए को उड़ाने वाला
5. एकाक्षर: एकल अक्षर
6. एकदन्त: एक दांत वाले
7. गजकर्ण: हाथी की तरह आंखें वाला
8. गजानन: हाथी के मुँख वाले भगवान
9. गजवक्र: हाथी की सूंड वाला
10. गजवक्त्र: जिसका हाथी की तरह मुँह है
11. गणाध्यक्ष: सभी जणों का मालिक
12. गणपति: सभी गणों के मालिक
13. गौरीसुत: माता गौरी का बेटा
14. लम्बकर्ण: बड़े कान वाले देव
15. लम्बोदर: बड़े पेट वाले
16. महाबल: अत्यधिक बलशाली वाले प्रभु
17. महागणपति: देवातिदेव
18. महेश्वर: सारे ब्रह्मांड के भगवान
19. मंगलमूर्त्ति: सभी शुभ कार्य के देव
20. मूषकवाहन: जिसका सारथी मूषक है
21. निदीश्वरम: धन और निधि के दाता
22. प्रथमेश्वर: सब के बीच प्रथम आने वाला
23. शूपकर्ण: बड़े कान वाले देव
24. शुभम: सभी शुभ कार्यों के प्रभु
25. सिद्धिदाता: इच्छाओं और अवसरों के स्वामी
26. सिद्दिविनायक: सफलता के स्वामी
27. सुरेश्वरम: देवों के देव
28. वक्रतुण्ड: घुमावदार सूंड
29. अखूरथ: जिसका सारथी मूषक है
30. अलम्पता: अनन्त देव
31. अमित: अतुलनीय प्रभु
32. अनन्तचिदरुपम: अनंत और व्यक्ति चेतना
33. अवनीश: पूरे विश्व के प्रभु
34. अविघ्न: बाधाओं को हरने वाले
35. भीम: विशाल
36. भूपति: धरती के मालिक
37. भुवनपति: देवों के देव
38. बुद्धिप्रिय: ज्ञान के दाता
39. बुद्धिविधाता: बुद्धि के मालिक
40. चतुर्भुज: चार भुजाओं वाले
41. देवादेव: सभी भगवान में सर्वोपरी
42. देवांतकनाशकारी: बुराइयों और असुरों के विनाशक
43. देवव्रत: सबकी तपस्या स्वीकार करने वाले
44. देवेन्द्राशिक: सभी देवताओं की रक्षा करने वाले
45. धार्मिक: दान देने वाला
46. दूर्जा: अपराजित देव
47. द्वैमातुर: दो माताओं वाले
48. एकदंष्ट्र: एक दांत वाले
49. ईशानपुत्र: भगवान शिव के बेटे
50. गदाधर: जिसका हथियार गदा है
51. गणाध्यक्षिण: सभी पिंडों के नेता
52. गुणिन: जो सभी गुणों क ज्ञानी
53. हरिद्र: स्वर्ण के रंग वाला
54. हेरम्ब: माँ का प्रिय पुत्र
55. कपिल: पीले भूरे रंग वाला
56. कवीश: कवियों के स्वामी
57. कीर्त्ति: यश के स्वामी
58. कृपाकर: कृपा करने वाले
59. कृष्णपिंगाश: पीली भूरी आंखवाले
60. क्षेमंकरी: माफी प्रदान करने वाला
61. क्षिप्रा: आराधना के योग्य
62. मनोमय: दिल जीतने वाले
63. मृत्युंजय: मौत को हरने वाले
64. मूढ़ाकरम: जिन्में खुशी का वास होता है
65. मुक्तिदायी: शाश्वत आनंद के दाता
66. नादप्रतिष्ठित: जिसे संगीत से प्यार हो
67. नमस्थेतु: सभी बुराइयों और पापों पर विजय प्राप्त करने वाले
68. नन्दन: भगवान शिव का बेटा
69. सिद्धांथ: सफलता और उपलब्धियों की गुरु
70. पीताम्बर: पीले वस्त्र धारण करने वाला
71. प्रमोद: आनंद
72. पुरुष: अद्भुत व्यक्तित्व
73. रक्त: लाल रंग के शरीर वाला
74. रुद्रप्रिय: भगवान शिव के चहीते
75. सर्वदेवात्मन: सभी स्वर्गीय प्रसाद के स्वीकार्ता
76) सर्वसिद्धांत: कौशल और बुद्धि के दाता
77. सर्वात्मन: ब्रह्मांड की रक्षा करने वाला
78. ओमकार: ओम के आकार वाला
79. . शशिवर्णम: जिसका रंग चंद्रमा को भाता हो
80. शुभगुणकानन: जो सभी गुण के गुरु हैं
81. श्वेता: जो सफेद रंग के रूप में शुद्ध है
82. सिद्धिप्रिय: इच्छापूर्ति वाले
83. स्कन्दपूर्वज: भगवान कार्तिकेय के भाई
84. सुमुख: शुभ मुख वाले
85. स्वरुप: सौंदर्य के प्रेमी
86. तरुण: जिसकी कोई आयु न हो
87. उद्दण्ड: शरारती
88. उमापुत्र: पार्वती के बेटे
89. वरगणपति: अवसरों के स्वामी
90. वरप्रद: इच्छाओं और अवसरों के अनुदाता
91. वरदविनायक: सफलता के स्वामी
92. वीरगणपति: वीर प्रभु
93. विद्यावारिधि: बुद्धि की देव
94. विघ्नहर: बाधाओं को दूर करने वाले
95. विघ्नहर्त्ता: बुद्धि की देव
96. विघ्नविनाशन: बाधाओं का अंत करने वाले
97. विघ्नराज: सभी बाधाओं के मालिक
98. विघ्नराजेन्द्र: सभी बाधाओं के भगवान
99. विघ्नविनाशाय: सभी बाधाओं का नाश करने वाला
100. विघ्नेश्वर: सभी बाधाओं के हरने वाले भगवान
101. विकट: अत्यंत विशाल
102. विनायक: सब का भगवान
103. विश्वमुख: ब्रह्मांड के गुरु
104. विश्वराजा: संसार के स्वामी
105. यज्ञकाय: सभी पवित्र और बलि को स्वीकार करने वाला
106. यशस्कर: प्रसिद्धि और भाग्य के स्वामी
107. यशस्विन: सबसे प्यारे और लोकप्रिय देव
108. योगाधिप: धयान के प्रभु
नामावली का जाप कर गणपति को करें प्रसन्न
यूं तो गौरीपुत्र भगवान गणेश के अनेकों नाम हैं, लेकिन श्रीगणेश के इन 108 नामों की नामावली का जाप करने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
गणेशोत्सव का इतिहास
गणेश उत्सव की शुरुआत मुख्य तौर पर 1893 मानी जाती है। लेकिन 1893 से पहले भी गणेश उत्सव मनाया जाता था। हालांकि या छोटे पैमाने पर होता था। लोग केवल अपने घरों में ही इस मौके पर गणपति की पूजा करते थे। उस समय बड़े आयोजन के साथ धूमधाम से गणेश उत्सव नहीं बनाए जाते थे और पंडाल आदि में गणपति की स्थापना नहीं की जाती थी। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जोकि एक युवा क्रांतिकारी नेता के रूप में जाने थे। वह जब भी किसी मंच पर भाषण देते थे तो ब्रिटिश अवसरों पर आग बरसा देते थे। स्वराज के संघर्ष के लिए तिलक अपनी बात को जन-जन तक पहुंचाना चाहते थे। लेकिन इसके लिए उन्हें एक सार्वजनिक मंच की जरूरत थी, जहां वह अपने विचारों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचा सके। इसके लिए तिलक ने गणपति उत्सव को चुना।
भगवान गणेश का जन्मोत्सव
इस साल गणेश चतुर्थी बुधवार 31 अगस्त 2022 को मनाया जाएगा। गणेश उत्सव को भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी का त्योहार हर साल ही बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस दौरान मंदिर से लेकर घरों और मोहल्लों में गजानन विराजमान किए जाते हैं।
Ganesh Chaturthi 2022: गणेश चालीसा लिरिक्स हिंदी में
जय गणपति सदगुणसदन, कविवर बदन कृपाल।
विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल।।
जय जय जय गणपति गणराजूमंगल भरण करण शुभ काजू।
जै गजबदन सदन सुखदाता विश्व विनायक बुद्घि विधाता ।।
वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन।
राजत मणि मुक्तन उर माला स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला।।
पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं मोदक भोग सुगन्धित फूलं।
सुन्दर पीताम्बर तन साजित चरण पादुका मुनि मन राजित।।
धनि शिवसुवन षडानन भ्राता गौरी ललन विश्वविख्याता।
ऋद्घिसिद्घि तव चंवर सुधारे मूषक वाहन सोहत द्घारे।।
कहौ जन्म शुभकथा तुम्हारी अति शुचि पावन मंगलकारी।
एक समय गिरिराज कुमारी पुत्र हेतु तप कीन्हो भारी।।
भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा तब पहुंच्यो तुम धरि द्घिज रुपा।
अतिथि जानि कै गौरि सुखारी बहुविधि सेवा करी तुम्हारी।।
अति प्रसन्न है तुम वर दीन्हा मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा।
मिलहि पुत्र तुहि, बुद्घि विशाला बिना गर्भ धारण, यहि काला।।
गणनायक, गुण ज्ञान निधाना पूजित प्रथम, रुप भगवाना।
अस कहि अन्तर्धान रुप है पलना पर बालक स्वरुप है।।
बनि शिशु, रुदन जबहिं तुम ठाना लखि मुख सुख नहिं गौरि समाना।
सकल मगन, सुखमंगल गावहिं नभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं।।
शम्भु, उमा, बहु दान लुटावहिं सुर मुनिजन। सुत देखन आवहिं।
लखि अति आनन्द मंगल साजा देखन भी आये शनि राजा।।
निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं बालक। देखन चाहत नाहीं।
गिरिजा कछु मन भेद बढ़ायो उत्सव मोर न शनि तुहि भायो।।
कहन लगे शनि, मन सकुचाई का करिहौ। शिशु मोहि दिखाई
नहिं विश्वास उमा उर भयऊ शनि सों बालक देखन कहाऊ।।
पडतहिं, शनि दृग कोण प्रकाशा बोलक सिर उड़ि गयो अकाशा।
गिरिजा गिरीं विकल है धरणी सो दुख दशा गयो नहीं वरणी।।
हाहाकार मच्यो कैलाशा शनि कीन्हो लखि सुत को नाशा।
तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो काटि चक्र सो गज शिर लाये।।
बालक के धड़ ऊपर धारयो प्राण, मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो।
नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे प्रथम पूज्य बुद्घि निधि, वन दीन्हे।।
बुद्ध परीक्षा जब शिव कीन्हा पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा।
चले षडानन, भरमि भुलाई रचे बैठ तुम बुद्घि उपाई।।
चरण मातुपितु के धर लीन्हें तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें।
धानी गणेश कही शिवाये हुए हर्षयो नभा ते सुरन सुमन बहु बरसाए।।
तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई शेष सहसमुख सके न गाई।
मैं मतिहीन मलीन दुखारी करहुं कौन विधि विनय तुम्हारी।।
भजत रामसुन्दर प्रभुदासा जग प्रयाग, ककरा।
दर्वासा अब प्रभु दया दीन पर कीजै अपनी भक्ति शक्ति कछु दीजै।।
।।दोहा।।
श्री गणेश यह चालीसा,
पाठ करें धर ध्यान,
नित नव मंगल गृह बसै,
लहे जगत सन्मान,
सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश,
ऋषि पंचमी दिनेश,
पूरण चालीसा भयो,
मंगल मूर्ति गणेश।।
Ganesh Chaturthi 2022: क्या है गणेश चतुर्थी पर शुद्ध जल से अभिषेक करने का लाभ
गणेश चतुर्थी पर गणपति का शुद्ध जल से अभिषेक किया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन गणपति का शुद्ध जल से अभिषेक करने से सारी समस्याएं दूर हो जाती हैं।
Ganesh Chaturthi 2022: करें यह उपाय
हर मनोकामना पूरी करने के लिए गणेश चतुर्थी पर गुड़ की 21 गोलियां बना लें। इनका आकार छोटा ही रखें। फिर इस शुभ दिन पर गणेश मंदिर में दूर्वा के साथ इन्हें अर्पित करें। माना जाता है कि ऐसा करने से मनोकामनाएं जल्दी पूरी हो जाती हैं।
Ganesh Chatthi 2022 Upay: गणेश चतुर्थी पर करें यह उपाय
धन लाभ के लिए तथा गणेश जी का आशीर्वाद पाने के लिए लोग इन दिन कई तरह के उपाय करते हैं। माना जाता है कि गणेश चतुर्थी पर गुड़ में शुद्ध घी मिलाकर गणपति को भोग लगाने से धन लाभ होता है।
Ganesh Ji Ki Aarti In Hindi: जय गणेश जय गणेश
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥
एक दंत दयावंत,
चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे
मूसे की सवारी ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥
पान चढ़े फल चढ़े,
और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे
संत करें सेवा ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥
अंधन को आंख देत,
कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत
निर्धन को माया ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥
'सूर' श्याम शरण आए,
सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥
दीनन की लाज रखो,
शंभु सुतकारी ।
कामना को पूर्ण करो
जाऊं बलिहारी ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥
Ganesh Chaturthi 2022: गणेश स्त्रोत पाठ
गणेश स्त्रोत पाठ
प्रणम्य शिरसा देवं गौरी विनायकम् ।
भक्तावासं स्मेर नित्यमाय्ः कामार्थसिद्धये ॥1॥
प्रथमं वक्रतुडं च एकदंत द्वितीयकम् ।
तृतियं कृष्णपिंगात्क्षं गजववत्रं चतुर्थकम् ॥2॥
लंबोदरं पंचम च पष्ठं विकटमेव च ।
सप्तमं विघ्नराजेंद्रं धूम्रवर्ण तथाष्टमम् ॥3॥
नवमं भाल चंद्रं च दशमं तु विनायकम् ।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजानन् ॥4॥
द्वादशैतानि नामानि त्रिसंघ्यंयः पठेन्नरः ।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो ॥5॥
विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मो क्षार्थी लभते गतिम् ॥6॥
जपेद्णपतिस्तोत्रं षडिभर्मासैः फलं लभते ।
संवत्सरेण सिद्धिंच लभते नात्र संशयः ॥7॥
अष्टभ्यो ब्राह्मणे भ्यश्र्च लिखित्वा फलं लभते ।
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः ॥8॥
॥ इति श्री नारद पुराणे संकष्टनाशनं नाम श्री गणपति स्तोत्रं संपूर्णम् ॥
Ganesh Chaturthi 2022: शुभ दिन पर करें इस मंदिर के दर्शन
गणेश चतुर्थी का त्योहार इस वर्ष 31 अगस्त को है। माना जाता है कि इस शुभ दिवस पर लोगों को भगवान गणेश के मंदिरों में दर्शन करना चाहिए। इस दिन आप महाराष्ट्र के मुंबई में स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर भगवान गणेश के दर्शन कर सकते हैं। यहां देश-विदेश से श्रद्धालु अपनी इस दिन गणेश दी के दर्शन करने आते हैं।
Ganesh Chaturthi 2022: गणेश जी को चढ़ाएं ये फूल
पुराणों के मुताबिक, भगवान गणेश को पारिजात का फूल प्रिय है। कहा जाता है कि यह फूल स्वर्ग से आया है जिसे हरसिंगार भी कहा जाता है। गणेश चतुर्थी पर दूर्वा के साथ गणेश जी को पारिजात का फूल भी चढ़ाया जाता है। इससे भगवान प्रसन्न होकर भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं।
Ganesh Chaturthi 2022: किस दिशा में स्थापिक करें गणेश जी की मूर्ति
गणेश चतुर्थी 2022 पर लोग अपने घरों में गणेश जी की मूर्ति कि स्थपना करते हैं। मूर्ति स्थापित करने से पहले लोगों को दिशा पर विशेष ध्यान देना चाहिए। माना जाता है कि इस दिन गणेश जी की मूर्ति ईशान कोण में स्थापित करना उत्तम होता है।
Ganesh Chaturthi 2022: इस दिन कब रहेगा शुभ मुहूर्त
विजय मुहूर्त- रात 02:44 मिनट से रात 03:34 मिनट तक
निशिता मुहूर्त- सितंबर 01 को सुबह 12:16 मिनट से सितंबर 01 को सुबह 01:02 मिनट तक
रवि योग- सुबह 06:23 मिनट से 01 सितंबर को सुबह 12:12 मिनट तक
Ganpati Sthapana Mantra: घर में गणपति की स्थापना करते समय पढ़ें यह मंत्र
अस्य प्राण प्रतिषठन्तु अस्य प्राणा: क्षरंतु च. श्री गणपते त्वम सुप्रतिष्ठ वरदे भवेताम|
गणेशपूजने कर्म यत् न्यूनमधिकम कृतम.
तेन सर्वेण सर्वात्मा प्रसन्न अस्तु गणपति सदा मम|
Ganes Visarjan 2022 Date: कब है गणेश विसर्जन?
गणेश विसर्जन 2022 की तिथि: इस वर्ष गणेश चतुर्थी तिथि 31 अगस्त को है। इस दिन गणेश जी की स्थापना की जाएगी। इसके बाद 10 दिनों तक गणेश उत्सव मनाया जाएगा, फिर 09 सितंबर को गणेश विसर्जन होगा।
Ganesh Chaturthi 2022 Puja Muhurat: गणेश चतुर्थी पर पूजा का मुहूर्त
गणेश चतुर्थी हर वर्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर पड़ती है। 31 अगस्त यानी गणेश चतुर्थी पर पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 11:24 से दोपहर 1:54 तक है।
Ganesh Chaturthi 2022 Tithi: कब से प्रारंभ हो रही है चतुर्थी तिथि?
गणेश चतुर्थी 2022, 31 अगस्त को मनाई जा रही है। चतुर्थी तिथि एक दिन पहले यानी 30 अगस्त को शाम 3:33 से प्रारंभ हो रही है। जो 31 अगस्त को शाम 3:22 पर समाप्त हो जाएगी।
Ganesh Chaturthi 2022 Date: वर्ष 2022 में कब है गणेश चतुर्थी?
भारत में गणेश चतुर्थी का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष गणेश चतुर्थी 31 अगस्त को पड़ रही है।


