Bhishma Niti In Hindi: महाभारत का युद्ध सबसे बड़े युद्ध में से एक है। ये युद्ध द्वापरयुग में कौरवों और पांडवों के बीच लड़ा गया। महाभारत का युद्ध पूरे 18 दिन तक चला था। युद्ध के 10 दिन के भीतर ही अजुर्न के बाणों से घायल होकर भीष्म पितामह बाणों की शौय्या पर आ गए। मृत्यु शौय्या पर लेटकर भीष्म पितामह ने पांडवों को गूढ़ ज्ञान दिए थे। भीष्म पितामह पूरे 58 दिनों तक मृत्यु शौय्या पर लेटे हुए थे। इस समय में भीष्म पितामह ने अजुर्न को बहुत ही महत्वपूर्ण बात बताई थी। ऐसे में आइए जानते हैं भीष्म ने अजुर्न से क्या कहा।
Bhishma Niti In Hindi (भीष्म नीति)
सत्ता का प्रयोग उपभोग के लिए ना करेंभीष्म पितामह ने अजुर्न को बताया कि सत्ता का प्रयोग कभी भी अपने उपभोग के लिए नहीं करना चाहिए। राजा को हर कदम पर अपनी परीक्षा देकर अपने समाज का कल्याण करना चाहिए। शासक को अपने प्रजा को अपने संतान के सामान मानना चाहिए।
लालसा ना रखें
भीष्म पितामह ने कहा कि सत्ता पान के बाद कभी भी शासक को घंमड़ नहीं करना चाहिए। सुख की लालसा राजा को नहीं होनी चाहिए। हमेशा अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए।
कठपुतली ना बनें
बाणों की शौय्या पर लेटकर भीष्म ने अजुर्न से कहा कि कभी भी मनुष्य को किसी के हाथ की कठपुतली नहीं बनना चाहिए। जो व्यक्ति समयानुकूल के विचार करता है। वो कभी भी किसी के इशारे पर नहीं चल सकता।
त्याग करें
भीष्म ने कहा कि बिना त्याग के कभी भी कुछ नहीं प्राप्त होता है। त्याग के बिना मनुष्य किसी डर पर विजय की प्राप्ति नहीं हो सकती है। त्याग करने से मानव को परम सुख की प्राप्ति होती है।
अपमान ना करें
भीष्म पितामह अजुर्न से कहते है कि मनुष्य को कभी भी किसी से इस तरह की बात नहीं करनी चाहिए। जिससे किसी दूसरे व्यक्ति को कोई कष्ट पहुंचे। व्यक्ति को अहंकार नहीं करना चाहिए और ना ही किसी का अपमान करना चाहिए।
