Bhishma Niti In Hindi: मृत्यु शय्या पर लेटे भीष्म ने युद्धिष्ठिर को कई तरह की शिक्षाएं दी थीं। जिसमें मुख्य रूप से उन्होंने राजधर्म, मोक्षधर्म और आपद्धर्म के बारे में बताया था। उस दौरान युद्धिष्ठिर ने भीष्म से उनकी लंबी आयु और स्वस्थ जीवन का भी रहस्य पूछा था। तब भीष्म पितामह ने स्वस्थ जीवन के उन्हें 12 महत्वपूर्ण बिंदू बताए थे। भीष्म द्वारा दी गई ये शिक्षाएं आज के समय में भी प्रासंगिक नजर आती हैं। जानिए भीष्म ने युद्धिष्ठिर को स्वस्थ जीवन से जुड़े कौन से रहस्य बताए थे।
मृत्यु से पहले भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को बताया था अपने स्वस्थ जीवन का रहस्य
- मन को वश में रखना।
- घमंड नहीं करना।
- विषयों की ओर बढ़ती हुई इच्छाओं को रोकना।
- अतिथि व लाचार को आश्रय देना।
- दूसरों की निन्दा न करना न सुनना।
- नियमपूर्वक शास्त्र पढ़ना व सुनना।
- दिन में नहीं सोना।
- स्वयं आदर न चाहकर दूसरों को आदर देना।
- क्रोध के वशीभूत नहीं रहना।
- कटु वचन सुनकर भी उतर नहीं देना।
- मार खाने पर भी शांत व सम रहना।
- स्वाद के लिए नहीं स्वास्थ्य के लिए भोजन करना।
भीष्म की नीतियों का अर्थ
जब मन वश में रहेगा तो व्यक्ति अपना हर काम अच्छे से कर पायेगा और मानसिक तनाव नहीं होगा। घमंड नहीं करेगा तो उसे हर जगह सम्मान मिलेगा। अपने इच्छाओं पर कंट्रोल रखेगा तो बेवजह की परेशानी नहीं होगी। दूसरों की निन्दा करने से बचेंगे तो परेशान नहीं होंगे। नियमपूर्वक शास्त्र पढ़ने से जीवन की कई परेशानियों का हल खुद ब खुद मिल जाएगा। दिन में नहीं सोएंगे तो शरीर में आलस नहीं रहेगा। क्रोध नहीं करेंगे तो तमाम उलझनों से बच सकेंगे। विषम परिस्थितियों में भी अपने आप को शांत रखने से अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल रहेंगे। अगर स्वास्थ्य के लिए भोजन करेंगे तो कभी कोई बीमारी नहीं होगी।
