अध्यात्म

Bhaum Pradosh Vrat Katha: आज रखा जाएगा भौम प्रदोष व्रत, यहां पढ़ें व्रत की पूर्ण कथा

भौम प्रदोष व्रत कथा, Bhaum Pradosh Vrat Katha: प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है। आज 2 दिसंबर की तारीख को भौम प्रदोष का व्रत रखा जाएगा, इस दिन पर पूजा पाठ करने के साथ व्रत रखना और कथा का पाठ करने का महत्व होता है। यहां देखें भौम प्रदोष व्रत की कथा।

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bhaum pradosh vrat katha

भौम प्रदोष व्रत कथा, Bhaum Pradosh Vrat Katha: प्रदोष व्रत हिंदू पंचांग के अनुसार हर मास कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन आते हैं। पर जब यही व्रत मंगलवार को पड़ता है तो इसे भौम प्रदोष कहा जाता है। इस दिन पर भगवान शिव का विधिवत पूजन करना बहुत ही सिद्ध माना जाता है। वहीं पूजा पाठ के साथ व्रत कथा करने का भी बहुत महत्व होता है। कहा जाता है कि, भौम प्रदोष व्रत की कथा न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से काफी सिद्ध है। बल्कि ये जीवन के कठिन संकटों को भी दूर करती है। यहां पढ़ें भौम प्रदोष व्रत की पूर्ण कथा हिंदी में -

भौम प्रदोष व्रत कथा 2025

मंगलवार प्रदोष व्रत की कथा अनुसार एक समय की बात है। एक नगर में एक वृद्धा रहती थी। जिसका एक ही पुत्र था। वृद्धा हनुमान जी की परम भक्त थी और उनपर खूब श्रद्धा और विश्वास रखती थी। वह प्रत्येक मंगलवार को नियमपूर्वक व्रत भी रखती थी। एक बार हनुमानजी ने उस वृद्ध महिला की श्रद्धा का परीक्षण करने का विचार किया। हनुमानजी साधु के वेश में वृद्धा के घर गए और पुकारने लगे- है कोई हनुमान भक्त, जो हमारी इच्छा पूर्ण करे? पुकार सुन वृद्धा जल्दी से बाहर आई और साधु को प्रणाम कर बोली- आज्ञा महाराज, हनुमान जी साधु के रूप में बोले- मैं भूखा हूं, भोजन करूंगा, तुम थोड़ी जमीन लीप दो।

वृद्धा दुविधा में पड़ गई और हाथ जोड़कर बोली- महाराज! लीपने और मिट्टी खोदने के अलावा आप कोई दूसरी आज्ञा दें, मैं अवश्य पूर्ण करूंगी। साधु ने तीन बार प्रतिज्ञा कराने के बाद कहा- तू अपने बेटे को बुला। मैं उसकी पीठ पर आग जलाकर भोजन बनाऊंगा। यह सुनकर वृद्धा घबरा गई, लेकिन वह प्रतिज्ञाबद्ध थी। उसने अपने पुत्र को बुलाकर साधु को सौंप दिया।

वेशधारी साधु हनुमान जी ने वृद्धा के हाथों से ही उसके पुत्र को पेट के बल लिटवाया और उसकी पीठ पर आग जलवाई। आग जलाकर वृद्धा दु:खी मन से अपने घर में चली गई। इधर भोजन बनाकर साधु ने उस वृद्धा को बुलाया और कहा कि उनका भोजन बन गया है। तुम अपने पुत्र को पुकारो ताकि वह भी आकर भोग लगा ले। इस पर वृद्धा बोली- उसका नाम लेकर मुझे और कष्ट न दें। लेकिन जब साधु महाराज नहीं माने तो वृद्धा ने अपने पुत्र को आवाज दी। वह अपनी मां के पास आ गया। अपने पुत्र को जीवित देख वृद्धा को आश्चर्य हुआ और वह उस साधु के चरणों में गिर पड़ी। तब हनुमानजी ने उस वृद्धा को अपने वास्तविक रूप के दर्शन दिए और वृद्धा को भक्ति का आशीर्वाद दिया।

बोलो बजरंगबली की जय.. हर हर महादेव

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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