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दुर्गा पूजा 2027 कैलेंडर: कब होगी महाषष्ठी, महाअष्टमी और महानवमी?

Durga Puja 2027 Dates: दुर्गा पूजा का त्योहार मां दुर्गा के भक्तों के लिए बेहद खास होता है। साल 2027 में यह पर्व कब शुरू होगा और कब खत्म होगा, जानें।

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दुर्गा पूजा का त्योहार

Durga Puja 2027 Dates: दुर्गा पूजा का नाम सुनते ही खूबसूरत पंडाल, मां दुर्गा की भव्य प्रतिमाएं, ढाक की आवाज और चारों तरफ उत्सव का माहौल याद आने लगता है। खासकर पश्चिम बंगाल में इस त्योहार की रौनक देखते ही बनती है। दुर्गा पूजा सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों के मिलने-जुलने, कला और संस्कृति का आनंद लेने और बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाने का भी अवसर है। अगर आप भी अगले साल इस पर्व का इंतजार कर रहे हैं, तो यहां जानिए दुर्गा पूजा 2027 की तारीखें और इससे जुड़ी खास बातें।

दुर्गा पूजा 2027 कब है? जानें तारीख

साल 2027 में दुर्गा पूजा का मुख्य उत्सव अक्टूबर में मनाया जाएगा। इस दौरान महाषष्ठी से लेकर विजयादशमी तक अलग-अलग धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रमुख तारीखें इस प्रकार हैं:

महालया: 29 सितंबर 2027

महाषष्ठी: 5 अक्टूबर 2027

महासप्तमी: 6 अक्टूबर 2027

महाअष्टमी: 7 अक्टूबर 2027

महानवमी: 8 अक्टूबर 2027

विजयादशमी: 9 अक्टूबर 2027 (उत्तर भारत में दशहरा)

ध्यान दें कि बंगाल में विजयादशमी और प्रतिमा विसर्जन की तारीख स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए पूजा का कार्यक्रम तय करने से पहले स्थानीय पंचांग जरूर देख लें।

दुर्गा पूजा का क्या है धार्मिक महत्व?

दुर्गा पूजा का सबसे बड़ा संदेश है कि आखिर में जीत सच्चाई और अच्छाई की ही होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी दुर्गा ने इसी दौरान महिषासुर नाम के राक्षस का वध करके संसार को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। इसी वजह से मां दुर्गा को शक्ति, साहस और बुराई का नाश करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है।

यह पर्व महिलाओं की शक्ति और आत्मविश्वास का संदेश भी देता है। भक्त मां दुर्गा से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना करते हैं। अलग-अलग राज्यों में पूजा की परंपराएं भले ही अलग हों, लेकिन श्रद्धा और उत्साह का भाव लगभग एक जैसा रहता है।

परिवार और समुदाय को जोड़ता है यह त्योहार

दुर्गा पूजा लोगों को एक साथ लाने का भी काम करती है। नौकरी या पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों में रहने वाले कई लोग इस दौरान अपने घर लौटने की कोशिश करते हैं। बाजारों में रौनक बढ़ जाती है, लोग नए कपड़े खरीदते हैं और घरों में खास पकवान बनाए जाते हैं।

पंडालों में सामूहिक आयोजन और भोग वितरण से लोगों को एक-दूसरे के साथ समय बिताने का मौका मिलता है। यही वजह है कि दुर्गा पूजा धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक मेलजोल और सांस्कृतिक पहचान का भी बड़ा उत्सव है।

पंडाल और सजावट क्यों होते हैं खास?

दुर्गा पूजा की सबसे आकर्षक चीजों में से एक है पंडालों की सजावट। पश्चिम बंगाल, खासकर कोलकाता में, अलग-अलग थीम पर भव्य पंडाल तैयार किए जाते हैं। कहीं ऐतिहासिक इमारतों की झलक दिखाई देती है, तो कहीं लोककला, पर्यावरण और सामाजिक संदेशों को सजावट का हिस्सा बनाया जाता है।

कारीगर महीनों पहले से मां दुर्गा की प्रतिमाएं और पंडाल बनाने की तैयारी शुरू कर देते हैं। उत्सव के दिनों में लोग परिवार और दोस्तों के साथ पंडाल घूमने निकलते हैं। कई जगह सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगीत और पारंपरिक नृत्य भी आयोजित किए जाते हैं।

prabhat sharma
प्रभात शर्माauthor

प्रभात शर्मा टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के फीचर डेस्क में कार्यरत ट्रैवल और लाइफस्टाइल राइटर हैं। यात्राओं के प्रति उनका गहरा जुनून और नई जगहों को समझने–परखने की क्षमता उनकी लेखन शैली को बेहद जीवंत और पाठकों से जोड़ने वाली बनाती है। वे ऑफबीट डेस्टिनेशन, लोकल कल्चर, हेरिटेज साइट्स, रोड ट्रिप्स, फूड जर्नी और बजट ट्रैवल जैसे विषयों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। प्रभात की स्टोरीज़ सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि यात्रा के माहौल, भाव और अनुभव को भी महसूस कराती हैं। अब तक 7,000 से अधिक कंटेंट लिख चुके प्रभात अपनी सहज भाषा, प्रामाणिक जानकारी और अनुभव-आधारित दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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