अध्यात्म

Sankashti Chaturthi 2023: आज है भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और धन वृद्धि के उपाय

  • Authored by: लवीना शर्मा
  • Updated Mar 11, 2023, 06:38 AM IST

Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2023: हिंदू धर्म में भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी व्रत की काफी मान्यता है। कहते हैं इस दिन गणेश जी की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के सारे दुख दूर हो जाते हैं।

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10 या 11 मार्च कब है भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी, जानें सही डेट

Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2023 Date And Muhurat: भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी व्रत भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए खास माना जाता है। इस बार ये व्रत 11 मार्च को पड़ रहा है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार जो व्यक्ति ये व्रत करता है उसे भगवान गणेश का महा वरदान अवश्य प्राप्त होता है। इतना ही नहीं इस व्रत को करने से व्यक्ति की मनचाही मनोकामना पूर्ण होती है। इस दिन श्री गणेश जी के साथ चंद्रमा की पूजा का भी विधान बताया गया है।

मान्यता है भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश के 12 नामों का स्मरण करने से व्यक्ति के सारे दुख दूर हो जाते हैं। भगवान गणेश के ये 12 नाम हैं सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लंबोदर, विकट, विघ्न नाशक, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचंद्र और गजानन।

Bhalchandra Sankashti Chaturthi Date And Muhurat (भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी तिथि और मुहूर्त)

चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 10 मार्च की रात 09:42 बजे से होगा और इसकी समाप्ति 11 मार्च की रात 10:05 पर होगी। ऐसे में संकष्टी चतुर्थी व्रत 11 मार्च को रखा जाएगा। संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रोदय रात 10:03 पर होगा।

भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी के उपाय (Bhalchandra Sankashti Chaturthi Upay)

  • इस दिन भगवान गणेश को लाल गुलाब या लाल गुड़हल के 27 फूल अवश्य अर्पित करें। ऐसा करने से नौकरी की परेशानियों से मुक्ति मिल जाएगी।
  • यदि बार-बार प्रमोशन रुक जा रहा है तो इस दिन भगवान गणेश की पीली रंग की तस्वीर लगाएं और फिर उस तस्वीर की रोजाना पूजा करें।
  • इस दिन भगवान गणेश की विधि विधान पूजा करें और ॐ नमो भगवते गजाननाय मंत्र का जाप करें।
  • इस दिन की पूजा में भगवान गणेश को पीला मोदक जरूर अर्पित करें।
  • घर की उत्तर दिशा में भगवान गणेश और लक्ष्मी जी की साथ वाली तस्वीर लगाएं।
  • फिर इस तस्वीर पर प्रतिदिन गुलाब और पीले रंग के फूल अर्पित करें।

हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक महीने में दो चतुर्थी तिथि पड़ती है। जिसमें कृष्ण पक्ष की चतुर्थी संकष्टी चतुर्थी कहलाती है और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी विनायक चतुर्थी के नाम से जानी जाती है। चैत्र कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है।

लवीना शर्मा
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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