Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2023 Date And Muhurat: भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी व्रत भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए खास माना जाता है। इस बार ये व्रत 11 मार्च को पड़ रहा है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार जो व्यक्ति ये व्रत करता है उसे भगवान गणेश का महा वरदान अवश्य प्राप्त होता है। इतना ही नहीं इस व्रत को करने से व्यक्ति की मनचाही मनोकामना पूर्ण होती है। इस दिन श्री गणेश जी के साथ चंद्रमा की पूजा का भी विधान बताया गया है।
मान्यता है भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश के 12 नामों का स्मरण करने से व्यक्ति के सारे दुख दूर हो जाते हैं। भगवान गणेश के ये 12 नाम हैं सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लंबोदर, विकट, विघ्न नाशक, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचंद्र और गजानन।
Bhalchandra Sankashti Chaturthi Date And Muhurat (भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी तिथि और मुहूर्त)
चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 10 मार्च की रात 09:42 बजे से होगा और इसकी समाप्ति 11 मार्च की रात 10:05 पर होगी। ऐसे में संकष्टी चतुर्थी व्रत 11 मार्च को रखा जाएगा। संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रोदय रात 10:03 पर होगा।
भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी के उपाय (Bhalchandra Sankashti Chaturthi Upay)
- इस दिन भगवान गणेश को लाल गुलाब या लाल गुड़हल के 27 फूल अवश्य अर्पित करें। ऐसा करने से नौकरी की परेशानियों से मुक्ति मिल जाएगी।
- यदि बार-बार प्रमोशन रुक जा रहा है तो इस दिन भगवान गणेश की पीली रंग की तस्वीर लगाएं और फिर उस तस्वीर की रोजाना पूजा करें।
- इस दिन भगवान गणेश की विधि विधान पूजा करें और ॐ नमो भगवते गजाननाय मंत्र का जाप करें।
- इस दिन की पूजा में भगवान गणेश को पीला मोदक जरूर अर्पित करें।
- घर की उत्तर दिशा में भगवान गणेश और लक्ष्मी जी की साथ वाली तस्वीर लगाएं।
- फिर इस तस्वीर पर प्रतिदिन गुलाब और पीले रंग के फूल अर्पित करें।
हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक महीने में दो चतुर्थी तिथि पड़ती है। जिसमें कृष्ण पक्ष की चतुर्थी संकष्टी चतुर्थी कहलाती है और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी विनायक चतुर्थी के नाम से जानी जाती है। चैत्र कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है।
