Navaratri 2022 Kalash Sthapana Muhurat, Vidhi: आज घटस्थापना के लिए कब है शुभ मुहूर्त, जानें सही विधि और समय

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Apr 2, 2022, 12:46 PM IST

Navaratri 2022 Kalash Sthapana Date, Puja Vidhi, Muhurat, Timings: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व आज यानी 2 अप्रैल से प्रारंभ हो रहा है। नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में घट स्थापित किया जाता है। अगर आप भी नवरात्रि पर घट स्थापना करने वाले हैं तो यहां जानें विधि और शुभ मुहूर्त।

Navaratri 2022 Kalash Sthapana Muhurat, Vidhi: आज घटस्थापना के लिए कब है शुभ मुहूर्त, जानें सही विधि और समय

Navaratri 2022 Kalash Sthapana Date, Puja Vidhi, Muhurat, Timings: देवी शक्ति को समर्पित चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व इस वर्ष 2 अप्रैल से प्रारंभ हो रहा है। नवरात्रि का पर्व भारत में श्रद्धा भाव और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। प्रतिपदा तिथि से लेकर नवरात्रि तक लोग मां दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों की पूजा विधि अनुसार करते हैं। जो भक्त नवरात्रि का व्रत रखता है वह घटस्थापना जरूर करता है। नवरात्रि का व्रत प्रारंभ करने से पहले घटस्थापना की विधि की जाती है। मान्यताओं के अनुसार, देवी दुर्गा की आराधना करने से भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 02 अप्रैल से प्रारंभ होकर 10 अप्रैल को समाप्त हो जाएगी। अगर आप भी नवरात्रि का व्रत कर रहे हैं तो यहां जानें घटस्थापना किस मुहूर्त में करना चाहिए और कैसे करना चाहिए। 

घटस्थापना का मुहूर्त (Chaitra Navratri 2022 Ghatsthapna Muhurat) 

चैत्र नवरात्रि इस वर्ष 2 अप्रैल से प्रारंभ हो रही है। ऐसे में घट स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त 2 अप्रैल को सुबह 6:10 से लेकर 8: 31 तक रहेगा। इसके साथ कलश स्थापना के लिए दोपहर में 12:00 से 12:50 तक भी शुभ मुहूर्त रहने वाला है। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विधान होता है। इस दिन मां दुर्गा के साथ उनके पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा भी की जाती है। 

यहां जानें घटस्थापना की विधि (Chaitra Navratri 2022 Ghatsthapna Puja Vidhi) 

हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, घटस्थापना हमेशा घर के पूर्व या उत्तर दिशा में करना चाहिए। घट स्थापित करने से पहले इस जगह को साफ कर लें उसके बाद गंगाजल से पवित्र करें। अब इस जगह पर मिट्टी बिछा दें और फिर उसमें जौ डाल दें। इसके बाद थोड़ा सा पानी छिड़क कर ऊपर कलश रख दें। कलश में गंगा, कावेरी, यमुना आदि पवित्र नदियों का जल भरें और उसमें एक सिक्का डाल दें। मन में वरुण देव का ध्यान करते हुए कलश के मुख पर रक्षा सूत्र या कलावा बांधे। उसके बाद कलश के मुख को मिट्टी की एक कटोरी से ढक दें। अब इस कटोरी को जौ से भरें। इसके पश्चात एक नारियल पर कलावा बांधे फिर इसे उस कटोरी पर स्थापित करें और अंत में कलश का पूजन करें। 

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