How To Wear Rudraksha: हिंदू धर्म में रुद्राक्ष का विशेष महत्व है। रुद्राक्ष भगवान शिव को अति प्रिय है। रुद्राक्ष को भगवान शिव का ही अंश माना जाता है। हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि रुद्राक्ष का निर्माण भगवान शिव के आंसुओं से हुआ है। भगवान भोलेनाथ रुद्राक्ष को हाथ या गले में धारण करते हैं। हिंदू धर्म में आमतौर पर हर किसी के घर में रुद्राक्ष जरूर मिल जाएगा। कुछ लोग रुद्राक्ष को लेकर जाप करते हैं तो कुछ लोग रुद्राक्ष की माला को गले में धारण करते हैं। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति रुद्राक्ष धारण करता है उस पर भगवान शिव की विशेष कृपा रहती है। रुद्राक्ष सभी संकटों से बचाता है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा बनाता है। रुद्राक्ष एक मुखी से लेकर 21 मुखी तक पाए जाते हैं। इन सब का अपना अलग-अलग महत्व होता है। रुद्राक्ष पहनना शुभ तभी माना जाता है जब इसे पूरे विधि-विधान और नियम के अनुसार पहना जाए। रुद्राक्ष को पहनते समय कुछ नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है अन्यथा यह अशुभ माना जाता है और इसका असर भी व्यक्ति पर विपरीत पड़ता है। आइए जानते हैं रुद्राक्ष पहनने के नियम व फायदे नुकसान के बारे में...
नहीं करना चाहिए शराब, मांस- मछली का सेवन
रुद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति को कभी भी शराब, मांस- मछली का सेवन भूल से भी नहीं करना चाहिए। इससे रुद्राक्ष अपवित्र वह अशुभ हो जाता है और इसका असर भी हमारे जीवन में विपरीत पड़ता है। ऐसा करने से व्यक्ति अस्वस्थ व कई बीमारियों से घिर जाता है।
सोते समय नहीं पहनना चाहिए रुद्राक्ष
रुद्राक्ष पहन कर कभी सोना भी नहीं चाहिए। जब आप सोने के लिए जाते हैं तो रुद्राक्ष को उतार कर इसे तकिए के नीचे या मंदिर वाली जगह पर रख दें। तकिए के नीचे रुद्राक्ष रखने से बुरे सपने व नींद टूटने की समस्या से छुटकारा मिलता है।
इन जगहों पर पहन कर न जाएं
किसी शव यात्रा या बच्चे के जन्म के बाद वाली जगह में रुद्राक्ष पहन कर नहीं जाना चाहिए। ऐसा करना अशुभ माना जाता है और रुद्राक्ष अपवित्र हो जाता है।
बिना स्नान किए न पहने रुद्राक्ष
रुद्राक्ष को कभी भी बिना स्नान किए नहीं पहनना चाहिए। स्नान करने के बाद ही शुद्ध करके गंगाजल छिड़क कर इसे धारण करना चाहिए। इसे धारण करते वक्त रुद्राक्ष मंत्र और रुद्राक्ष का मूल मंत्र का 9 या 11 बार जाप जरूर करना चाहिए। फिर इसमें गंगाजल छिड़कर पहनें।
(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)

