Chanakya Niti: मनुष्‍य की ये तीन आदतें कर देती हैं सर्वनाश, धनवान भी कुछ दिन में हो जाता है कंगाल

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Aug 18, 2022, 01:19 PM IST

Chanakya Niti in Hindi: आचार्य चाणक्‍य ने मनुष्‍य के लिए धन को सबसे जरूरी बताया है। वे कहते हैं कि जो लोग सही रास्‍ते पर चलकर धन कमाते हैं और उसका सम्‍मान करते हैं उनके घर लक्ष्‍मी जी वास करती हैं, वहीं जो लोग गलत आदतों के वश में चले जाते हैं उनसे लक्ष्‍मी जी भी दूर चली जाती हैं।

Chanakya Niti: मनुष्‍य की ये तीन आदतें कर देती हैं सर्वनाश, धनवान भी कुछ दिन में हो जाता है कंगाल
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Chanakya Niti in Hindi: चाणक्य नीति में मनुष्‍य के लिए धर्म को सबसे बड़ा बताया गया है, लेकिन जीवन को सुगम बनाने के लिए धन को सबसे जरूरी। आचार्य चाणक्‍य कहते हैं कि अच्छा व बेहतर जीवन जीने के लिए धन बहुत आवश्यक है। जिसके घर में मां लक्ष्मी वास करती हैं वो हर मुश्किलों का सामना कर सकता है। हालांकि धन के साथ सुख-समृद्धि हासिल करने के लिए धन की देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करना जरूरी है। आचार्य कहते हैं कि मनुष्‍य के कुछ ऐसे अवगुण हैं, जिससे लक्ष्‍मी जी रूष्‍ठ हो जाती हैं। जिस व्‍यक्ति के अंदर ये अवगुण होता है, उसके घर ये कभी वास नहीं करती। आचार्य ने मनुष्‍य के तीन ऐसे ही अवगुण व आदत बताते हुए कहा कि जिसके अंदर यह आ जाता है वह चाहे कितना ही धनवान क्‍यों न हो, जल्‍द ही कंगाल बन जाता है।

घमंड

आचार्य चाणक्‍य कहते हैं कि हर व्‍यक्ति धन अर्जित करने के लिए जीतोड़ मेहनत करता है। इस दौरान उसे कई तरह के बुरे दिन भी देखने पड़ते हैं, लेकिन जब लोगों के पास पैसा आ जाता है तो वो अपने बुरे दिन भूल जाते हैं और उनके स्‍वभाव में बदलाव आने लगता है। कुछ लोगों में पैसे का घमंड भी आ जाता है। पैसों का घमंड न सिर्फ मां लक्ष्मी को नाराज करता है बल्कि अच्छे रिश्तों में भी दरार ला देता है। ऐसा करने पर मेहनत से कमाया हुआ धन भी नष्ट हो जाता है।

बेफिजूल खर्च

आचार्य चाणक्य ने धनवान से कंगाल बनने का एक कारण बेफिजूल खर्च को भी बताया है। आचार्य कहते हैं जो लोग इस तरह खर्च करते हैं वे धन का अपमान करते हैं। ऐसे लोगों के घर पर मां लक्ष्मी ज्‍यादा दिनों तक वास नहीं करती। धन कमाया तो खर्च जरूर होगा, लेकिन उसे उतना ही किया जाना चाहिए, जितना जरूरी हो। माना जाता है कि जो लोग पैसों की कद्र नहीं करते उन पर लक्ष्‍मी की कृपा नहीं होती है।

लालच

आचार्य चाणक्‍य कहते हैं कि लालच मनुष्‍य का सबसे बड़ा अवगुण है। यह आदत जिसको लग जाती है उसका सर्वनाश कर देती है। जो लोग लालच के वश में आकर दूसरे की मेहनत की कमाई को अपना बनाने की कोशिश करते हैं, उनका लक्ष्‍मी जी सबकुछ छीन लेती हैं। ऐसे लोगों के पास गलत तरीके से कमाया गया पैसा ज्‍यादा दिन तक नहीं टिकता है। ऐसे लोग लालच में पड़कर अपने परिवार को भी कई तरह के मुश्किल में डाल देते हैं।

(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)

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