सुर सम्राट बना सकते हैं कुंडली में मौजूद ये योग, अरिजीत सिंह को इन ग्रहों ने बनाया 'आवाज का बादशाह'
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Jan 28, 2026, 03:49 PM IST
Arijit Singh Retirement Astrology : बॉलीवुड के लोकप्रिय प्लेबैक सिंगर अरिजीत सिंह ने फिल्मी गानों से संन्यास लेने का फैसला किया है। उनके फैंस को उनका यह फैसला एक सदमे की तरह लगा है, क्योंकि उनका यह फैसला अचानक से आया है। अरिजीत सिंह एक सफल गायक हैं, जिन्होंने बुलंदियों के उस मुकाम को छुआ, जहां पर जाना हर सिंगर का सपना होता है। अरिजीत को बुलंदियों तक पहुंचाने में उनकी मेहनत के साथ ही कुछ ग्रहों का बड़ा योगदान रहा है। माना जाता है कि ग्रहों के ये योग जिस व्यक्ति की कुंडली में होते हैं, वो जीवन में एक बड़ा सिंगर बनता है। आइए जानते हैं कि वे योग कौन से हैं?
कौन से योग बनाते हैं सिंगर?
Arijit Singh Retirement Astrology : बॉलीवुड के सबसे लोकप्रिय प्लेबैक सिंगर्स में से एक अरिजीत सिंह ने हाल ही में एक चौंकाने वाला ऐलान किया है। 38 वर्ष की उम्र में उन्होंने फिल्मी गानों से संन्यास लेने की घोषणा की है, हालांकि वे अपने पेंडिंग कमिटमेंट्स को पूरा करेंगे और 2026 तक कुछ गाने रिलीज हो सकते हैं। यह फैसला उनके प्रशंसकों के लिए सदमे जैसा है, क्योंकि अरिजीत भारत के सबसे ज्यादा स्ट्रीम्ड आर्टिस्ट हैं और उनकी आवाज ने 'तुम ही हो', 'चन्ना मेरेया' जैसे हिट्स से लाखों दिल जीते हैं, लेकिन क्या यह फैसला अचानक आया या इसके पीछे कोई गहरा कारण है? ज्योतिष शास्त्र में उनकी कुंडली को देखें तो यह सब कुछ पहले से ही संकेतित लगता है।
क्या कहती है अरिजीत सिंह की कुंडली
पब्लिक डोमेन से मिली जानकारी के अनुसार अरिजीत सिंह का जन्म 25 अप्रैल 1987 को मुरशिदाबाद, पश्चिम बंगाल में हुआ था। उनकी कुंडली कर्क लग्न की है, जो भावुकता और रचनात्मकता का प्रतीक है। प्रमुख ग्रह स्थिति इस प्रकार है।
अरिजीत सिंह का बर्थचार्ट
लग्न: कर्क राशि (भावुक और कल्पनाशील व्यक्तित्व)।
- 9वां भाव (भाग्य स्थान): मीन राशि में शुक्र, गुरु, चंद्रमा, राहु और बुध का पंचग्रही योग – यह रचनात्मकता, संगीत और अप्रत्याशित सफलता का केंद्र है।
- 10वां भाव (कर्म स्थान): मेष राशि में सूर्य (उच्च का) – नेतृत्व और प्रसिद्धि देता है।
- 5वां भाव: वृश्चिक राशि में शनि – रचनात्मक क्षेत्र में मेहनत और देरी देता है।
- तीसरा भाव: कन्या राशि में केतु – संचार और साहस में अनोखापन देता है।
- 11वां भाव: वृषभ राशि में मंगल – लाभ और ऊर्जा देता है।
क्यों बने इतने बड़े सिंगर?
अरिजीत सिंह की सफलता कोई संयोग नहीं, बल्कि उनकी कुंडली में मौजूद मजबूत योगों का परिणाम है। वे 2011 में 'मर्डर 2' से डेब्यू करने के बाद तेजी से स्टार बने, और आज वे बॉलीवुड के टॉप सिंगर्स में शुमार हैं। आइए जानते हैं कि इसके पीछे क्या कारण रहा है।
शुक्र, चंद्रमा और बुध का मजबूत प्रभाव: संगीत का मुख्य कारक शुक्र (वीनस) है, जो उनकी कुंडली में 9वें भाव में मीन राशि में है। शुक्र संगीत, कला और मधुर आवाज का प्रतिनिधित्व करता है। इसके साथ चंद्रमा जो भावनाओं का ग्रह है और बुध जो लिरिक्स और वॉइस फ्लेक्सिबिलिटी का ग्रह है, इन तीनों की युति ने उन्हें इमोशनल और मेलोडियस गाने गाने की क्षमता दी। यह योग 'गजकेसरी' जैसा ही होता है, जो गुरु (बृहस्पति) की मौजूदगी से और मजबूत होता है। परिणामस्वरूप, अरिजीत की आवाज में वह गहराई है जो 'आशिकी 2' जैसे एल्बम्स को हिट बनाती है।
राहु का अप्रत्याशित योगदान: 9वें भाव में राहु की उपस्थिति ने उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में अप्रत्याशित ब्रेक दिया। राहु आधुनिकता, विदेशी प्रभाव और सोशल मीडिया फेम का कारक है। अरिजीत की सफलता रियलिटी शो 'फेम गुरुकुल' से शुरू हुई, जो राहु के प्रभाव से मैच करती है। अपारंपरिक रास्ते से स्टारडम मिला। यह ग्रह उन्हें बॉलीवुड के 'किंग ऑफ प्लेबैक' बनाता है, जहां उन्होंने हजारों गाने गाए और स्पॉटिफाई पर टॉप स्ट्रीम्ड आर्टिस्ट बने।
सूर्य का उच्च प्रभाव: 10वें भाव में मेष राशि में उच्च का सूर्य ने उन्हें करियर में राजसी प्रसिद्धि दी। सूर्य नेतृत्व और स्पॉटलाइट का ग्रह है, जो उन्हें अवॉर्ड्स और रिकॉर्ड ब्रेकिंग हिट्स दिलाता है। कर्क लग्न के साथ यह योग उन्हें परिवार-उन्मुख लेकिन महत्वाकांक्षी बनाता है।
मंगल और गुरु का सपोर्ट: 11वें भाव में मंगल ने आर्थिक लाभ दिया, जबकि गुरु ने ज्ञान और मेंटरशिप प्रदान की। शनि के 5वें भाव में होने से शुरुआती स्ट्रगल (जैसे रियलिटी शोज में फेलियर) हुआ, लेकिन मेहनत से सफलता मिली। कुल मिलाकर, यह कुंडली एक क्रिएटिव जीनियस की है, जो संगीत की दुनिया में क्रांति ला सकती है।
38 साल की उम्र में संन्यास क्यों?
अरिजीत ने सोशल मीडिया पर ऐलान किया कि वे नए फिल्म असाइनमेंट्स नहीं लेंगे, बल्कि पर्सनल ग्रोथ और इंडिपेंडेंट म्यूजिक पर फोकस करेंगे। उन्होंने कहा कि यह एक लंबी जर्नी का अंत है, लेकिन म्यूजिक बनाते रहेंगे। ज्योतिष में यह फैसला उनकी कुंडली के कुछ चुनौतीपूर्ण योगों से जुड़ा लगता है।
शनि का प्रभाव और दशा परिवर्तन: 5वें भाव में वृश्चिक राशि में शनि क्रिएटिविटी में देरी और सैचुरेशन लाता है। शनि मेहनत से सफलता देता है, लेकिन लंबे समय बाद थकान या नई दिशा की इच्छा जगाता है। शनि अभी मीन राशि में हैं, उनके 9वें भाव को प्रभावित कर रहे हैं, जो भाग्य और दर्शन में बदलाव लाता है। शनि उन्हें इंडिपेंडेंट क्रिएशन की ओर धकेल रहा है, जहां प्लेबैक की कमर्शियल प्रेशर से मुक्ति मिले।
राहु-केतु अक्ष का प्रभाव: राहु 9वें में और केतु तीसरे में होने से जीवन में अप्रत्याशित टर्न्स आते हैं। राहु ने उन्हें फेम दिया, लेकिन अब इसका नेगेटिव साइड (मानसिक तनाव, भ्रम) उभर सकता है। चंद्रमा राहु के साथ होने से भावनात्मक अस्थिरता, जो संन्यास जैसा बड़ा फैसला लेने का कारण बनती है। ज्योतिष में राहु की दशा समाप्ति पर व्यक्ति नई राह चुनता है ।
चंद्रमा का भावुक पक्ष: कर्क लग्न का लग्नेश चंद्रमा 9वें में है, जो आध्यात्मिक खोज को बढ़ावा देता है। 38 वर्ष की उम्र में व्यक्ति परिवार, पर्सनल ग्रोथ पर फोकस करता है। अरिजीत का फैसला 'क्रिएटिव एक्सप्लोरेशन' पर है, जो गुरु के प्रभाव से मेल खाता है।
समय का चक्र: ज्योतिष में 35-40 वर्ष की उम्र 'मिडलाइफ ट्रांजिशन' का समय होता है, जहां शनि और राहु मिलकर बदलाव लाते हैं। प्लेबैक सिंगर्स को रॉयल्टी इश्यूज का सामना करना पड़ता है, जो मंगल (11वें में) के नेगेटिव प्रभाव से जुड़ा हो सकता है।
कुंडली में कौन-कौन से योग और ग्रह स्थिति व्यक्ति को बड़ा सिंगर बनाते हैं?
वैदिक ज्योतिष में संगीत, खासकर प्लेबैक सिंगिंग या बड़ा सिंगर बनने के लिए कुछ विशिष्ट योग, ग्रह स्थिति और भाव महत्वपूर्ण होते हैं। ये योग व्यक्ति को मधुर आवाज, रचनात्मकता, फेम और करियर में सफलता प्रदान करते हैं। हालांकि, ये सिर्फ संभावनाएं हैं। सफलता मेहनत, दशा और पर्यावरण पर भी निर्भर करती है।
मुख्य ग्रहों का प्रभाव
शुक्र (Venus): यह संगीत का मुख्य कारक है। यह मधुरता, कला और आकर्षण देता है। बड़ा सिंगर बनने के लिए शुक्र मजबूत (उच्च, स्वराशि या बेनिफिक्स के साथ) होना चाहिए। स्थिति की बात करें तो यह 2nd (वॉइस), 3rd (कम्युनिकेशन), 5th (क्रिएटिविटी) या 10th (करियर) भाव में अच्छा होता है। जैसे शुक्र अगर वृषभ या तुला में हो, तो स्वीट वॉइस मिलती है।
चंद्रमा (Moon): भावनाओं और मेलोडी का ग्रह है।इमोशनल गाने गाने की क्षमता देता है। मजबूत चंद्रमा (कर्क में या गुरु के साथ) रोमांटिक/सॉफ्ट सिंगिंग के लिए जरूरी होता है। राहु या शनि के साथ होने पर दर्द भरे गाने में माहिर बनाता है।
बुध (Mercury): वॉइस फ्लेक्सिबिलिटी, लिरिक्स और रिदम का कारक है। बुध मजबूत हो तो हाई-लो नोट्स आसानी से संभालते हैं। मिथुन या कन्या में अच्छा माना जाता है।
राहु (Rahu): अप्रत्याशित फेम और मॉडर्न म्यूजिक (जैसे बॉलीवुड/पॉप) का ग्रह। 5th, 9th या 10th में राहु ब्रेकथ्रू देता है, लेकिन अस्थिरता भी देता है।
गुरु (Jupiter): ज्ञान और मेंटरशिप का कारक है। गुरु मजबूत हो तो क्लासिकल या स्पिरिचुअल टच वाली सिंगिंग में सफलता मिलती है।
नेगेटिव ग्रह: शनि अगर 5th में हो तो स्ट्रगल देता है, लेकिन मेहनत से बड़ा नाम भी मिलता है।
ये हैं महत्वपूर्ण भाव
2nd House (वॉइस और स्पीच): मजबूत 2nd लॉर्ड (जैसे सूर्य या शुक्र) मधुर आवाज देता है। अगर शुक्र या बुध यहां हो, तो सिंगिंग टैलेंट होता है।
3rd House (कम्युनिकेशन और परफॉर्मेंस): बुध या मंगल यहां स्टेज प्रेजेंस देता है। केतु यहां अनोखी वॉइस दे सकता है।
5th House (क्रिएटिविटी और एंटरटेनमेंट): प्लेबैक सिंगिंग के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। शुक्र, चंद्रमा या गुरु यहां हो तो फिल्म इंडस्ट्री में सफलता देता है। शनि यहां देरी लेकिन लंबी सफलता देता है।
9th House (भाग्य और उच्च शिक्षा): राहु या गुरु यहां अप्रत्याशित फेम लाता है। अरिजीत की तरह पंचग्रही योग यहां मजबूत होता है।
10th House (करियर): सूर्य या शुक्र यहां उच्च का हो तो बड़ा नाम और अवॉर्ड्स मिलता है।
ये विशेष योग भी बना सकते हैं अच्छा गायक
शुक्र-बुध योग (Venus-Mercury Conjunction): वॉइस में मधुरता और फ्लेक्सिबिलिटी आती है। अगर 2nd या 5th में हो, तो प्रोफेशनल सिंगर बनाती है।
चंद्रमा-शुक्र योग (Moon-Venus): इमोशनल और रोमांटिक सिंगिंग में महारथ मिलती है। 'गजकेसरी योग' (चंद्रमा-गुरु) अगर हो तो स्पिरिचुअल/क्लासिकल में बड़ा नाम बनता है।
राहु-शुक्र योग (Rahu-Venus): बॉलीवुड/मॉडर्न म्यूजिक में ब्रेक मिलता है। अपारंपरिक रास्ते से फेम, जैसे रियलिटी शोज आदि से मिलता है।
संगीत योग: अगर लग्नेश (Ascendant Lord) 5th या 10th से जुड़ा हो, और शुक्र मजबूत हो तो संगीत करियर बनता है।
राजयोग या धनयोग: सूर्य-गुरु या शुक्र-गुरु की युति फेम और धन लाती है। जैसे लता मंगेशकर की कुंडली में मजबूत शुक्र और 5th हाउस था।
केतु का प्रभाव: 3rd या 5th में केतु अनोखी या सोलफुल वॉइस देता है, लेकिन स्टेज फियर भी देती है।
दशा का महत्व: शुक्र, चंद्रमा या राहु की महादशा (20-30 साल की उम्र में) सफलता लाती है। शनि की दशा में रिटायरमेंट जैसा परिवर्तन देता है।
बड़ा सिंगर बनने के लिए लग्न जल तत्व कर्क, वृश्चिक, मीन राशि का होना फायदेमंद, क्योंकि यह भावुकता देता है। लेकिन कोई भी योग अकेला काम नहीं करता है, इसके लिए पूर्ण कुंडली देखनी पड़ती है। अरिजीत की कुंडली में शुक्र-चंद्रमा-राहु का क्लस्टर उन्हें बड़ा बनाता है, लेकिन अब शनि-राहु का प्रभाव रिटायरमेंट ला रहा है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।