Chanakya Niti in Hindi: आचार्य चाणक्य की नीतियां जिस तरह से सदियों पहले लोगों को रास्ता दिखाती थी, उसी तरह आज भी लोगों को सही तरीके से जीने का सलीका सिखा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण, आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में बताई गई जीवन की सच्चाई और समस्याओं के समाधान का व्यवहारिक उपाय है। आचार्य ने मनुष्य जीवन के लिए जरूरी पैसे, बिजनेस, सेहत, दांपत्य जीवन और करियर में सफलता पाने के उपायों को विस्तार से बताया है। आचार्य की नीतियां लोगों को हमेशा मुसीबत का सामने कर उससे बाहर निकलने का रास्ता दिखाती है। आचार्य कहते हैं कि, मनुष्य को अगर कुछ खास लोगों का समर्थन मिल जाए तो वह बड़ी से बड़ी मुसीबत से भी आसानी से बाहर निकल सकता है। चाणक्य ने अपने इन उपायों को श्लोक के सूत्र में पिरोया है।
श्लोक
संसारातपदग्धानां त्रयो विश्रान्तिहेतवः।
अपत्यं च कलत्रं च सतां संगतिरेव च॥
पुत्र का समर्थन
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि हर पिता के लिए उसके बेटे का समर्थन उसकी सबसे बड़ी ताकत होती है। जिस माता-पिता के पास उसका ध्यान रखने और सभी जरूरतों को पूरा करने वाला पुत्र होता है। वह व्यक्ति हर मुश्किल का सामना आसानी से कर लेता है। ऐसा पुत्र अपनी माता-पिता की सेवा करने के साथ अपने कुल और परिवार का नाम भी रोशन करता है। इसलिए आचार्य कहते हैं कि, जिस व्यक्ति के पास ऐसा पुत्र होता है, उसका जीवन सुख के साथ बीतता, उसे किसी तरह की परेशानी नहीं होती है।
पत्नी का साथ
आचार्य चाणक्य कहते है कि हर व्यक्ति के पास उसकी पत्नी का साथ मिलना बहुत जरूरी होता है। जिस व्यक्ति के पास साथ निभाने वाली पत्नी होती है, उसे मुश्किल परिस्थिति में दूसरों के सामने मदद के लिए हाथ नहीं फैलाना पड़ता है। ऐसे लोग अपनी पत्नी के साथ मिलकर हर विपरित परिस्थिति को आसानी से पार कर लेते हैं। ऐसे लोगों का जीपन जीवन सुख व आराम के साथ बीतता है। ऐसी पत्नी अपने पति के साथ पूरा जीवन एक ढाल की तरह खड़ी रहती हैं।
सही दोस्तों की संगति
आचार्य चाणक्य व्यक्ति के रूप में दोस्त का जिक्र करते हुए कहते हैं कि, किसी भी व्यक्ति की सफलता और असफलता में उसकी संगत का बड़ा प्रभाव रहता है। अगर व्यक्ति की संगत सही लोगों के साथ है, तो वे मुश्किल समय में पूरा साथ निभाते हैं और सही रास्ता दिखाने की कोशिश करते हैं। यदि दोस्त दुराचारी, दुष्ट स्वभाव या फिर दूसरों को हानि पहुंचाने वाला है तो वह अपने साथ अपने दोस्तों को भी मुश्किल में डाल सकता है।
(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
