Aashadh Saptami 2026: हिंदू पंचांग में हर तिथि का अपना महत्व है, लेकिन कुछ तिथियां ऐसी होती हैं जिनका संबंध सीधे किसी देवी-देवता की पूजा से माना जाता है। सप्तमी ऐसी ही तिथि है, जिसे भगवान सूर्य की आराधना के लिए सबसे शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव को अर्घ्य देने और उनकी पूजा करने से जीवन में ऊर्जा, आरोग्य और सकारात्मकता का आशीर्वाद मिलता है। अगर आप भी 2026 में आषाढ़ माह की सप्तमी की सही तारीख और इसका महत्व जानना चाहते हैं, तो यहां पूरी जानकारी पढ़िए।
आषाढ़ में दो बार आएगी सप्तमी
आषाढ़ महीने में सप्तमी तिथि दो बार पड़ती है। एक बार कृष्ण पक्ष में और दूसरी बार शुक्ल पक्ष में। दोनों का अपना अलग पंचांग समय है, इसलिए पूजा या व्रत करने से पहले सही उदया तिथि जान लेना जरूरी होता है।
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आषाढ़ कृष्ण सप्तमी 2026 कब है
आषाढ़ कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि 6 जुलाई 2026 को दोपहर 1:47 बजे तक रहेगी। इसके बाद सप्तमी शुरू हो जाएगी। लेकिन उदया तिथि के अनुसार, आषाढ़ कृष्ण सप्तमी मंगलवार, 7 जुलाई 2026 को मानी जाएगी। यह तिथि दोपहर 1:24 बजे तक रहेगी, इसके बाद अष्टमी लग जाएगी।
आषाढ़ कृष्ण सप्तमी 2026 शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:08 बजे से 4:48 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:58 बजे से दोपहर 12:53 बजे तक
आषाढ़ शुक्ल सप्तमी 2026 कब है
आषाढ़ शुक्ल पक्ष की सप्तमी सोमवार, 20 जुलाई 2026 को पड़ेगी। यह तिथि 20 जुलाई को सुबह 3:29 बजे शुरू होगी और 21 जुलाई को सुबह 4:02 बजे तक रहेगी। यानी उदया तिथि के अनुसार पूजा और व्रत 20 जुलाई को ही किए जाएंगे।
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आषाढ़ शुक्ल सप्तमी 2026 शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:13 बजे से 4:54 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक
सप्तमी पर भगवान सूर्य की पूजा क्यों होती है
अगर गौर करें तो सप्ताह का एक दिन भी सूर्य देव के नाम पर है और तिथियों में सप्तमी भी उनकी पूजा के लिए सबसे खास मानी गई है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव की आराधना करने से व्यक्ति को केवल शारीरिक ऊर्जा ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, तेज और सफलता का भी आशीर्वाद मिलता है।
यही वजह है कि कई लोग इस दिन सूर्योदय के समय तांबे के लोटे से जल अर्पित करते हैं, सूर्य मंत्रों का जाप करते हैं और अपनी क्षमता के अनुसार दान भी करते हैं।
सप्तमी के दिन क्या कर सकते हैं
अगर आप इस दिन पूजा करना चाहते हैं, तो सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और उगते सूर्य को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें। जल में लाल फूल, अक्षत या रोली डाल सकते हैं। इसके बाद 'ॐ घृणिः सूर्याय नमः' मंत्र का जाप करें। अपनी श्रद्धा के अनुसार गेहूं, गुड़, तांबे के बर्तन या लाल वस्त्र का दान करना भी शुभ माना जाता है।
