03 November 2025 Ka Panchang: 03 नवंबर 2025, सोमवार का दिन, हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि से शुरू होगा, जो 04 नवंबर सुबह 2 बजकर 5 मिनट तक रहेगी, इसके बाद चतुर्दशी तिथि शुरू होगी। यह दिन प्रदोष व्रत और आध्यात्मिक कार्यों के लिए विशेष है।
आज प्रदोष का पूजन किस समय पर किया जा सकता है, यह आप पंचांग से जान सकते हैं। आज नक्षत्र उत्तर भाद्रपद दोपहर 3 बजकर 5 मिनट तक रहेगा, फिर रेवती नक्षत्र प्रभावी होगा। योग में हर्षण शाम 7 बजकर 40 मिनट तक रहेगा, इसके बाद वज्र योग शुरू होगा। करण में कौलव दोपहर 3 बजकर 40 मिनट तक, फिर तैतिल 04 नवंबर सुबह 2 बजकर 5 मिनट तक, इसके बाद गर करण रहेगा। पंचांग के माध्यम से आप दिन के शुभ और अशुभ काल का पता लगा सकते हैं।
सूर्योदय और चंद्रोदय का समय
सूर्य आज सुबह 6:34 बजे उदय होगा और शाम 5:34 बजे अस्त होगा। चंद्रमा दोपहर 3:54 बजे उदय होगा और 04 नवंबर सुबह 4:57 बजे अस्त होगा। दिन की अवधि 10 घंटे 59 मिनट 54 सेकंड रहेगी, जबकि रात की अवधि 13 घंटे 00 मिनट 49 सेकंड होगी। मध्याह्न दोपहर 12:04 बजे होगा।
तिथि, नक्षत्र, योग और करण
आज की तिथि शुक्ल त्रयोदशी 04 नवंबर सुबह 2:05 बजे तक रहेगी, इसके बाद शुक्ल चतुर्दशी शुरू होगी। नक्षत्र उत्तर भाद्रपद दोपहर 3:05 बजे तक रहेगा, फिर रेवती नक्षत्र प्रभावी होगा। उत्तर भाद्रपद का तीसरा पाद सुबह 9:38 बजे तक, चौथा पाद दोपहर 3:05 बजे तक, रेवती का पहला पाद शाम 8:30 बजे तक और दूसरा पाद 04 नवंबर सुबह 1:53 बजे तक रहेगा। योग में हर्षण शाम 7:40 बजे तक रहेगा, फिर वज्र योग शुरू होगा। करण में कौलव दोपहर 3:40 बजे तक, तैतिल 04 नवंबर सुबह 2:05 बजे तक और इसके बाद गर करण दिन की समाप्ति तक रहेगा।
चंद्र मास, संवत और बृहस्पति संवत्सर
विक्रम संवत 2082 कालयुक्त, शक संवत 1947 विश्वावसु और गुजराती संवत 2082 पिंगल है। बृहस्पति संवत्सर कालयुक्त 25 अप्रैल 2025 को दोपहर 3:07 बजे तक रहेगा, फिर सिद्धार्थी शुरू होगा। चंद्र मास कार्तिक है, जो पूर्णिमांत और अमांत दोनों में गणना होता है। प्रविष्टे/गते 18 है।
राशि और नक्षत्र
चंद्र राशि मीन में पूरे दिन रहेगी। सूर्य राशि तुला में है और सूर्य स्वाती नक्षत्र के तीसरे पाद में सुबह 7:08 बजे तक, फिर चौथा पाद रहेगा। उत्तर भाद्रपद और रेवती नक्षत्र सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक कार्यों में सफलता देंगे।
ऋतु और अयन
ऋतु शरद (वैदिक) और हेमंत (द्रिक) है। अयन दक्षिणायन है। मौसम ठंडा रहेगा, रात में ठंडक बढ़ सकती है।
03 नवंबर का शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:51 बजे से 5:43 बजे तक, ध्यान और पूजा के लिए उत्तम।
प्रातः संध्या: सुबह 5:17 बजे से 6:34 बजे तक, स्पिरिचुअल कार्यों के लिए शुभ।
अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक, महत्वपूर्ण कार्यों के लिए फेवरेबल।
विजय मुहूर्त: दोपहर 1:54 बजे से 2:38 बजे तक, नए काम शुरू करने के लिए अच्छा।
गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:34 बजे से 6:00 बजे तक, पूजा और फैमिली टाइम के लिए शुभ।
सायाह्न संध्या: शाम 5:34 बजे से 6:52 बजे तक, भक्ति कार्यों के लिए बेस्ट।
अमृत काल: सुबह 10:41 बजे से दोपहर 12:09 बजे तक, शुभ कार्यों के लिए अनुकूल।
निशिता मुहूर्त: रात 11:39 बजे से 12:31 बजे, 04 नवंबर तक, रात के पूजा के लिए अच्छा।
रवि योग: दोपहर 3:05 बजे से सुबह 6:35 बजे, 04 नवंबर तक, सूर्य से जुड़े कामों के लिए शुभ।
03 नवंबर का अशुभ समय
राहुकाल: सुबह 7:57 बजे से 9:19 बजे तक, बड़े फैसले या नए काम शुरू करने से बचें।
यमगण्ड: सुबह 10:42 बजे से दोपहर 12:04 बजे तक, जोखिम भरे कामों से बचें।
गुलिक काल: दोपहर 1:27 बजे से 2:49 बजे तक, सावधानी बरतें।
आडल योग: दोपहर 3:05 बजे से सुबह 6:35 बजे, 04 नवंबर तक, अशुभ माना जाता है।
विडाल योग: सुबह 6:34 बजे से दोपहर 3:05 बजे तक, सावधानी रखें।
दुर्मुहूर्त: दोपहर 12:26 बजे से 1:10 बजे तक और 2:38 बजे से 3:22 बजे तक, काम शुरू करने से बचें।
वर्ज्य: 04 नवंबर सुबह 1:50 बजे से 3:16 बजे तक।
गण्ड मूल: दोपहर 3:05 बजे से सुबह 6:35 बजे, 04 नवंबर तक।
पञ्चक: पूरे दिन।
बाण: रोग दोपहर 3:08 बजे से पूर्ण रात्रि तक।
आनंदादि और तमिल योग
आनंदादि योग में गद दोपहर 3:05 बजे तक रहेगा (अशुभ), फिर मातंग (शुभ) शुरू होगा। तमिल योग में मरण दोपहर 3:05 बजे तक रहेगा (अशुभ), फिर अमृत (शुभ) शुरू होगा। जीवनम में पूर्ण जीवन और नेत्रम में दो नेत्र रहेगा।
निवास और शूल
होमाहुति शनि दोपहर 3:05 बजे तक, फिर चंद्र को दी जाएगी। दिशा शूल पूर्व दिशा में है, इस दिशा में यात्रा से बचें। चंद्र वास उत्तर में। अग्निवास 04 नवंबर सुबह 2:05 बजे तक पृथ्वी, फिर आकाश पर। राहु वास उत्तर-पश्चिम में रहेगा। शिववास 04 नवंबर सुबह 2:05 बजे तक नंदी पर, फिर भोजन में। कुंभ चक्र पश्चिम में है, जो शुभ है।
