आज का पंचांग (3 December 2025): आज मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी दोपहर 12 बजकर 25 मिनट तक रहेगी, फिर चतुर्दशी लग जाएगी। नक्षत्र भरणी शाम 5 बजकर 59 मिनट तक रहेगा, फिर कृत्तिका नक्षत्र प्रारंभ हो जाएगा। चंद्रमा मेष राशि में रात 11 बजकर 14 मिनट तक रहेगा, उसके बाद वृषभ राशि में प्रवेश करेगा। योग परिघ शाम 4 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। आज प्रदोष व्रत है – शाम को शिवजी की विशेष पूजा करें।
सूर्योदय और चंद्रोदय का समय
सूर्य सुबह 6 बजकर 58 मिनट पर उदय होगा और शाम 5 बजकर 24 मिनट पर अस्त होगा। चंद्रमा दोपहर 3 बजकर 43 मिनट पर उदय होगा और 4 दिसंबर सुबह 6 बजकर 7 मिनट पर अस्त होगा। दिन की लंबाई 10 घंटे 25 मिनट 53 सेकंड और रात की 13 घंटे 34 मिनट 51 सेकंड रहेगी।
तिथि, नक्षत्र, योग और करण
शुक्ल त्रयोदशी दोपहर 12:25 तक, फिर शुक्ल चतुर्दशी। नक्षत्र भरणी शाम 5:59 तक, फिर कृत्तिका। करण तैतिल दोपहर 12:25 तक, फिर गर रात 10:33 तक, उसके बाद वणिज।
चंद्र मास और संवत
विक्रम संवत 2082 कालयुक्त, शक संवत 1947 विश्वावसु, गुजराती संवत 2082 पिंगल। चंद्र मास मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत और अमांत दोनों में), प्रविष्टे/गते 18।
ऋतु और अयन
ऋतु हेमंत (द्रिक और वैदिक), अयन दक्षिणायन।
3 दिसंबर का शुभ समय
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:09 से 6:04 बजे तक (ध्यान-जप के लिए सर्वोत्तम)
- प्रातः संध्या: सुबह 5:37 से 6:58 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 1:55 से 2:37 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:21 से 5:49 बजे तक
- सायाह्न संध्या: शाम 5:24 से 6:45 बजे तक
- अमृत काल: दोपहर 1:46 से 3:10 बजे तक
- निशिता मुहूर्त: रात 11:44 बजे से 4 दिसंबर सुबह 12:38 बजे तक
- सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग: शाम 5:59 बजे से 4 दिसंबर सुबह 6:59 बजे तक (रात में कोई भी शुभ कार्य करें तो सिद्धि मिलेगी)
3 दिसंबर का अशुभ समय
- राहुकाल: दोपहर 12:11 से 1:29 बजे तक (नए काम न करें)
- यमगण्ड: सुबह 8:16 से 9:34 बजे तक
- गुलिक काल: सुबह 10:53 से दोपहर 12:11 बजे तक
- विडाल योग: सुबह 6:58 से शाम 5:59 बजे तक
- आडल योग: शाम 5:59 से 4 दिसंबर सुबह 6:59 तक
- दुर्मुहूर्त: सुबह 11:50 से दोपहर 12:32 बजे तक
- बाण: रोग – सुबह 9:15 बजे से पूरी रात तक
आनंदादि और तमिल योग
आनंदादि योग में काण शाम 5:59 तक, फिर सिद्धि। तमिल योग में मरण शाम 5:59 तक, फिर अमृत। जीवनम में पूर्ण जीवन, नेत्रम में दो नेत्र।
निवास और शूल
होमाहुति शनि को (शाम 5:59 तक), फिर चंद्रमा को। दिशा शूल उत्तर दिशा में – उत्तर की यात्रा टालें। अग्निवास दोपहर 12:25 तक पाताल में, फिर पृथ्वी में। चंद्र वास रात 11:14 तक पूर्व में, फिर दक्षिण में। राहु वास दक्षिण-पश्चिम, शिववास दोपहर 12:25 तक नंदी पर, फिर भोजन में। कुंभ चक्र पश्चिम में।
