Aaj ka Panchang 21 March 2025 (आज का पंचांग 21 मार्च 2025): शुक्रवार का दिन हिंदू धर्म और ज्योतिष में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। ये दिन विशेष रूप से माता लक्ष्मी और मां आदिशक्ति के विभिन्न स्वरूपों की पूजा का होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा और व्रत करने से धन, वैभव, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। लक्ष्मी माता की कृपा पाने के लिए इस दिन व्रत रखकर खीर, मिश्री और दूध से बनी चीजों का भोग लगाना अत्यंत ही शुभ होता है। ज्योतिषीय दृष्टि से शुक्र ग्रह भौतिक प्रेम, सौंदर्य, कला, संगीत और विवाह से जुड़ा हुआ माना जाता है। जिन जातकों की कुंडली में शुक्र ग्रह कमजोर होता है, उन्हें शुक्रवार को विशेष उपाय करने की सलाह दी जाती है। इस दिन सफेद वस्त्र पहनना, सुगंधित फूल अर्पित करना, चावल, दूध, मिश्री और सफेद मिठाइयों का दान करना शुभ माना जाता है। शुभ मुहूर्त, राहुकाल, दिशा शूल और तिथि से जुड़ी अन्य जानकारियों के लिए यहां पढ़ें 21 मार्च 2025 का पंचांग।
आज का पंचांग 21 मार्च 2025 (Aaj ka Panchang 21 March 2025)
- संवत - पिङ्गला विक्रम संवत 2081
- माह - चैत्र, कृष्ण पक्ष,
- तिथि - चैत्र माह कृष्ण पक्ष सप्तमी
- पर्व - वैभव लक्ष्मी व्रत
- दिवस - शुक्रवार
- सूर्योदय - 06:26 ए.एम सूर्यास्त 6:32 पी.एम
- नक्षत्र- ज्येष्ठा
- चन्द्र राशि - वृश्चिक, स्वामी ग्रह-मंगल
- सूर्य राशि - मीन, स्वामी ग्रह-गुरु
- करण - विष्टि 03:39 पी.एम तक फिर बव
- योग - सिद्धि 06:43 पी.एम तक फिर व्यतिपात
आज के शुभ मुहूर्त
- अभिजीत - 12:07 पी.एम से 12:55 पी.एम तक
- विजय मुहूर्त - 02:25 पी.एम से 03:25 पी.एम तक
- गोधुली मुहूर्त - 06:25 पी.एम से 07:21 पी.एम तक
- ब्रम्ह मुहूर्त - 4:03 ए.एम से 05:07 ए.एम तक
- अमृत काल - 06:03 ए.एम से 07:46 ए.एम तक
- निशीथ काल मुहूर्त - रात्रि 11:42 से 12:26 तक
- संध्या पूजन - 06:26 पी.एम से 07:04 पी.एम तक
दिशा शूल - पश्चिम दिशा। इस दिशा में यात्रा से बचें। दिशाशूल के दिन उस दिशा की यात्रा करने से बचते हैं, यदि आवश्यक है तो एक दिन पहले प्रस्थान निकालकर फिर उसको लेकर यात्रा करें। पक्षियों को दाना-पानी दें।
अशुभ मुहूर्त - राहुकाल - प्रातःकाल 10:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक
क्या करें - आज चैत्र माह कृष्ण पक्ष सप्तमी है। वैभव लक्ष्मी व्रत है। आज श्रद्धा पूर्वक व्रत रहें। माता लक्ष्मी की उपासना तथा दान-पुण्य करें साथ में भगवान विष्णु की पूजा करने से ये उपासना फलित होती है। शुक्र के बीज मंत्र का जप करें। श्री सूक्त का पाठ करें। चने की दाल ,गुड़ व इत्र का दान करें। भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करें। पत्नी की स्वर्ण या हीरे के आभूषण उपहार स्वरूप दें। शुक्र प्रेम व दाम्पत्य जीवन में माधुर्यता का कारक ग्रह है। इत्र भगवान को लगाएं व घर में सुगंधित अगरबत्ती जलाएं।
क्या न करें - जो लोग पत्नी का सम्मान नहीं करते, उनका शुक्र अच्छे फल नहीं देता। जीवनसाथी से कटु वचन का प्रयोग मत करें।
