क्यों अमेरिका से सबमरीन नहीं खरीदता है भारत, रूस और फ्रांस पर ही बना हुआ है Indian Navy का भरोसा

भारत सिर्फ फाइटर जेट के ही मामले में नहीं बल्कि सबमरीन यानि कि पनडुब्बियों के मामले में भी अमेरिका की ओर नहीं देखता है। अमेरिका से आजतक भारत ने एक भी सबमरीन न तो खरीदा है और न ही पट्टे पर लिया है। भारत में इस समय जितनी भी सबमरीन है, वो यहा रूसी हैं या फिर यूरोपीय देशों की। अमेरिका दुनिया में हथियार के बिजनेस का सबसे बड़ा देश है, एक से एक आधुनिक हथियार, सबमरीन, युद्धपोत सब अमेरिका के पास हैं, लेकिन भारत ने कभी भी अमेरिकी हथियारों को भाव नहीं दिया है। भारत सबमरीन के मामले में भी सबसे ज्यादा रूस पर निर्भर रहा है। हालांकि अब भारत खुद से ही अपनी जरूरत का हथियार बनाने लगा है। भारत में ही अब सबमरीन बनने लगे हैं।

Authored by: शिशुपाल कुमारUpdated Jul 4 2025, 12:05 IST
भारत के पास किस-किस देश की सबमरीनImage Credit : Indian Navy/Indian Govr01 / 07

भारत के पास किस-किस देश की सबमरीन

भारत के पास मुख्य रूप से रूस से खरीदी हुई सबमरीन है। भारत के पास फ्रांस से खरीदी हुई भी सबमरीन है। कुछ सबमरीन फ्रांस और रूस के सहयोग से देश में ही बनी है और बन भी रही है। HDW Type 209/1500 (Shishumar-class): जर्मन डिज़ाइन की डीज़ल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियाँ, जिनमें से कुछ मुंबई में मझगांव डॉक्स में बनाई गई थीं। Scorpène-class (Kalvari-class): फ्रांसीसी कंपनी Naval Group (DCNS) के सहयोग से बनी डीज़ल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां हैं।

भारत के पास कितनी पनडुब्बी Image Credit : Indian Navy/Indian Govr02 / 07

भारत के पास कितनी पनडुब्बी

2025 तक भारत के पास कुल 17 पनडुब्बियां सक्रिय सेवा में हैं, जिनमें परमाणु और डीज़ल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां शामिल हैं। भारत के पास 15 पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां हैं, जिनमें से कुछ पुरानी हो चुकी हैं और कुछ को अपग्रेड किया जा रहा है या रिटायर किया जाएगा। भारत के पास दो परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां हैं: आईएनएस अरिहंत और आईएनएस अरिघात

रूस की कितनी सबमरीन भारत के पासImage Credit : Indian Navy/Indian Govr03 / 07

रूस की कितनी सबमरीन भारत के पास

2025 तक भारत के पास रूसी मूल (Russian origin) की लगभग 7 से 8 पनडुब्बियाँ सक्रिय सेवा में हैं। इनमें डीज़ल-इलेक्ट्रिक और परमाणु पनडुब्बियां दोनों शामिल हैं। जिसमें Kilo-Class (Sindhughosh-Class) – डीज़ल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां (SSK) शामिल हैं। इन पनडुब्बियों को सोवियत संघ (अब रूस) से 1980s-90s में प्राप्त किया गया था। भारत ने 10 Kilo-Class पनडुब्बियां खरीदी थीं, जिनमें से अब 6–7 सेवा में हैं, कुछ रिटायर हो चुकी हैं या आधुनिकीकरण के दौर में हैं।

भारत के पास कितनी परमाणु सबमरीनImage Credit : Indian Navy/Indian Govr04 / 07

भारत के पास कितनी परमाणु सबमरीन

भारत के पास वर्तमान में दो परमाणु पनडुब्बियां हैं, जिनका नाम आईएनएस अरिहंत और आईएनएस अरिघात है। भारत इन दो परमाणु पनडुब्बियों के साथ दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिनके पास यह क्षमता है। आईएनएस अरिहंत- यह भारत की पहली परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी है। आईएनएस अरिघात- यह भारत की दूसरी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी है, जो 750 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस है।

भारत के पास यूरोपीय देशों की कितनी पनडुब्बियांImage Credit : Indian Navy/Indian Govr05 / 07

भारत के पास यूरोपीय देशों की कितनी पनडुब्बियां

2025 तक भारत के पास यूरोपीय देशों की कुल लगभग 10 पनडुब्बियां (Submarines) हैं, जो या तो सीधे यूरोप से प्राप्त की गई हैं या उनके डिज़ाइन पर भारत में बनाई गई हैं। Scorpène-class (Kalvari-class)- फ्रांसीसी कंपनी Naval Group (पूर्व में DCNS) के डिजाइन पर आधारित आधुनिक डीज़ल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां, जिन्हें भारत में मझगांव डॉक्स (MDL), मुंबई में बनाया गया है। जर्मनी – Type 209 (Shishumar-class)- जर्मन कंपनी HDW (Howaldtswerke-Deutsche Werft) द्वारा डिज़ाइन की गई पनडुब्बियां। इनमें से दो जर्मनी से आई थीं और दो भारत में बनाई गईं।

भारतीय नौसेना पनडुब्बियों की संख्या बढ़ाने पर कर रही कामImage Credit : Indian Navy/Indian Govr06 / 07

भारतीय नौसेना पनडुब्बियों की संख्या बढ़ाने पर कर रही काम

भारतीय नौसेना अपनी पनडुब्बी बेड़े को आधुनिक बनाने और 2027 तक 24 पनडुब्बियों तक पहुंचाने की योजना पर काम कर रही है। भारत सरकार ने 6 और उन्नत पनडुब्बियों के निर्माण के लिए एक परियोजना शुरू की है, जो 95% तक स्वदेशी होंगी।

अमेरिका से भारत क्यों नहीं खरीदता पनडुब्बीImage Credit : Indian Navy/Indian Govr07 / 07

अमेरिका से भारत क्यों नहीं खरीदता पनडुब्बी

भारत ने अब तक अमेरिका से कोई पनडुब्बी नहीं खरीदी है, और इसके पीछे कई रणनीतिक, तकनीकी और राजनीतिक कारण हैं। भारत विदेशी डिज़ाइन के साथ पनडुब्बियाँ भारत में बनाने को प्राथमिकता देता है (जैसे फ्रांस की Scorpène पनडुब्बियां – भारत में बनीं)। अमेरिका ज्यादातर मामलों में "जैसी है वैसी लो (off-the-shelf)" नीति पर काम करता है, जिसमें तकनीकी ट्रांसफर सीमित होता है। भारत अमेरिकी पनडुब्बी की तकनीक को भी चुनौती देते रहा है। पाकिस्तान की PNS Ghazi सबमरीन को भी भारत ने मार गिराया था, जिसका निर्माण अमेरिका में हुआ था। ये उस समय की काफी खतरनाक सबमरीन थी। लेकिन भारतीय नौसेना ने इसे मार गिराया था, जिससे अमेरिका की किरकिरी भी हुई थी।

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