Space से लौटकर सबसे पहले क्या करते हैं अंतरिक्ष यात्री, स्पेसक्राफ्ट से बाहर आकर कहां जाएंगे शुभांशु शुक्ला?

Shubhanshu Shukla Return: एक्सिओम-4 मिशन में शामिल अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और तीन अन्य एस्ट्रोनॉट आज अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर 18 दिन ऱहने के बाद 22.5 घंटे की यात्रा करके आज पृथ्वी पर लौट रहे हैं। इन्हें लेकर आ रहा स्पेसक्राप्ट कैलिफोर्निया के सैन डिएगो में समुद्र पर उतरेगा। लेकिन क्या ये सभी तुरंत घर चले जाएंगे, या अपने परिजनों से मिलेंगे। आखिर अंतरिक्ष से लौटकर एस्ट्रोनॉट कहां जाते हैं और किन-किन दिक्कतों का सामने करते हैं, आपको बता रहे हैं।

Authored by: अमित कुमार मंडलUpdated Jul 15 2025, 13:21 IST
​कई तरह की मेडिकल जांच होगी​Image Credit : NASA01 / 07

​कई तरह की मेडिकल जांच होगी​

एक्सिओम-4 के चालक दल की जहाज पर ही कई चिकित्सीय जांच की जाएंगी। इसके बाद वे तट पर आने के लिए एक हेलिकॉप्टर में सवार होंगे। चारों अंतरिक्ष यात्रियों को पुनर्वास में सात दिन बिताने पड़ सकते हैं, क्योंकि उन्हें अंतरिक्ष की कक्षा में अनुभव की जाने वाली भारहीनता के विपरीत, गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में पृथ्वी पर जीवन के लिए खुद को ढालना होगा।

एक हफ्ते तक आइसोलेशन में रखा जाएगाImage Credit : NASA02 / 07

एक हफ्ते तक आइसोलेशन में रखा जाएगा

एक हफ्ते तक चारों को आइसोलेशन में रखा जाएगा। अंतरिक्ष और पृथ्वी का माहौल अलग होने के कारण एस्ट्रोनॉट्स का आइसोलेशन जरूरी होता। ये तुरंत अपने पैरों पर भी खड़े नहीं हो पाते हैं। एस्ट्रोनॉट्स तैरने जैसी स्थिति में होते हैं क्योंकि अंतरिक्ष में ग्रैविटी नहीं होने के कारण यहां हर काम करने का तरीका एकदम अलग होता है। (NASA)

शरीर में कई तरह की जटिलताएंImage Credit : NASA03 / 07

शरीर में कई तरह की जटिलताएं

अंतरिक्ष के माहौल में कई दिनों तक रहने के बाद वापस आने पर शरीर में कई तरह की जटिलताएं हो जाती है। अंतरिक्ष का माहौल और वातावरण एकदम अलग होता है, प्रतिरक्षा प्रणाली भी अलग मोड में चली जाती है। इसलिए एस्ट्रोनॉट्स के वापस आने पर उन्हें पृथ्वी के माहौल लायक होने के लिए आइसोलेशन में रखकर उस लायक बनाया जाता है। (NASA)

​अक्सर खड़े होने पर चक्कर आते हैं​Image Credit : NASA04 / 07

​अक्सर खड़े होने पर चक्कर आते हैं​

पृथ्वी पर लौटने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को अक्सर खड़े होने पर चक्कर आते हैं, जिसे ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन कहते हैं। पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण अंतरिक्ष की तुलना में कहीं अधिक होता है, और हृदय से सिर तक रक्त पहुंचाना अधिक कठिन होता है। इसके कारण कई दिक्कतें आती हैं। (NASA)

गुरुत्वाकर्षण के अनुसार फिर से अनुकूलन जरूरीImage Credit : NASA05 / 07

गुरुत्वाकर्षण के अनुसार फिर से अनुकूलन जरूरी

पृथ्वी पर लौटने के बाद अंतरिक्ष यात्री को तुरंत पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के अनुसार फिर से अनुकूल होना पड़ता है। इन्हें खड़े होने, अपनी दृष्टि स्थिर करने, चलने और मुड़ने में समस्या हो सकती है। इनकी सुरक्षा के लिए, लौटने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी पर लौटने के तुरंत बाद एक कुर्सी पर बिठाया जाता है। (NASA)

​शरीर का इम्यून सिस्टम भी कमजोर हो जाता है​06 / 07

​शरीर का इम्यून सिस्टम भी कमजोर हो जाता है​

अंतरिक्ष में माइक्रोग्रैविटी यानी गुरुत्वाकर्षण की कमी के कारण शरीर का इम्यून सिस्टम भी कुछ कमजोर हो जाता है। लौटने के बाद लोगों के बीच जाने से उन्हें सर्दी, फ्लू, वायरस आदि हो सकता है, जो उनके लिए गंभीर हो सकता है। इसीलिए इन्हें कुछ दिनों तक अलग रखा जाता है। (NASA)

​18 दिन बाद ड्रैगन ‘ग्रेस’की वापसी​07 / 07

​18 दिन बाद ड्रैगन ‘ग्रेस’की वापसी​

शुभांशु शुक्ला, कमांडर पैगी व्हिट्सन, मिशन विशेषज्ञ पोलैंड के स्लावोज़ उज्नान्स्की-विस्नीव्स्की और हंगरी के टिबोर कापू को लेकर आ रहा ड्रैगन ‘ग्रेस’ अंतिरक्ष यान भारतीय समयानुसार आज दोपहर तीन बजे सैन कैलिफोर्निया के सैन डिएगो में समुद्र पर उतर रहा है। इस क्रू ने 25 जून को फॉल्कन-9 पर अंतरिक्ष यात्रा शुरू की थी। क्रू ने आईएसएस पर 18 दिन तक करीब 60 प्रयोग किए। (Photo- NASA)

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