पानीपत की दूसरी लड़ाई किसके बीच हुई, कम सैनिक व बल होने के बावजूद कैसे जीता युद्ध

इतिहास का यह सवाल अक्सर अक्सर प्रतियोगी परीक्षा में पूछा जाता है कि पानीपत में कितनी लड़ाई हुई, किसने जीता युद्ध वगैरह वगैरह। इससे पहले हम आपको पानीपत की पहली लड़ाई के बारे में बता चुके हैं, आज हम जानेंगे Panipat ka dusra yuddh kiske bich hua, kisne jita। पानीपत की दूसरी लड़ाई किसके बीच हुई, पानीपत की दूसरी लड़ाई में कौन पराजित हुआ, पानीपत का दूसरा युद्ध कब हुआ और किन कारणों से हुआ

Authored by: नीलाक्ष सिंहUpdated Sep 26 2024, 13:58 IST
पानीपत की दूसरी लड़ाई किसके बीच हुईImage Credit : Meta Ai01 / 05

पानीपत की दूसरी लड़ाई किसके बीच हुई

panipat.gov.in के अनुसार, पानीपत की दूसरी लड़ाई सम्राट हेमचन्द्र विक्रमादित्य (जिन्हें लोकप्रिय रूप से हेमू भी कहा जाता था) जो दिल्ली से उत्तर भारत पर शासन कर रहे थे और अकबर की सेना के बीच लड़ा गया था।

पानीपत की दूसरी लड़ाई किसने जीतीImage Credit : Meta Ai02 / 05

पानीपत की दूसरी लड़ाई किसने जीती

यह अकबर के सेनापतियों खान जमान प्रथम तथा बैरम खान के लिए एक निर्णायक विजय थी। इस लड़ाई में हेमू की सेना की बड़ी संख्या थी, लेकिन फिर भी अकबर की सेना ने जीत हासिल की।

पानीपत का दूसरा युद्ध कब हुआImage Credit : Meta Ai03 / 05

पानीपत का दूसरा युद्ध कब हुआ

पानीपत का दूसरा युद्ध 5 नवम्बर 1556 को लड़ा गया। इस लड़ाई में हेमू को गिरफ्तार कर लिया गया और मौत की सजा सुनाई गई। हेमू ने कुछ सप्ताह पहले ही दिल्ली की लड़ाई में तारदी बेग खान के नेतृत्व वाली मुगल सेना को हराकर दिल्ली और आगरा पर विजय प्राप्त की थी।

कौन थे हेमूImage Credit : Meta Ai04 / 05

कौन थे हेमू

हेमू वर्तमान हरियाणा के रेवाड़ी से थे, जो पहले 1545 से 1553 तक शेर शाह सूरी के बेटे इस्लाम शाह के सलाहकार थे। हेमू ने 1553 से 1556 के दौरान इस्लाम शाह के प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख के रूप में सूर शासन के खिलाफ अफगान विद्रोहियों द्वारा विद्रोह को दबाने के लिए 22 युद्ध जीते थे।

हुमायूं की मौत, अकबर को कब मिली तख्त की कमानImage Credit : Meta Ai05 / 05

हुमायूं की मौत, अकबर को कब मिली तख्त की कमान

24 जनवरी, 1556 को मुगल शासक हुमायूं की दिल्ली में मृत्यु हो गई और उसके बाद उसके बेटे अकबर ने गद्दी संभाली, जो केवल तेरह वर्ष का था। 14 फरवरी, 1556 को अकबर को राजा के रूप में सिंहासन पर बैठाया गया।

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