LNG की फुल फॉर्म Liquefied Natural Gas होती है। यह मुख्य रूप से मीथेन होती है। यह एक प्राकृतिक गैस का तरल रूप है। बता दें कि इसे लंबी दूरी के परिवहन के लिए करीब 162 डिग्री सेल्सियस तापमान पर ठंडा किया जाता है, जिससे यह लिक्विड में बदल जाता है।
लिक्विफाइड नेचुरल गैस, जिसे ठंडा करके तरल में बदला जाता है। बता दें कि प्राकृतिक गैस से पानी, कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर और अन्य अशुद्धियों को हटाया जाता है। लेकिन यह भी ध्यान रखा जाता है कि ठंडक के दौरान यह बर्फ में न बदल जाए। क्योंकि लिक्विफाइड करने के लिए इस गैस को बहुत कम तापमान में ठंडा किया जाता है।
एलएनजी गैस बिजली उत्पादन, भारी वाहनों/जहाजों के ईंधन, उर्वरक कारखानों और औद्योगिक बॉयलरों में उपयोग की जाती है। बता दें कि इस उपयोग से पहले गैस में बदला जाता है। मुख्य तौर पर एलएनजी ऊर्जा के क्षेत्र के लिए लाभकारी मानी जाती है।
एलएनजी बनाने की तीन प्रक्रिया है। पहले उसकी सफाई की जाती है, उसके बाद द्रवीकरण यानी गैस को ठंडा कर तरल में बदला जाता है। उसके बाद इसे इंसुलेटेड टैंकों में स्टोर किया जाता है क्योंकि इन टैंकों में तापमान कम बना रहता है।
भारत एलएनजी गैस के लिए आयात पर निर्भर करता है। यह इस गैस के मामले में आत्मनिर्भर देश नहीं है।
भारत अपनी एलएनजी जरूरतों का 60 से 85 प्रतिशत हिस्से के लिए खाड़ी देशों यानी मिडिल ईस्ट देशों पर निर्भर करता है। भारत कतर, सऊदी अरब, यूएआई और कुवैत से आयात करता है। जिसके बाद इन्हें रिफाइनरियों में भेजा जाता है।