भारत में ज्यादातर जगह पर कक्षा 1 के बाद से स्कूल बैग में काफी सामान जाता है, जिस कारण स्कूल बैग बच्चों को भारी लगने लगता है। और यही बच्चों की थकान का सबसे बड़ा कारण भी बनता है। आइये जानते हैं अमेरिका के स्कूल में छोटे बच्चे अपने बैग में क्या ले जाते हैं?
अमेरिकी स्कूली बच्चे आमतौर पर ऐसे बैकपैक लेकर चलते हैं, जिसमें टिफिन, पानी की बॉटल, फोल्डर और स्टेशनरी (पेंसिल, पेन, मार्कर, हाइलाइटर) होती है। इसके अलावा केवल एक नोटबुक होती है।
अब आप सोचेंगे कि अमेरिका के स्कूल में बच्चे किताबे और कॉपियां क्यों नहीं ले जाते तो बता दें, वहां सभी के पास कक्षा की सारी किताबें और कॉपियां होती हैं, लेकिन वे हर दिन उसे अपने साथ नहीं ढोते हैं।
दरअसल, अमेरिका के स्कूलों में एक खास नियम है। वहां कॉपी किताबें स्कूल में ही सबमिट करनी होती हैं। बकायदा इसके लिए वहां हर बच्चे को जगह दी जाती है, और उनका सामान भी सुरक्षित रहता है।
बड़े बच्चों को लॉकर दिया जाता है, क्योंकि वे खुद से ताला लगाने के लिए और चाबी की जिम्मेदारी उठाने के लिए योग्य हो जाते हैं। वहीं, छोटे बच्चों को अपनी किताबें एक टब में रखनी होती हैं। जो कि उनकी क्लास में ही रहता है।
हालांकि समय के साथ भारत में भी भारी बैग से जुड़े नियमों में बदलाव किए गए। यहां पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों के लिए स्कूल बैग का वजन 1.6 से 2.2 किलोग्राम निर्धारित है। जबकि तीसरी से पांचवी कक्षा तक के बच्चों के लिए स्कूल बैग का वजन 1.7 किलोग्राम से 2.5 किलो है। वहीं कक्षा 6 और 7वीं के लिए स्कूल बैग का वजन 2 से 3 किलो है।
कक्षा 8वीं के छात्रों के स्कूल बैग का वजन 2.5 किलो से 6 किग्रा से ज्यादा नहीं होगा चाहिए। 9वीं और 10वीं कक्षा में स्कूल बैग का वजन 2.5 कि से 4.5 किलोग्राम हो सकता है। 11वीं और 12वीं कक्षा की बात करें, तो स्कूल बैग का वजन 3.5 किलो से 5 किलोग्राम हो सकता है। शिक्षा मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया था कि प्री प्राइमरी कक्षाओं में बच्चों को स्कूल बैग नहीं दिया जाना चाहिए। यही कारण है अब भारत में भी आपने देखा होगा कि ज्यादातर प्राइवेट स्कूल में बच्चों को स्कूल में किताबें और कॉपी रहती हैं।