जापान की होक्काइडो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया कि Physcomitrium patens मॉस (एक नॉन-वैस्कुलर पौधा) की एक प्रजाति है, के बीजाणु अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से बाहर नौ माह तक जीवित रहे। चौकाने वाली बात तब सामने आई जब 80 प्रतिशत से अधिक बीजाणु धरती पर लौटने पर भी अंकुरित हो सकते की स्थित में पाए गए।
ये बीजाणु —196°C की सर्दी में और 55°C की गर्मी भी झेल ले गए। यही नहीं, ये बीजाणु अंकुरित होने में भी सक्षम हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार यह संरचना बीजाणु को शारीरिक और रासायनिक सुरक्षा देती है और उनके जीवित रहने की क्षमता को बढ़ाती है।
इस रिसर्च में फिस्कोमिट्रियम पैटेंस (Physcomitrium patens) के बीजाणुओं को उन जीवों की लिस्ट में जोड़ा गया है जो स्पेस में लंबे समय तक जिंदा रह सकते हैं। इस लिस्ट में कुछ बैक्टीरिया, लाइकेन, पौधों के बीज और टार्डिग्रेड्स की अलग-अलग तरह की प्रजातियां शामिल हैं।
शोधकर्ताओं ने कहा कि अधिकांश जीव, इंसान समेत अंतरिक्ष के वेक्यूम में थोड़ी देर भी जीवित नहीं रह सकत हैं, लेकिन यह बीजाणु अपने जीवन को बनाए रखने में सक्षम साबित हुआ। इन बीजाणुओं ने हानिकारक यूवी रेडिएशन, गर्मी और ठंड जैसी कठिन परिस्थितियों को भी झेला है।
यह बीजाणु पृथ्वी पर 500 मिलियन साल पहले जलजीवों से स्थलजीव बनने में मददगार था और अब इसे अन्य ग्रहों पर जीवन बसाने की संभावनाओं के लिए भी देखा जा रहा है।
बीजाणुओं में केवल 20 प्रतिशत क्लोरोफिल ए की कमी पाई गई, बाकी सभी क्लोरोफिल सामान्य स्तर पर काम कर रहे थे। रिसर्चर्स का मानना है कि ये काम भविष्य में चंद्रमा और मंगल जैसे ग्रहों पर नए इको-सिस्टम बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।