कुणाल शाह की शुरुआती उच्च शिक्षा मुंबई से हुई है। उन्होंने साल 1994 में मुंबई के मशहूर विल्सन कॉलेज में एडमिशन लिया था। यहां से उन्होंने अपनी बीए की पढ़ाई पूरी की। बता दें कि उन्होंने साल 2000 में अपनी बैचलर डिग्री सफलतापूर्वक हासिल की।
आमतौर पर देखा गया है और माना भी जाता है कि बड़ी टेक कंपनियों या स्टार्टअप्स के मालिक कंप्यूटर साइंस या कोडिंग बैकग्राउंड से होते हैं। लेकिन 47 वर्षीय कुणाल शाह ने इस बात को पूरी तरह से गलत साबित कर दिया है। क्योंकि उनके साथ यह स्थिति नहीं रही है। वह टेक बैकग्राउंड से नहीं है और उन्होंने विल्सन कॉलेज से दर्शनशास्त्र यानी 'फिलॉसफी' में शिक्षा प्राप्त की है।
कुणाल शाह के जीवन में संघर्ष और मेहनत की शुरुआत काफी पहले हो चुकी थी। उन्होंने अपने कई इंटरव्यूज में खुद इस बताया है कि वे जब छोटे थे, उन्होंने तभी से पढ़ाई के साथ काम करना शुरू कर दिया था। यह वजह रही कि वह किताबों में लिखी बातों के मुकाबले व्यावहारिक दुनिया और बिजनेस के तौर-तरीकों को ज्यादा तेजी से और बेहतर ढंग से सीख पाए।
ग्रेजुएशन की शिक्षा प्राप्त करने के बाद कुणाल ने अपनी कंपनी शुरू करने का सपना देखा और इसके लिए उन्होंने बिजनेस की बारीकियों को और गहराई से सीखने के लिए साल 2003 में मुंबई के 'एसवीकेएम नरसी मोंजी इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज' (NMIMS) कॉलेज में मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) कोर्स में एडमिशन लिया।
कुणाल शाह पार्ट-टाइम मोड में एमबीए की पढ़ाई करते हुए उसके साथ ही अपनी कंपनियां खड़ी करने की कोशिशों में लगे हुए थे। लेकिन बिजनेस की व्यस्तताओं और काम के प्रति उनके जुनून बहुत अधिक था कि उन्होंने इस कोर्स को बीच में छोड़ दिया और एक कॉलेज ड्रॉपआउट बन गए।
भले ही कुणाल शाह के पास एमबीए की बड़ी डिग्री नहीं है और न ही इंजीनियरिंग से उनका कोई नाता है, लेकिन उनका प्रैक्टिकल ज्ञान और तजुर्बा उनके लिए सबसे बड़ा साबित हुआ है। कॉलेज छोड़ने के बाद उन्होंने फ्रीचार्ज और क्रेड जैसे सफल स्टार्टअप्स खड़े किए, जो आज उनके इसी अनोखे विजन, इंसानी व्यवहार की समझ और AI के युग में वैश्विक उत्पादन क्षमता को संभालने के उनके हुनर को दिखाते हैं। उनके इसी हुनर को देखते हुए मेटा ने उन्हें 3 अरब यूजर्स वाले व्हाट्सएप का नया ग्लोबल लीडर चुना है।
कुणाल शाह, भारतीय स्टार्टअप जगत में एक कुशल उद्यमी और एंजेल निवेशक के रूप में प्रसिद्ध है। उन्होंने अगस्त 2010 में ऑनलाइन रिचार्ज प्लेटफॉर्म 'फ्रीचार्ज' की शुरुआत की थी, जिसे बाद में 2015 में स्नैपडील ने करीब 450 मिलियन डॉलर में खरीदा था। इसके बाद उन्होंने वाई कॉम्बिनेटर और सिकोइया कैपिटल जैसी बड़ी फर्मों में सलाहकार और पार्टनर के रूप में काम किया। अप्रैल 2018 में उन्होंने क्रेड (CRED) की स्थापना की, जो क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान पर रिवॉर्ड देने वाला एक लोकप्रिय प्लेटफॉर्म बन गया और अब वह व्हाट्सएप के सीईओ बनने वाले हैं।