बोरी बंदर से ठाणे के बीच चली ट्रेन ने 34 किलोमीटर की दूरी तय करने में सवा घंटे का समय लगाया था। उस रेलगाड़ी के 14 डिब्बों को खींचने के लिए तीन इंजन जोड़ने पड़े थे, जिन्हें साहिब, सिंध और सुल्तान नाम दिया गया था।
आज भारत के पास वंदे भारत, राजधानी एक्सप्रेस और शताब्दी एक्सप्रेस जैसी तेज-तर्रार ट्रेने हैं। पहली ट्रेन में 400 लोगों को बैठने का मौका मिला था। उस समय एक भव्य उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया था।
ट्रेन की शुरुआत भारत में कितनी अहम थी, इसे इस बात से समझा जा सकता है कि पहली ट्रेन को चलाने से पहले 21 तोपों की सलामी तक दी गयी थी। ट्रेन दोपहर में 3:30 बजे बोरी बंदर से निकलकर 4:45 बजे ठाणे पहुंची थी।
अंग्रेजों को माल इधर-उधर भेजना होता था और वो भी पूरी सुरक्षा के साथ। इसलिए उन्होंने भारतीयों की सहूलियत के लिए नहीं बल्कि अपने फायदे के लिए भारत में रेल नेटवर्क बिछाया।
इसके बाद 15 अगस्त 1854 को पहली यात्री ट्रेन कलकत्ता के हावड़ा स्टेशन से हुगली के लिए रवाना हुई। आज भारत के पास दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है।