नवरात्रि का पर्व न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण है। ये आत्म शुद्धि, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का कारक भी माना जाता है, जिसे पूरे भारतवर्ष में धूम-धाम से मनाया जाता है। शारदीय नवरात्रि का त्योहार हर साल आश्विन महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन मनाई जाती है। साल 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026 से शुरू होकर 19 अक्तूबर 2026 तक चलेगा।

नवरात्रि नौ रातों के समूह को कहते हैं जिसमें देवी मां का व्रत-पूजन किया जाता है। ये पर्व आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने के साथ-साथ तन-मन के शुद्धिकरण का भी होता है। शक्ति के विभिन्न रूप जीवन के विभिन्न पहलुओं और ऊर्जा के अलग-अलग रूपों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनकी आराधना से मनुष्य को सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है।

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माता शैलपुत्री की पूजा क्यों की जाती है?

माता शैलपुत्री नवदुर्गा में प्रथम देवी हैं और हिमालय की पुत्री होने के कारण उन्हें यह नाम मिला। इनकी पूजा से मन और आत्मा की शुद्धि होती है।

माता ब्रह्मचारिणी की पूजा का महत्व क्या है?

माता ब्रह्मचारिणी को कौन सा भोग प्रिय है?

माता ब्रह्मचारिणी का मंत्र क्या है?

Navratri में कौन-कौन से रंग पहने जाते हैं?

Navratri में उपवास कैसे किया जाता है?

Navratri में कौन-कौन से देवी की पूजा होती है?