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विश्व हिंदी दिवस 2026: कौन हैं पद्मश्री प्रोफेसर तोमियो मिजोकामी, माने जाते हैं विदेशी धरती पर हिंदी के सिपाही

विश्व हिंदी दिवस 2026: पद्मश्री प्रोफेसर तोमियो मिजोकामी जापान में हिंदी और भारतीय भाषाओं के सबसे प्रमुख संवाहक माने जाते हैं। विश्व हिंदी दिवस 2026 पर भारत यात्रा के दौरान उनकी उपस्थिति से उम्मीद लगाई जा रही है कि इससे भारत–जापान सांस्कृतिक संबंधों से नई मजबूती मिलेगी। हिंदी, पंजाबी सहित छह से अधिक भारतीय भाषाओं पर उनका शोध और अध्यापन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है। उनका जीवन यह प्रमाण है कि हिंदी भाषा देशों और संस्कृतियों को जोड़ने वाली एक सशक्त सेतु है।

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विदेशी धरती पर हिंदी को पहचान दिलाने का काम कर रहे हैं तोमियो मिजोकामी

विश्व हिंदी दिवस 2026: जब हिंदी की वैश्विक यात्रा की बात होती है, तो पद्मश्री प्रोफेसर तोमियो मिजोकामी का नाम स्वाभाविक रूप से उन हस्तियों में लिया जाता है जो इसे सशक्त करने में लगे हैं। जापान जैसे गैर-हिंदी भाषी देश में हिंदी सहित भारतीय भाषाओं को अकादमिक पहचान दिलाने वाले प्रोफेसर मिजोकामी भारत–जापान सांस्कृतिक संबंधों के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक माने जाते हैं। आईसीसीआर (Indian Council for Cultural Relations) के विशेष आमंत्रण पर इन दिनों भारत यात्रा पर आए प्रोफेसर मिजोकामी 14 जनवरी 2026 तक देश में रहकर युवा संवाद, शैक्षणिक चर्चाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। विश्व हिंदी दिवस पर उनकी उपस्थिति यह स्पष्ट संदेश देती है कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि सभ्यताओं को जोड़ने वाला एक सेतु है।

जापान से भारत तक एक अकादमिक यात्रा

1941 में जापान के कोबे शहर में जन्मे प्रोफेसर तोमियो मिजोकामी को बचपन से ही भारतीय संस्कृति, दर्शन और भाषाओं के प्रति गहरी रुचि रही। उन्होंने वर्ष 1965 में ओसाका यूनिवर्सिटी ऑफ फॉरेन स्टडीज से भारतीय अध्ययन में स्नातक की डिग्री प्राप्त की और इसके बाद भारत आकर भाषा अध्ययन को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया।

कई भारतीय भाषाओं के विद्वान हैं पद्मश्री प्रोफेसर तोमियो मिजोकामी

कई भारतीय भाषाओं के विद्वान हैं पद्मश्री प्रोफेसर तोमियो मिजोकामी

1965 से 1968 के बीच उन्होंने इलाहाबाद में हिंदी और विश्व-भारती विश्वविद्यालय, शांतिनिकेतन में बांग्ला भाषा का गहन अध्ययन किया। इसी दौरान भारतीय समाज की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता से उनका गहरा आत्मिक जुड़ाव बना।

भारतीय भाषाओं के अंतरराष्ट्रीय विद्वान

प्रोफेसर मिजोकामी ने 1972 में दिल्ली विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उनका शोध पंजाब क्षेत्र में भाषा-संपर्क (Language Contact) और समाजभाषाविज्ञान पर केंद्रित रहा, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष मान्यता मिली। वे हिंदी, पंजाबी, बांग्ला, उर्दू, गुजराती, मराठी, तमिल, कश्मीरी, सिंधी सहित कई भारतीय भाषाओं में दक्ष हैं। उन्हें पंजाबी भाषा पर शोध करने वाला पहला जापानी विद्वान माना जाता है। इसके अलावा वे अंग्रेजी, जर्मन और फ्रेंच भाषाओं में भी पारंगत हैं।

ओसाका विश्वविद्यालय से वैश्विक मंच तक

दशकों तक ओसाका विश्वविद्यालय में भारतीय भाषाओं के अध्यापन के बाद वर्ष 2007 से वे प्रोफेसर एमेरिटस के रूप में सक्रिय हैं। उन्होंने अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले में भी पंजाबी भाषा का अध्यापन किया, जिससे भारतीय भाषाओं की वैश्विक पहुंच और मजबूत हुई। उनकी प्रमुख पुस्तकों में Introductory Punjabi, Punjabi Reader, Practical Punjabi Conversation और Language Contact in Punjab शामिल हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों में संदर्भ ग्रंथ के रूप में पढ़ाया जाता है।

अनुवाद के माध्यम से आध्यात्मिक संवाद

प्रोफेसर मिजोकामी ने गुरु नानक देव जी की पवित्र रचना जपजी साहिब का जापानी भाषा में अनुवाद कर सिख दर्शन और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा को जापान तक पहुंचाया। इसके अलावा उन्होंने The Sikhs: Their Religious Beliefs and Practices जैसी महत्वपूर्ण कृतियों का भी जापानी अनुवाद किया।

उनका मानना है कि भारतीय भाषाओं के माध्यम से उन्होंने केवल शब्दों नहीं बल्कि भारत की आत्मा को जाना है।

पद्मश्री सम्मान और भारत की मान्यता

भारतीय भाषाओं और संस्कृति के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2018 में उन्हें पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया। राष्ट्रपति भवन में आयोजित सिविल इन्वेस्टिचर समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया, जो जापान में भारतीय भाषाओं के प्रचार-प्रसार की औपचारिक स्वीकृति का प्रतीक है।

प्रधानमंत्री मोदी से भेंट

हिरोशिमा में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोफेसर मिजोकामी से भेंट कर उनके आजीवन योगदान की सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा - प्रोफेसर मिजोकामी जैसे विद्वानों ने भाषा और साहित्य के माध्यम से भारत और जापान के बीच स्थायी पुल बनाए हैं। इस मुलाकात को भारत की सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी का सशक्त उदाहरण माना गया।

विश्व हिंदी दिवस और मिजोकामी की विरासत

10 जनवरी को मनाया जाने वाला विश्व हिंदी दिवस हिंदी को वैश्विक संवाद की भाषा के रूप में स्थापित करने का प्रतीक है। प्रोफेसर तोमियो मिजोकामी ने इस उद्देश्य को दशकों पहले ही अपने जीवन का मिशन बना लिया था। जापान में हिंदी को अकादमिक सम्मान दिलाने में उनकी भूमिका ऐतिहासिक और प्रेरणादायक रही है।

आज जब भारत और जापान के रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध नई ऊंचाइयों पर हैं। प्रोफेसर तोमियो मिजोकामी का जीवन यह सिद्ध करता है कि भाषा, ज्ञान और संस्कृति सीमाओं से परे लोगों को जोड़ते हैं। वे केवल एक विद्वान नहीं, बल्कि भारत–जापान मित्रता के जीवंत प्रतीक हैं - और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्थायी प्रेरणा भी।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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