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शर्मिला टैगोर को टाइगर पटौदी ने दिये थे मजबूत रिश्ते का मूलमंत्र, आपके भी आ सकता है काम

मनोवैज्ञानिक भी मानते हैं कि लंबे समय तक चलने वाले रिश्तों में एक-दूसरे को स्वीकार करना सबसे अहम होता है।

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शर्मिला ने जो सीखा वो आपके लिए भी खुशहाल शादी का सबक हो सकता है (Photo: Sharmila Tagore Insta)

Relationship: फिल्मों की चमचमाती दुनिया और क्रिकेट के मैदान का रुतबा! जब 60 के दशक में बॉलीवुड की ग्रेसफुल एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर और भारतीय क्रिकेट टीम के युवा कप्तान नवाब मंसूर अली खान यानी 'टाइगर पटौदी' की मुलाकात हुई, तो एक ऐसी प्रेम कहानी ने जन्म लिया जो आज भी नए दौर के कपल्स के लिए मिसाल है।

साल 1968 में जब दोनों ने शादी करने का फैसला किया, तो अलग-अलग धर्म और पृष्ठभूमि के कारण समाज में काफी हलचल हुई। लेकिन तमाम विरोधों के बावजूद दोनों ने 43 सालों तक एक-दूसरे का हाथ थामे रखा। हाल ही में एक इंटरव्यू में शर्मिला टैगोर ने अपने इस लंबे और खूबसूरत रिश्ते के कुछ ऐसे राज खोले, जो आज के हर रिश्ते को संवार सकते हैं:

सामने वाले की गरिमा बनाए रखें

शर्मिला टैगोर ने बताया कि टाइगर बहुत ही दयालु और शांत स्वभाव के व्यक्ति थे। उन्होंने मुझे सिखाया कि चाहे बच्चे हों, घर के कर्मचारी हों या जानवर, किसी पर भी कभी आवाज नहीं उठानी चाहिए।

बोलने से पहले सोचें

शर्मिला के मुताबिक, टाइगर पटौदी कहते थे कि कई बार हमारी बातें सामेन वाले को चुभ सकती हैं। एक बार मुंह से निकलने के बाद आप उन्हें वापस नहीं ले सकते। आप गुस्सा हो सकते हैं, असहमति जता सकते हैं, लेकिन ऐसी बातें न कहें जो दूसरे को ठेस पहुंचाएं।

साथ आने से पहले साथ रहें

आज के दौर में लिव-इन रिलेशनशिप पर भले ही बहस होती हो, लेकिन शर्मिला टैगोर ने खुलासा किया कि शादी से पहले सहूलियत के लिए वे दोनों साथ रहते थे। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, "शुरुआत में मैं बहुत खराब हाउसकीपर थी। घर में कुछ ठीक से नहीं चलता था, इसलिए टाइगर को नहाने के लिए 'क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया' जाना पड़ता था। हालांकि, समय के साथ मैंने घर संभालना सीखा।"

साथी को बदलने की जगह अपनाना

शर्मिला ने शेयर किया कि टाइगर का सेंस ऑफ ह्यूमर और उनकी सौम्यता ही वह वजह थी जिससे उन्हें लगा कि यह व्यक्ति कभी उन्हें जानबूझकर चोट नहीं पहुंचाएगा। किसी भी रिश्ते में साथी को बदलने की कोशिश करने के बजाय उसकी कमियों के साथ स्वीकार करना ही रिश्ते की नींव मजबूत करता है।

रिश्तों में क्यों जरूरी है 'एक्सेप्टेंस' और 'इमोशनल सेफ्टी'?

मनोवैज्ञानिक भी मानते हैं कि लंबे समय तक चलने वाले रिश्तों में एक-दूसरे को स्वीकार करना सबसे अहम होता है। जब पार्टनर को यह महसूस होता है कि उसे सुधारा नहीं जा रहा, बल्कि स्वीकार किया जा रहा है, तो रिश्ते में मानसिक सुरक्षा बनती है। अलग-अलग विचारों के बावजूद एक-दूसरे के प्रति सम्मान बनाए रखना ही मजबूत रिश्तों की पहचान है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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