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पूनम के चांद पर शायरी: मिरे रब चांद पूनम का जरा चौरस ही कर दे तू, गोलाई देखता हूं मैं तो रोटी याद आती है

Poonam Ke Chand Par Shayari: पूनम की उजली रात मानो दिल को राहत देती है और आत्मा को छू जाती है। यही कारण है कि कई कवि, शायर और संतों ने पूर्णिमा को अपनी रचनाओं में प्रेम और प्रकाश का प्रतीक माना है।

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पूर्णिमा के चांद पर शायरी, पूनम का चांद शायरी (Photo: AI Image)

Poonam Ka Chand Shayari in Hindi (पूनम के चांद पर शायरी): पूर्णिमा या पूनम हर महीने की वह रात होती है जब चांद अपने पूरे शबाब पर होता है। वह पूरी तरह गोल और चमकदार नजर आता है। पूर्णिमा की रात को चांद की रोशनी धरती को शीतलता और सुकून देती है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर पूर्णिमा का एक खास नाम और महत्व होता है – जैसे गुरु पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा आदि। पूर्णिमा न सिर्फ शरीर और मन को शांति देती है, बल्कि इसे आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी श्रेष्ठ माना गया है। चांद की ये उजली रात मानो दिल को राहत देती है और आत्मा को छू जाती है। यही कारण है कि कई कवि, शायर और संतों ने पूर्णिमा को अपनी रचनाओं में प्रेम और प्रकाश का प्रतीक माना है। आइए पढ़ें पूर्णिमा/पूनम पर लिखे चंद मशहूर शेर:

1. आसमान के एक सुनसान गोशे में

पूनम का ठिठुरता हुआ कोई चाँद जैसे

- परवेज़ शहरयार

2. सूरज तो ए'तिबार के क़ाबिल नहीं रहा

ऐ पूर्निमा की रात मिरे साथ साथ चल

- लकी फ़ारुक़ी हसरत

3. बारा चांद गए पूनम के प्यार भरा इक सावन भी

गए दिनों में साल भी गुज़रा और गया कुछ जीवन भी

- विजय शर्मा

4. आएगी जब बसंत-पूर्णिमा

मैं किसी का 'शबाब' लिक्खूंगा

- मुईन शादाब

5. मिरे रब चांद पूनम का ज़रा चौरस ही कर दे तू

गोलाई देखता हूं मैं तो रोटी याद आती है

- मुसव्विर फ़िरोज़पुरी

6. जो अमावस की रात में चमके वो जुगनू

पूर्निमा के चांद पे भारी होता है

- मुईन शादाब

7. पूनम की शब का चांद जो खिड़की पे आ गया

कमरे में मेरे यादों के गेसू बिखर गए

- मनोज एहसास

8. मिटा दें तीरगी को रौशनी बन जाएं हम दोनों

सरासर पूर्णिमा की चांदनी बन जाएं हम दोनों

- सीमा फ़रीदी

9. पूनम के बाद देखा नहीं सात दिन उसे

मैं ने सुना है रूठ कर आधा हुआ है चांद

- माधो नूर

10. शरद की पूर्णिमा में ताज का हुस्न

बड़ा दिलकश बहुत प्यारा लगे है

- वक़ार सिद्दीक़ी

11. चांद ने मेरे चखाया मुझ को

ऐन पूनम में अमावस का मज़ा

- मुज़्तर मजाज़

उम्मीद करते हैं कि आपको ये शेर जरूर पसंद आए होंगे। पसंद आना लाजमी भी है, क्योंकि इन शायरियों में नगमानिगारों ने बेहद खूबसूरती से पूर्णिमा और पूनम के चांद का फलसफा बताया है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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