नवरात्रि का पर्व शुरु हो रहा है। पूरे नौ दिन देवी दुर्गा की आराधना के साथ ही नारी को भी पूजा जाएगा। नारी को कभी ममता की मूर्ति कहा गया, कभी प्रेरणा की ज्योति तो कभी संघर्ष की मिसाल। बात शायरों की तरें तो उन्होंने औरत को कभी मोहब्बत का चेहरा बनाया, कभी दर्द का आईना और कभी हिम्मत की पहचान। गालिब से फैज़ और फिर आधुनिक दौर तक के शायरों की कलम ने औरत के हर रूप को उकेरा है। शायरी में औरत न सिर्फ खूबसूरती और मोहब्बत की निशानी है, बल्कि उम्मीद, साहस और बदलाव की प्रतीक भी है। आइए पढ़ें औरत पर लिखे चंद मशहूर शेर:
1.बताऊं क्या तुझे ऐ हम-नशीं किस से मोहब्बत है
मैं जिस दुनिया में रहता हूं वो इस दुनिया की औरत है
- असरार-उल-हक़ मजाज़
2. एक औरत से वफ़ा करने का ये तोहफ़ा मिला
जाने कितनी औरतों की बद-दुआएं साथ हैं
- बशीर बद्र
3. औरत के ख़ुदा दो हैं हक़ीक़ी ओ मजाज़ी
पर उस के लिए कोई भी अच्छा नहीं होता
- ज़ेहरा निगाह
4. मिट्टी पे नुमूदार हैं पानी के ज़ख़ीरे
इन में कोई औरत से ज़ियादा नहीं गहरा
- सरवत हुसैन
5. कौन बदन से आगे देखे औरत को
सब की आंखें गिरवी हैं इस नगरी में
- हमीदा शाहीन
6. तू आग में ऐ औरत ज़िंदा भी जली बरसों
सांचे में हर इक ग़म के चुप-चाप ढली बरसों
- हबीब जालिब
7. औरत को समझता था जो मर्दों का खिलौना
उस शख़्स को दामाद भी वैसा ही मिला है
- तनवीर सिप्रा
8. अभी रौशन हुआ जाता है रस्ता
वो देखो एक औरत आ रही है
- शकील जमाली
9. औरत अपना आप बचाए तब भी मुजरिम होती है
औरत अपना आप गंवाए तब भी मुजरिम होती है
- नीलमा नाहीद दुर्रानी
10. औरत हूं मगर सूरत-ए-कोहसार खड़ी हूं
इक सच के तहफ़्फ़ुज़ के लिए सब से लड़ी हूं
- फ़रहत ज़ाहिद
11. तुम भी आख़िर हो मर्द क्या जानो
एक औरत का दर्द क्या जानो
- सय्यदा अरशिया हक़
12. औरत हो तुम तो तुम पे मुनासिब है चुप रहो
ये बोल ख़ानदान की इज़्ज़त पे हर्फ़ है
- सय्यदा अरशिया हक़
13. है कामयाबी-ए-मर्दां में हाथ औरत का
मगर तू एक ही औरत पे इंहिसार न कर
- अज़ीज़ फ़ैसल
14. माना जीवन में औरत इक बार मोहब्बत करती है
लेकिन मुझ को ये तो बता दे क्या तू औरत ज़ात नहीं
- क़तील शिफ़ाई
शारदीय नवरात्रि के खास मौके पर आप भी अपनी ऑफिस कलीग या फिर घर परिवार की महिलाओं को इन शायरियों से स्पेशल फील करा सकते हैं।
