लाइफस्टाइल

Jur Sital Wishes: जुड़ शीतल की हार्दिक शुभकामनाएं, ऐसे दें जुड़ शीतल की बधाई - देखें विशेज, कोट्स, मेसेज, शायरी

Jur Sital Wishes, Jur Sital ki hardik shubhkamnaye: आज15 अप्रैल को जुड़ शीतल मनाया जा रहा है। यहां से आप इस पर्व के बधाई संदेश, कोट्स, शायरी, हार्दिक शुभकामनाएं आदि देख सकते हैं।

Image

जुड़ शीतल और मैथिल नववर्ष के शुभकामना संदेश

Jur Sital Wishes, Jur Sital ki hardik shubhkamnaye: भारत विविध परंपराओं और सांस्कृतिक नववर्षों का देश है। इसी श्रृंखला में बिहार और मिथिला क्षेत्र का बेहद खास पर्व है जुड़ शीतल (Jur Sital), जिसे मैथिल नववर्ष के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व केवल कैलेंडर बदलने का नहीं, बल्कि जीवन में शांति, संतुलन और प्रकृति से जुड़ाव का संदेश देने वाला उत्सव माना जाता है।

जुड़ शीतल और मैथिल नववर्ष के शुभकामना संदेश

1. जुड़ शीतल और मैथिल नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

आपके जीवन में शांति, सुख और समृद्धि बनी रहे।

2. नई शुरुआत, नई ऊर्जा और खुशियों की ठंडक लेकर आए

जुड़ शीतल का यह पावन पर्व। शुभकामनाएं!

3. जुड़ शीतल की शीतलता आपके मन को सुकून दे,

नया साल खुशियों से भर दे। हार्दिक बधाई!

4. मिथिला की परंपरा, संस्कृति और प्रेम का पर्व

जुड़ शीतल आपके जीवन में आनंद लाए। शुभकामनाएं।

5. जल की शीतलता, रिश्तों की मिठास और जीवन में नई शुरुआत —

जुड़ शीतल एवं मैथिल नववर्ष की मंगलकामनाएं।

6. नया साल नई उम्मीदें लेकर आए,

हर दिन खुशियों से भर जाए।

जुड़ शीतल की हार्दिक शुभकामनाएं।

7. सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली का संदेश लाया है

जुड़ शीतल का पावन पर्व। आपको ढेरों शुभकामनाएं।

8. मिथिला की संस्कृति की खुशबू और प्रेम का संदेश —

जुड़ शीतल आपके जीवन को मंगलमय बनाए।

9. शीतल मन, मधुर संबंध और खुशहाल जीवन की कामना के साथ

जुड़ शीतल एवं मैथिल नववर्ष की शुभकामनाएं।

10. जुड़ शीतल का पावन पर्व आपके घर में सुख, शांति और समृद्धि लाए।

मैथिल नववर्ष की हार्दिक बधाई!

जुड़ शीतल 2026 कब है बिहार में

मिथिला परंपरा के अनुसार जुड़ शीतल हर वर्ष सत्तुआनी या मेष संक्रांति के अगले दिन मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व 15 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस दिन से मैथिल पंचांग का नया साल शुरू होता है और वैशाख महीने का स्वागत किया जाता है।

भारत के अलग-अलग हिस्सों में इसी समय कई सौर नववर्ष मनाए जाते हैं - जैसे बैसाखी, पुथांडु, बोहाग बिहू और पोहेला बैसाख लेकिन मिथिला में नए साल की पहचान जुड़ शीतल से होती है।

जुड़ शीतल क्यों मनाया जाता है

‘जुड़’ का अर्थ है ठंडक और ‘शीतल’ का मतलब शांति। यह पर्व गर्मी की शुरुआत में शरीर, मन और प्रकृति को शीतल रखने का संदेश देता है। माना जाता है कि जैसे प्रकृति नए मौसम में प्रवेश करती है, वैसे ही इंसान भी अपने विचारों और व्यवहार में नई शुरुआत करे। इस दिन लोग पुराने तनाव छोड़कर रिश्तों में मधुरता लाने की कामना करते हैं।

मिथिला संस्कृति में यह केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक और पारिवारिक उत्सव भी है, जिसमें परिवार, परंपरा और प्रकृति तीनों का सुंदर संगम दिखाई देता है।

जुड़ शीतल पर पानी से आशीर्वाद देने की परंपरा

जुड़ शीतल की सबसे खास परंपरा है - पानी का आशीर्वाद। सुबह घर के बड़े सदस्य बच्चों के सिर पर पानी छिड़कते हैं और उन्हें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। इसके पीछे प्रतीकात्मक संदेश है कि जीवन में शीतलता, संयम और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे। युवा भी बड़ों के चरणों पर जल अर्पित कर सम्मान व्यक्त करते हैं। नेपाल और मिथिला क्षेत्र के कई इलाकों में लोग एक-दूसरे पर पानी छिड़ककर नववर्ष का स्वागत करते हैं।

Medha Chawla
मेधा चावला author

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वा... और देखें

End of Article