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रिश्तेदारों की कड़वी बातों का कैसे दें जवाब? गुरु गौरांग दास की ये 3 टिप्स काम बनाएंगी आसान

परिवार या रिश्तेदार में कई बार ऐसे लोग मिल जाते हैं, जो अक्सर अनचाही राय देते हैं। ऐसे लोगों को कैसे जवाब दिया ये आपको गुरु गौरांग दास से सीखना है। आइए जानते हैं उनके बताए 3 आसान टिप्स...

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गुरु गौरांग दास के टिप्स

Guru Gauranga Das Tips: हर परिवार में एक-दो ऐसे रिश्तेदार जरूर होते हैं जो बिना मांगी सलाह देने, ताने मारने या आपकी निजी जिंदगी पर सवाल उठाने से कभी नहीं चूकते है। उनके द्वारा अक्सर पूछे जाने वाले सवालों में 'शादी कब करोगे?', 'इतनी सैलरी में कैसे चलेगा?', 'बच्चों की प्लानिंग कब है?' जैसे सवाल कई बार बातचीत से ज्यादा मानसिक तनाव का कारण बन जाते हैं। ऐसी परिस्थितियों में अक्सर लोग गुस्से में बहस कर बैठते हैं, लेकिन इससे समस्या कम होने की बजाय और बढ़ जाती है। यदि आप भी अपने रिश्तेदारों के ऐसे सवालों से परेशान हैं, तो आपरो मोटिवेशनल स्पीकर और लाइफ कोच गुरु गौरांग दास की बातों को मानना चाहिए। उनके मुताबिक टॉक्सिक बातचीत का सबसे अच्छा जवाब बहस नहीं, बल्कि समझदारी से दिया गया छोटा और शांत जवाब होता है। आइए जानते हैं उनके बताए तीन आसान तरीके जो बिना रिश्ते (Relationship Advice) बिगाड़े ऐसी बातचीत को खत्म करने में मदद कर सकते हैं।

'हां-हां, देखते हैं' बोलकर बात खत्म करें

अगर कोई रिश्तेदार बार-बार आपकी जिंदगी को लेकर अनचाही सलाह दे रहा है और आपको महसूस हो रहा है कि बातचीत बेवजह लंबी होती जा रही है, तो 'हां-हां, देखते हैं' जैसा छोटा जवाब काफी असरदार साबित हो सकता है। इस जवाब का फायदा यह है कि सामने वाले को विरोध भी नहीं मिलता और उसे यह संकेत भी मिल जाता है कि आप इस विषय पर आगे चर्चा नहीं करना चाहते हैं। इस तरह आपकी न बहस होती है, न माहौल खराब होता है और बात भी आसानी से वहीं खत्म हो जाती है।

'आप सही कह रहे हैं' से थम सकती है बहस

आपको यह समझ लेना चाहिए कि हर सलाह का जवाब देना जरूरी नहीं होता है। कई बार सामने वाला सिर्फ अपनी बात मनवाना चाहता है। ऐसी स्थिति में 'आप सही कह रहे हैं' या 'बिल्कुल सही बोल रहे हैं' जैसा जवाब माहौल को शांत करने और आपकी बहस को थाम सकता है। गुरु गौरांग दास कहते हैं कि जब सामने वाले को यह महसूस हो जाता है कि उसकी बात सुन ली गई है, तो वह अक्सर उसी विषय पर ज्यादा देर तक चर्चा नहीं करता है। यह तरीका आपकी मानसिक शांति भी बनाए रखता है और अनावश्यक विवाद से भी बचाता है।

अच्छा... भी है बड़ा स्मार्ट जवाब

एक छोटा-सा शब्द 'अच्छा' कई बार आपको लंबी बहस से बचाने का सबसे आसान तरीका बन सकता है। इसकी खासियत यह है कि इसे अलग-अलग भाव के साथ बोला जा सकता है। जब कोई रिश्तेदार लगातार अपनी राय थोपने की कोशिश करे, तो सिर्फ "अच्छा... अच्छा" कहकर बात आगे बढ़ा दें। इससे सामने वाले को वह प्रतिक्रिया नहीं मिलती जिसकी उसे उम्मीद होती है और बातचीत अपने आप समाप्त होने लगती है।

बहस से बचना क्यों है जरूरी

गुरु गौरांग दास की मानें तो टॉक्सिक लोगों का उद्देश्य अक्सर समाधान निकालना नहीं होता, बल्कि वह अपने सामने वाले से प्रतिक्रिया चाहते हैं। ऐसे में यदि आप गुस्से में जवाब देते हैं, तो वही बात आगे बढ़ती है और रिश्तों में और अधिक तनाव पैदा हो सकता है।

ऐसे लोगों के साथ हर बात साबित करने की कोशिश करना आपकी मानसिक ऊर्जा और समय दोनों की बर्बादी है। इसलिए बेहतर यही है कि कम शब्दों में जवाब देकर अपनी मानसिक शांति को बनाए रखें।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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