उबलते समय दूध तेजी से ऊपर उठता है और अचानक बर्तन से बाहर निकल जाता है। यह सिर्फ गर्मी नहीं, बल्कि इसके अंदर मौजूद तत्वों की अलग-अलग प्रतिक्रिया का नतीजा है।
दूध एक जटिल तरल है। इसमें फैट की परत, प्रोटीन और पानी मिलकर ऐसा ढांचा बनाते हैं, जो उबलते समय झाग को ऊपर की ओर धकेल देता है।
उबाल आने पर दूध के ऊपर झाग की परत बनती है। यह परत भाप को बाहर निकलने नहीं देती, जिससे दबाव बढ़ने लगता है।
जब झाग के नीचे जमा भाप रास्ता नहीं पाती, तो अचानक दूध को ऊपर उठाकर बाहर फेंक देती है। यही वजह है कि दूध उबलकर बह जाता है।
पानी में फैट या प्रोटीन नहीं होते, इसलिए झाग की कोई परत नहीं बनती। भाप आसानी से बाहर निकलती है और पानी शांत तरीके से उबलता रहता है।
पानी 100°C पर स्थिर होकर उबलता है, लेकिन दूध में मौजूद तत्वों की वजह से तापमान बदलते ही उसकी संरचना बार-बार प्रतिक्रियाएं देती रहती है। इससे उबाल ज्यादा तीव्र हो जाता है।
बर्तन की सतह पर लकड़ी का चम्मच रखें या धीमी आंच करें। इससे झाग टूटता रहता है और भाप आसानी से निकलती है, जिससे दूध बाहर नहीं आता।