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EVM में कब आया NOTA का विकल्प, भारत में कैसे हुई इसकी शुरुआत?

NOTA: अगर आपकी उम्र 18 साल या फिर उससे अधिक है और आप अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर चुके हैं तो ईवीएम में मौजूद NOTA के विकल्प से वाकिफ होंगे। अगर आप इस विकल्प से परिचित नहीं हैं तो कोई बात नहीं। इस आर्टिकल में नोटा के बारे में आपको सबकुछ मिलेगा। जैसे- नोटा की शुरुआत कब हुई थी? इत्यादि

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कब हुई थी नोटा की शुरुआत?

Photo : iStock

NOTA: देशभर में उत्साह के साथ लोकतंत्र का पर्व मनाया जा रहा है। चुनाव आयोग कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता के साथ लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया को पूरा करने में जुटा हुआ है। वहीं, जनता भी बढ़-चढ़कर अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रही है। जनता अपने पसंदीदा उम्मीदवारों का चयन करती है और उसके पक्ष में मतदान करती है, लेकिन कुछ लोगों को अपने क्षेत्र के प्रत्याशी पसंद नहीं आते हैं तो ऐसे में NOTA के विकल्प का इस्तेमाल होता है।

दरअसल, चुनाव आयोग द्वारा एक ऐसी व्यवस्था की गई है कि अगर किसी व्यक्ति को अपने क्षेत्र का किसी भी पार्टी का कोई उम्मीदवार पसंद नहीं आता है तो वह NOTA (None of the Above) को वोट दे सकता है। NOTA का मतलब- इनमें से कोई नहीं है।

देश में कैसे आया NOTA?

भारत में साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद नोटा की शुरुआत हुई। पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज बनाम भारत सरकार (People's Union Of Civil Liberties Vs Union Of India) के केस में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला सुनाया था। इस फैसले में कोर्ट ने चुनाव आयोग को जनता के लिए नोटा का विकल्प उपलब्ध कराने का आदेश दिया था।

EVM

ईवीएम और नोटा

कब हुई थी NOTA की शुरुआत?

इसके बाद देश में मतदाताओं को पहली बार 2013 के विधानसभा चुनावों में नोटा का विकल्प मुहैया कराया गया। नोटा बटन की बदौलत मतदाताओं को किसी उम्मीदवार को मत न देने का विकल्प भी मिल गया। आसान शब्दों में कहें तो इनमें से कोई नहीं का विकल्प मिल गया।

किस राज्य में पहली बार हुआ था नोटा का इस्तेमाल?

नोटा का इस्तेमाल पहली बार चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में हुआ था। जिनमें मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम और दिल्ली शामिल है। दिल्ली एकमात्र केंद्रशासित प्रदेश है, जहां के मतदाताओं को सबसे पहले नोटा के बटन का विकल्प मिला था।

VOTE

नोटा का विकल्प

क्या गिने जाते हैं NOTA में डाले जाने वाले वोट?

यह सवाल अक्सर पूछा जाता है कि क्या नोटा में डाले जाने वाले वोट गिने जाते हैं। अगर आप चुनावों पर अपनी नजर बनाकर रखते हैं तो आपको इसका जवाब पता ही होगा, लेकिन अगर आपने ध्यान नहीं दिया तो आपको बता दें कि नोटा में पड़ने वाले वोटों की गिनती होती है। दरअसल, नोटा में पड़ने वाले वोट 'अमान्य वोट' के तौर पर देखे जाते हैं। ऐसे में चुनाव के नतीजों पर NOTA का कोई असर नहीं पड़ता है।

Anurag Gupta
अनुराग गुप्ताauthor

अनुराग गुप्ता टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और मीडिया में 9 वर्षों का अनुभव रखते हैं। जर्नलिज़्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से ही वे न्यूजरूम के विभिन्न आयामों—कॉपी एडिटिंग, कंटेंट क्यूरेशन और रियल-टाइम न्यूज मॉनिटरिंग में दक्षता के साथ काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और ब्रेकिंग न्यूज पर उनकी मजबूत पकड़ है। अनुराग खबरों की बारीकियों को समझने, फैक्ट चेकिंग और स्टोरी के अहम पहलुओं को पाठकों तक सरल भाषा में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अब तक 10 हजार से अधिक खबरें प्रकाशित की हैं, जिनमें ब्रेकिंग अपडेट्स, एनालिटिकल कंटेंट, स्पेशल स्टोरीज और न्यूज एक्सप्लेनर्स शामिल हैं।

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