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कार्यस्थल पर ऐसे पुरुष होते हैं अकेलेपन का शिकार; हालिया शोध में सामने आई हैरान करने वाली बात, पढ़ें

Loneliness: मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य एक-दूसरे से जुड़ा रहता है और यह लगभग हर कोई मानता है कि अलग-अलग समय पर अकेलापन हर किसी को प्रभावित करता है। यूं तो अकेलेपन को लेकर कई शोध भी सामने आ चुके हैं, लेकिन कामकाजी पुरुषों में अकेलापन ज्यादा देखा गया है। इसको लेकर एक शोध सामने आया है।

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अकेलेपन के शिकार पुरुष

Photo : iStock
KEY HIGHLIGHTS
  • महिलाओं से ज्यादा अकेलेपन के शिकार होते हैं पुरुष!
  • अकेलेपन को लेकर हो चुकी है कई शोध

Loneliness: अकेलापन हर किसी को अलग-अलग समय पर प्रभावित करता है। ऐसे में अकेलेपन को लेकर एक शोध सामने आई है जिसने हर किसी को आर्श्चयचकित कर दिया। यूं तो पुरुषों में भावनाओं के बारे में बात करने और मदद लेने की संभावना महिलाओं की तुलना में कम होती है और कई शोध में यह साबित भी हो चुका है।

सिडनी विश्वविद्यालय, मेलबर्न विश्वविद्यालय और यूनएसडब्लूय सिडनी के शोधकर्ता मार्ली बोवर, फर्डी बोथा और मार्क डेडी ने एक शोध में पाया कि 40 के दशक के अंत वाली उम्र के पुरुषों में अकेलापन सबसे अधिक था, लेकिन यह अन्य समय में भी होता था, जो अक्सर इस बात पर निर्भर करता था कि वे अपने करियर और आय को कैसे देखते हैं। इससे पता चलता है कि कार्यस्थल और काम के आसपास की सामाजिक अपेक्षाएं पुरुषों के अकेलेपन के अनुभवों में महत्वपूर्ण हैं।

अकेलेपन को मापना

शोधकर्ताओं के निष्कर्ष ऑस्ट्रेलिया में घरेलू, आय और श्रम गतिशीलता (HILDA) सर्वेक्षण के लिए 19 वर्षों से अधिक समय से एकत्र किए गए 15 से 98 वर्ष की आयु के 12,117 ऑस्ट्रेलियाई पुरुषों के वार्षिक डेटा के विश्लेषण पर आधारित हैं।

शोधकर्ताओं ने एक प्रश्न पर पुरुषों की प्रतिक्रियाओं की जांच करके अकेलेपन को मापा, जिसमें पूछा गया था कि क्या वे इस कथन से सहमत हैं: "मैं अक्सर बहुत अकेला महसूस करता हूं"। प्रतिक्रियाएं एक अंक (पूरी तरह असहमत) से लेकर सात अंक (पूरी तरह सहमत) तक थीं।

फिर शोधकर्ताओं ने यह सुनिश्चित करने के लिए सांख्यिकीय तकनीकों का उपयोग किया कि हम अकेलेपन को माप रहे हैं, न कि सामाजिक अलगाव जैसी समान संरचनाओं को।

शोधकर्ताओं ने उन तरीकों का भी इस्तेमाल किया, जिन्होंने जांच की कि पुरुषों का अकेलापन उनके सामाजिक रिश्तों के कारण, उनके जीवन के अन्य पहलुओं, जैसे कि उनके रहने की स्थिति या उनके काम करने की व्यवस्था के कारण कितना था।

कार्य की भूमिका

यह देखते हुए कि अकेलापन एक सामाजिक समस्या है। शोधकर्ताओं को पुरुषों के सामाजिक रिश्तों में समस्याएं पाकर आश्चर्य नहीं हुआ, खासकर उनके रोमांटिक रिश्ते, दोस्ती और पारिवारिक रिश्ते अकेलेपन से जुड़े थे। हालांकि, शोधकर्ताओं को यह देखकर आश्चर्य हुआ कि काम ने भी अहम भूमिका निभाई।

जो पुरुष बेरोजगार थे या असुरक्षित नौकरियों में थे, उन्होंने स्थिर रोजगार वाले लोगों की तुलना में अधिक अकेलेपन का अनुभव किया। नौकरी छूटने से किसी व्यक्ति की पहचान प्रभावित हो सकती है और काम द्वारा आमतौर पर प्रदान किए जाने वाले सामाजिक संपर्क सीमित हो सकते हैं।

Loneliness Men

अकेलेपन के शिकार पुरुष

बेरोजगारी भी आय को सीमित करती है, जिससे सामाजिक गतिविधियों का खर्च उठाना कठिन हो जाता है। असुरक्षित "गिग" कार्य, अक्सर अप्रत्याशित और अकेले बिताए गए लंबे घंटों के कारण, कार्य-जीवन संतुलन को बाधित करता है और लोगों को अलग-थलग कर सकता है।

सामाजिक अपेक्षाएं भी जिम्मेदार

शोध बताता है कि सामाजिक अपेक्षाएं भी कुछ पुरुषों के लिए अकेलेपन को बदतर बनाती हैं। हमने उस डिग्री को मापा कि पुरुष इस कथन से किस हद तक सहमत थे: "अगर महिला पुरुष से अधिक कमाती है तो यह रिश्ते के लिए अच्छा नहीं है"।

पुरुष (विशेष रूप से मध्यम आयु वर्ग के पुरुष) जो मानते थे कि उन्हें घर में मुख्य कमाने वाला होना चाहिए, ऐसा न मानने वाले लोगों की तुलना में अधिक अकेले थे। इससे पता चलता है कि विषमलैंगिक रिश्तों के संदर्भ में काम के बारे में पारंपरिक विचार सामाजिक संबंधों के लिए हानिकारक हो सकते हैं।

अकेलेपन को दूर करने का तरीका

पुरुषों के अकेलेपन को कम करने का एकमात्र तरीका पुरुषों के व्यक्तिगत संबंधों में सुधार करना है। कार्य क्षेत्र और कार्य के आसपास के सामाजिक दबावों को भी अनुकूल बनाना चाहिए।

सामाजिक मानदंडों में बदलाव

सार्वजनिक रूढ़िवादिता जो पुरुषों को घरेलू आय के लिए पूरी तरह जिम्मेदार महसूस कराती हैं, उसे बदलने की जरूरत है। सार्वजनिक जागरूकता और शिक्षा अभियान ज्ञान और जागरूकता का निर्माण करके लिंग मानदंडों और रूढ़िवादिता को बदलने में मदद कर सकते हैं और इसलिए अकेलेपन को कम कर सकते हैं।

पुरुषों को बेहतर कार्य-जीवन संतुलन प्राप्त करने में मदद करने से हर किसी को मदद मिल सकती है। हालांकि, इस तरह के बदलाव के लिए प्रमुख सांस्कृतिक बदलाव की आवश्यकता होती है जिसमें समय लगता है। एक अल्पकालिक समाधान, विशेष रूप से सेवानिवृत्ति की आयु वाले पुरुषों के लिए स्वयंसेवा करना है।

स्वयंसेवा सामाजिक मेलजोल के लिए उद्देश्य और अवसर प्रदान करती है। हालांकि, हाल के साक्ष्यों से पता चलता है कि स्वयंसेवा पूर्व-कोविड स्तरों पर वापस नहीं आई है।

शोध में पता चला है कि नौकरी की असुरक्षा और बेरोजगारी दर पुरुषों में अकेलेपन को बढ़ाती हैं। सरकारों को पुरुषों के हितों को ध्यान में रखकर नीतियों पर फोकस करना चाहिए।

कंपनियां कैसे कर सकती हैं मदद

एक हालिया समीक्षा से पता चला है कि कंपनियां कार्यस्थल पर अकेलेपन को कम करने के लिए बहुत कुछ कर सकती हैं।

  • सामाजिक जुड़ाव के अवसर पैदा करें।
  • वर्क लाइफ बैलेंस को प्रोत्साहित करें।
  • कर्मचारियों पर केंद्रित संस्कृति को बढ़ावा दें।

(इनपुट: भाषा)

Anurag Gupta
अनुराग गुप्ताauthor

अनुराग गुप्ता टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और मीडिया में 9 वर्षों का अनुभव रखते हैं। जर्नलिज़्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से ही वे न्यूजरूम के विभिन्न आयामों—कॉपी एडिटिंग, कंटेंट क्यूरेशन और रियल-टाइम न्यूज मॉनिटरिंग में दक्षता के साथ काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और ब्रेकिंग न्यूज पर उनकी मजबूत पकड़ है। अनुराग खबरों की बारीकियों को समझने, फैक्ट चेकिंग और स्टोरी के अहम पहलुओं को पाठकों तक सरल भाषा में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अब तक 10 हजार से अधिक खबरें प्रकाशित की हैं, जिनमें ब्रेकिंग अपडेट्स, एनालिटिकल कंटेंट, स्पेशल स्टोरीज और न्यूज एक्सप्लेनर्स शामिल हैं।

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