नॉलेज

ऐसा कैसे! धरती में है 'नर्क का द्वार', जहां 50 सालों से धधक रही आग

Door to Hell: तुर्कमेनिस्तान के काराकुम रेगिस्तान में दरवाजा गांव के पास एक विशाल गड्ढा है जहां पर दशकों से आग धधक रही है। यह गड्ढा 69 मीटर चौड़ा और 30 मीटर गहरा है। ​दुनियाभर से पर्यटक नर्क का द्वार देखने के लिए आते हैं। काराकुम रेगिस्तान के उत्तर में धधक रही यह आग इतनी तेज है कि रात के समय कई किमी दूर से इसकी रोशनी दिखाई देती है।

Image

नर्क का द्वार कहां है?

Photo : iStock

Door to Hell: स्वर्ग और नर्क, दोनों के ही बारे में हमें बचपन से कहानियां सुनने को मिल रही हैं। अमूमन यह कहा जाता है कि आपके अच्छे कर्म आपको स्वर्ग और बुरे कर्म आपको नर्क लेकर जाएंगे। कई बार को लोग यह भी कहते हैं कि जैसे तुम्हारे कर्म हैं, तुम नर्क में जलोगे। हालांकि, इन दोनों जगहों को किसी ने नहीं देखा है, लेकिन हम आपको नर्क के द्वार की कहानी जरूर बता सकते हैं।

कहां है नर्क का द्वार?

नर्क का द्वार तुर्कमेनिस्तान के काराकुम रेगिस्तान में दरवाजा गांव के पास स्थित है। तुर्कमेनिस्तान पहले सोवियत संघ का हिस्सा हुआ करता था, लेकिन सोवियत संघ के विघटन के बाद यह अलग राष्ट्र बन गया। खैर तुर्कमेनिस्तान पर फिर कभी बात करें। आज काराकुम रेगिस्तान में स्थित 69 मीटर चौड़े और 30 मीटर गहरे गड्ढे पर विस्तार से बात करेंगे जहां पिछले कई वर्षों से आग धधक रही है।

Darvaza_Gas_Crater

नर्क का द्वार

गड्ढे में दशकों से धधक रही आग को ही दुनिया भर में 'नर्क का द्वार' कहा जाता है, क्योंकि इसे देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानों जिस शैतान के बारे में हमने कहानियों में सुना था वह हथियार लेकर बाहर निकल रहा हो। इस जगह की आग दशकों से नहीं बुझी है और लगातार जल रही है।

Door To Hell

तुर्कमेनिस्तान में नर्क का द्वार

क्या है असल कहानी

70 के दशक में सोवियत संघ के भूविज्ञानी काराकुम के रेगिस्तान में कच्चे तेल की खोज कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें यहां पर गैस का भंडार मिला। यह वो दौर था जब नेचुरल गैस निकालने की होड़ हुआ करती थी, लेकिन खोज के दौरान इलाके की जमीन धंस गई और यहां पर गड्ढे बन गए। जिससे मीथेन गैस का रिसाव होने लगा। ऐसे में भूविज्ञानियों को मीथेन गैस के रिसाव को रोकने का एक तरीका सूझा।

गड्ढे में कैसे लगी आग?

दरअसल, भूविज्ञानियों को लगा कि गड्ढे से रिसाव हो रही मीथेन गैस में अगर आग लगा दी जाए तो यह वातावरण में नहीं फैलेगी। ऐसे में भूविज्ञानियों ने गड्ढे में आग लगा दी। उन्हें लगा कि मीथेन गैस कुछ हफ्तों में समाप्त हो जाएगी और आग खुद-ब-खुद बुझ जाएगी, लेकिन पांच दशक से यह आग लगातार धधक रही है।

Darvaza Gas Crater

नर्क का द्वार

नर्क का द्वार देखने आते हैं पर्यटक

दुनियाभर से पर्यटक नर्क का द्वार देखने के लिए आते हैं। काराकुम रेगिस्तान के उत्तर में धधक रही यह आग इतनी तेज है कि रात के समय कई किमी दूर से इसकी रोशनी दिखाई देती है। इस जगह को लेकर कई किवदंतियां भी हैं। कुछ लोग इस जगह को शापित मानते हैं।

Anurag Gupta
अनुराग गुप्ताauthor

अनुराग गुप्ता टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और मीडिया में 9 वर्षों का अनुभव रखते हैं। जर्नलिज़्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से ही वे न्यूजरूम के विभिन्न आयामों—कॉपी एडिटिंग, कंटेंट क्यूरेशन और रियल-टाइम न्यूज मॉनिटरिंग में दक्षता के साथ काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और ब्रेकिंग न्यूज पर उनकी मजबूत पकड़ है। अनुराग खबरों की बारीकियों को समझने, फैक्ट चेकिंग और स्टोरी के अहम पहलुओं को पाठकों तक सरल भाषा में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अब तक 10 हजार से अधिक खबरें प्रकाशित की हैं, जिनमें ब्रेकिंग अपडेट्स, एनालिटिकल कंटेंट, स्पेशल स्टोरीज और न्यूज एक्सप्लेनर्स शामिल हैं।

और पढ़ें
End of Article
Subscribe to our daily Newsletter!

संबंधित खबरें