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सागर की वो रहस्यमयी रेखा जिसे पार करने से डरते हैं जीव-जंतु, हैरान कर देगा Wallace Line का चौंकाने वाला फैक्ट

पृथ्वी और ब्रह्मांड के बनने की कहानी विज्ञान काफी हद तक समझ चुका है, लेकिन प्रकृति के कई रहस्य आज भी इंसानों के लिए पहेली बने हुए हैं। उन्हीं में से एक है समुद्र के बीच मौजूद एक अदृश्य सीमा, जिसे वॉलेस लाइन कहा जाता है। यह रहस्यमयी रेखा दक्षिण-पूर्व एशिया और ओशिनिया के जीव-जंतुओं की दुनिया को अलग करती है और इसके बारे में जानकर कोई भी हैरान रह जाता है।

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क्या है वैलेस लाइन? (फोटो: द ब्रिटिश लाइब्रेरी)

Wallace Line: वैज्ञानिक प्रमाणों के अनुसार, पृथ्वी का निर्माण लगभग 4.54 अरब साल पहले हुआ था, जिसमें 1% की अनिश्चितता मानी जाती है। यह सौर मंडल के निर्माण के दौरान गैस और धूल के जमने से बनी थी। वहीं, पूरे ब्रह्मांड की आयु लगभग 13.8 अरब वर्ष मानी जाती है। दुनिया बनी, इंसानों का अस्तित्व सामने आया लेकिन आज भी प्रकृति के कुछ ऐसे अनकहे रहस्य हैं, जिनका आम लोगों के लिए समझना बेहद कठिन हो जाता है। पर क्या आप सोच सकते हैं कि समुद्र में कोई ऐसी अदृश्य रेखा हो जिसे न पक्षी पार कर सकें और न ही जानवर? हां, यह सच है। समुद्र के बीचों-बीच ऐसी एक रेखा मौजूद है, जिसे पार करना जीव-जंतुओं के लिए लगभग असंभव माना जाता है। इसे वॉलेस लाइन (Wallace Line) कहा जाता है। यह रेखा दक्षिण-पूर्व एशिया और ओशिनिया के बीच भौगोलिक और जैविक रूप से एक महत्वपूर्ण विभाजन बनाती है। इसका नाम प्रसिद्ध ब्रिटिश प्रकृतिवादी अल्फ्रेड रसेल वॉलेस (Alfred Russel Wallace) के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने 19वीं शताब्दी के मध्य में इस अद्वितीय रेखा की खोज की थी। ऐसे में आइए जानें इस लाइन से जुड़े कुछ ऐसे दिलचस्प तथ्य जिसे जानकर आप दांतों तले उंगली दबा लेंगे।

Wallace Line showing the division between Asian and Australasian flora and fauna (Photo: Wallace, Alfred Russel; J. Arrowsmith)

एशियाई और ऑस्ट्रेलियाई वनस्पतियों और जीवों के बीच विभाजन को दिखाती वैलेस रेखा (फोटो: Wallace, Alfred Russel; J. Arrowsmith)

आखिर कहां मौजूद है वॉलेस लाइन (Wallace Line)

यह अदृश्य रेखा बोर्नियो (Borneo) और सुलावेसी (Sulawesi) के बीच, साथ ही बाली (Bali) और लोम्बोक (Lombok) के बीच से गुजरती है। वैलेस रेखा हिंद महासागर और प्रशांत महासागर में स्थित है। रेखा के पश्चिमी हिस्से में आपको एशियाई स्तनधारी जानवर मिलते हैं, जैसे बाघ, गैंडा और ओरंगुटान। जबकि इसके पूर्वी हिस्से में ऑस्ट्रेलिया और न्यू गिनी की तरह के जीव पाए जाते हैं, जैसे मार्सुपियल (कंगारू और पॉस्सम) और विभिन्न रंग-बिरंगे पक्षी, जिनमें खास तौर पर काकातुआ और अन्य कई प्रजातियां शामिल हैं।

क्या सच में वॉलेस लाइन पार नहीं करते जीव-जंतु?

इस रेखा की सबसे रोचक बात यह है कि अधिकतर जानवर और पक्षी इसे पार करते हुए दिखाई नहीं देते। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्यों होता है। हालांकि यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि कोई भी जीव इस सीमा को कभी पार नहीं करता। समय के साथ कुछ प्रजातियां इस रेखा के दोनों ओर पहुंचने में सफल भी हुई हैं और वहां बस भी गई हैं। फिर भी, वॉलेस रेखा दो अलग-अलग जैवभौगोलिक क्षेत्रों के बीच एक मजबूत प्राकृतिक सीमा की तरह काम करती है। इसी वजह से इन दोनों क्षेत्रों में जीव-जंतुओं का विकास अलग-अलग दिशाओं में हुआ और यहां की प्रजातियों में स्पष्ट अंतर देखने को मिलता है।

Do Animals Really Don't Cross Wallace Line? (Photo: Canva)

क्या जानवर सच में वैलेस लाइन पार नहीं करते? (फोटो: Canva)

क्या है वॉलेस लाइन का रोचक रहस्य

वॉलेस रेखा उन गहरे समुद्री गर्तों के समानांतर मानी जाती है, जो कभी एशिया और ऑस्ट्रेलिया के महाद्वीपीय शेल्फ (Continental Shelf) को अलग करते थे। इन गहरी समुद्री खाइयों की वजह से अतीत में दोनों क्षेत्रों के बीच भूमि पुल नहीं बन पाए, जिससे स्थलीय जीवों के लिए एक इलाके से दूसरे इलाके में जाना लगभग असंभव हो गया। दरअसल, एशियाई और ऑस्ट्रेलियाई टेक्टोनिक प्लेटें लाखों वर्षों तक एक-दूसरे से अलग रहीं। इसी लंबे अलगाव के कारण दोनों क्षेत्रों में वनस्पतियों और जीव-जंतुओं का विकास अलग-अलग तरीके से हुआ। बाद में जब ये प्लेटें धीरे-धीरे करीब आईं, तब भी यहां के जीव-जंतु काफी अलग बने रहे। इसके अलावा वॉलेस रेखा के दोनों ओर जलवायु और प्राकृतिक आवास में भी काफी अंतर पाया जाता है, जो कई प्रजातियों के लिए एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में फैलने को कठिन बना देता है।

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदी author

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अप... और देखें

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