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आंध्र प्रदेश की सियासत में गरमाया बिजली डील का मुद्दा, वाईएसआरसीपी ने नायडू सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने आंध्र प्रदेश की चंद्रबाबू नायडू की सरकार पर तीखा प्रहार किया है। पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी की पार्टी ने दावा किया कि नायडू सरकार की बिजली डील जनविरोधी सौदा है। आपको बताते हैं कि पार्टी ने क्या कुछ कहा।

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चंद्रबाबू नायडू की सरकार पर वाईएसआरसीपी का आरोप।

आंध्र प्रदेश की राजनीति में इन दिनों बड़ा घोटाले के मुद्दे ने जोर पकड़ रखा है। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार पर राज्य की जनता को ₹4.60 प्रति यूनिट की महंगी बिजली डील के जरिए 25 साल के आर्थिक बोझ में धकेलने का गंभीर आरोप लगाया है।

चंद्रबाबू नायडू सरकार पर वाईएसआरसीपी ने लगाए आरोप

वाईएसआरसीपी ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी की सरकार ने सेंट्रल पीएसयू SECI से ₹2.49 प्रति यूनिट पर 7,000 मेगावाट सौर ऊर्जा खरीदने का पारदर्शी करार किया था, जिससे राज्य को ₹1 लाख करोड़ की बचत होती। इसके विपरीत, वर्तमान सरकार ने Axis Energy से ₹4.60 प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदने का करार किया, जिसमें न कोई ओपन टेंडर था, न ही प्रतिस्पर्धी बोली।

वाईएसआरसीपी ने सरकार पर हमला बोलते हुए किया ट्वीट

वाईएसआरसीपी ने अपने ट्वीट में ये दावा किया है कि '₹2.49/unit बनाम ₹4.60/unit। जगन मोहन रेड्डी की पारदर्शी SECI डील ने आंध्र प्रदेश को ₹1 लाख करोड़ की बचत दी। वहीं, टीडीपी की गुपचुप Axis Energy डील से जनता का पैसा जलाया गया। 25 साल का बोझ जनता पर और प्राइवेट क्रोनियों के लिए जैकपॉट।'

पार्टी का कहना है कि यह डील आंध्र प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (APERC) द्वारा पहले खारिज कर दी गई थी, लेकिन राज्य सरकार ने धारा 108 का इस्तेमाल कर उन्हें निर्णय बदलने को मजबूर किया।

वाईएसआरसीपी ने इस सौदे की न्यायिक जांच की मांग की है और कहा है कि राज्य को फिर से SECI जैसे पारदर्शी माध्यमों से निविदाएं मंगवानी चाहिए। पार्टी प्रवक्ताओं ने इसे “नायडूनॉमिक्स का क्लासिक उदाहरण” करार दिया और सवाल उठाया कि जब ₹2.49 में बिजली संभव थी, तो ₹4.60 पर करार क्यों हुआ?

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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