Agnipath Scheme: सरकार द्वारा अग्निपथ योजना में बड़े बदलाव की घोषणा के बाद कारगिल युद्ध के नायक ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) खुशाल ठाकुर ने कहा कि यह फैसला उन लोगों की आवाज सुने जाने का संकेत है, जो लंबे समय से इस योजना की समीक्षा की मांग कर रहे थे। सरकार ने बुधवार को घोषणा की कि चार साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद सेना से बाहर होने वाले अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त सेवा विस्तार दिया जाएगा। इसके बाद निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाले अग्निवीरों को नियमित सैनिक के रूप में भर्ती किया जाएगा।
ब्रिगेडियर ठाकुर बोले, 75 फीसदी अग्निवीरों को रखा जाए
वर्ष 1999 में ऑपरेशन विजय के दौरान टाइगर हिल की लड़ाई लड़ने वाले 18 ग्रेनेडियर्स की कमान संभाल चुके ब्रिगेडियर ठाकुर ने बुधवार को कहा कि सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता बढ़ाने के लिए चार साल की सेवा के बाद 25 प्रतिशत के बजाय 75 प्रतिशत अग्निवीरों को बरकरार रखा जाना चाहिए। सेना के कुछ अन्य पूर्व अधिकारियों ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया। सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल दुष्यंत सिंह ने इसे अग्निवीर योजना का बेहतर स्वरूप बताया।
सैन्य भर्ती योजना में बड़े बदलाव के तहत सरकार ने घोषणा की है कि चार साल का कार्यकाल पूरा करने वाले अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त सेवा विस्तार दिया जाएगा। इसके बाद निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाले अग्निवीरों को नियमित सैनिक के रूप में भर्ती किया जाएगा।
रक्षा प्रमुख (CDS) जनरल एन एस राजा सुब्रमणि ने यह घोषणा प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा तीनों सेनाओं की विस्तृत समीक्षा के बाद की गई सिफारिशों को मंजूरी दिए जाने के तुरंत बाद की।
जून 2022 में शुरू की गई अग्निपथ योजना
जून 2022 में शुरू की गई अग्निपथ योजना के तहत सैनिकों की भर्ती चार साल के कार्यकाल के लिए की जाती थी। इसमें अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को ही नियमित सेवा में बनाए रखने का प्रावधान था। योजना में यह बदलाव ऐसे समय किया गया है, जब करीब 18,300 अग्निवीरों का चार साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्हें 31 दिसंबर तक सशस्त्र बलों से बाहर होना था। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, दो साल की एक और सेवा अवधि शुरू करने और उसके बाद सभी अग्निवीरों को नियमित सैनिक के रूप में शामिल करने के प्रावधान से मंत्रिमंडल ने सभी अग्निवीरों को सशस्त्र बलों में समाहित करने का रास्ता तैयार किया है।
वर्ष 2010 में सेवानिवृत्त हुए ब्रिगेडियर ठाकुर ने कहा कि इस नए कदम से पिछले चार वर्षों में प्रशिक्षित कुशल और विशेषज्ञ मानव संसाधन को सेना में बनाए रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने देहरादून से फोन पर पीटीआई-भाषा को बताया, विशेष रूप से उन युवाओं को बनाए रखने से फायदा होगा, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर देखा है। इससे निरंतरता बनी रहेगी और सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। हमारी दोनों सीमाओं पर मौजूदा चुनौतीपूर्ण सुरक्षा परिस्थितियों और सीमा पार आतंकवाद की समस्या को देखते हुए यह स्वागत योग्य कदम है।
उन्होंने कहा कि यह भी जरूरी है कि समग्र भर्ती प्रक्रिया को बाधित नहीं किया जाए। ब्रिगेडियर ठाकुर ने कहा, शुरुआत से ही मेरा सुझाव रहा है कि नियमित सेवा में बनाए रखे जाने वाले अग्निवीरों का प्रतिशत 25 से बढ़ाकर 75 किया जाना चाहिए। सरकार को मेरा सुझाव आज भी यही है। अग्निपथ योजना शुरू होने के बाद से ही विभिन्न वर्गों की ओर से इसकी आलोचना होती रही है। विपक्षी कांग्रेस ने जहां योजना को वापस लेने की मांग की है, वहीं पूर्व सैनिकों के समुदाय के कई सदस्यों ने भी इसमें बदलाव की जरूरत बताई है।
चार वर्षों के दौरान योजना की समीक्षा की मांग
पिछले चार वर्षों में योजना की समीक्षा की मांग लगातार उठती रही है। जून 2022 में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री और जनता दल (यूनाइटेड) के नेता नीतीश कुमार ने भी केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से अग्निपथ योजना की समीक्षा करने का आग्रह किया था। उन्होंने विरोध प्रदर्शन कर रहे युवाओं को आश्वस्त किया था कि सशस्त्र बलों की नई भर्ती नीति से उनका भविष्य प्रभावित नहीं होगा। ब्रिगेडियर ठाकुर ने कहा कि सरकार की बुधवार की घोषणा से स्पष्ट है कि योजना की समीक्षा की मांग करने वालों की आवाज सुनी गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि संभव है कि दो साल बाद सरकार योजना की एक और समीक्षा करे।
हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि नई व्यवस्था के तहत सशस्त्र बलों में तीन तरह के जवान होंगे- नियमित सैनिक, चार साल की सेवा वाले अग्निवीर और छह साल की सेवा वाले विस्तारित अग्निवीर। उन्होंने कहा कि इन तीनों वर्गों के बीच अंतर से सावधानीपूर्वक निपटना होगा। रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, संगठन की जरूरतों और परिचालन दक्षता के आधार पर किए गए निष्पक्ष आकलन में कौशल, प्रेरणा के स्तर, शारीरिक फिटनेस और तकनीकी दक्षता के मामले में अग्निवीरों का प्रदर्शन उत्कृष्ट पाया गया है। पहले की योजना के अनुरूप योग्यता के आधार पर 25 प्रतिशत अग्निवीरों को सशस्त्र बलों में नियमित रोजगार दिया जाएगा।
दो साल की अतिरिक्त सेवा अवधि को मंजूरी
मंत्रालय ने कहा कि शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों के लिए भारतीय सशस्त्र बलों की सिफारिश पर दो साल की अतिरिक्त सेवा अवधि को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है। बयान के मुताबिक, इस दो साल की अतिरिक्त अवधि पूरी होने के बाद सभी अग्निवीरों को उनकी इच्छा और चयन मानदंडों को पूरा करने की शर्त पर नियमित सैनिक के रूप में भर्ती होने का अवसर दिया जाएगा। कारगिल युद्ध के नायक ठाकुर ने कहा कि सरकार को नियमित सेवा में शामिल किए जाने के लिए निर्धारित किए जाने वाले सटीक मानदंडों को स्पष्ट करना चाहिए।
एक अन्य पूर्व सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) दुष्यंत सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से घोषित नई नीति एक सतत प्रक्रिया का हिस्सा है, क्योंकि पिछली नीति में भी योजना की समय-समय पर समीक्षा किए जाने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा, यह अग्निवीर (अग्निपथ) योजना का बेहतर स्वरूप है। अग्निवीर योजना पहले भी अच्छी थी, लेकिन अब इसे और अधिक प्रभावी बनाया गया है। मुझे लगता है कि अब यह एक पूर्ण योजना बन गई है। राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य तैयारियों के लिहाज से यह बड़ा कदम है। अग्निवीरों के अपने विकास और प्रगति के नजरिये से भी यह अच्छा फैसला है। (PTI-Bhasha)
