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जयंत क्यों छोड़ रहे अखिलेश का साथ? पढ़ें सपा-रालोद के अनबन की इनसाइड स्टोरी

  • Authored by: रंजीता झा
  • Updated Feb 7, 2024, 05:12 PM IST

UP Politics: सपा-रालोद के INDIA गठबंधन में आने के बाद स्थिति और बिगड़ी। जयंत चाहते थे कि बिना चर्चा के कैराना, मुज़फ़्फ़रनगर और बिजनौर सीट उन्हें दी जाये, लेकिन अखिलेश की तरफ़ से आरएलडी को भाजपा के गढ़ फ़तेहपुर सिखरी और मथुरा की पेशकश की जा रही थी।

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जयंत चौधरी-अखिलेश यादव

Photo : Twitter

UP Politics: लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी पार्टियों के इंडिया गठबंधन को एक और झटका लग सकता है। अटकले हैं कि रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी एनडीए में शामिल हो सकते हैं। वे समाजवादी पार्टी से नाखुश बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, जयंत चौधरी भाजपा के साथ सीट बंटवारे पर बातचीत कर रहे हैं। अगर सबकुछ ठीक रहता है तो जल्द ही वे एनडीए में शामिल हो सकते हैं। आइए, उन कारणों को जानते हैं, जिनके कारण जयंत चौधरी इंडिया गठबंधन और समाजवादी पार्टी का साथ छोड़ सकते हैं...

डील-शील हो गई है

आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी ने पार्टी में अपने कोर नेताओ को संकेत दे दिया है कि बीजेपी के साथ उनकी बात लगभग बन चुकी है और आने वाले समय में ये भी साफ़ हो जाएगा कि RLD कौन सी सीटो पर चुनाव लड़ेगी। RLD सूत्रों की माने तो पार्टी जल्द ही इसकी आधिकारिक घोषणा भी करेगी। आरएलडी को अपने ख़ेमे में लाने की पृष्ठभूमि तब तैयार हुई जब प्रधानमंत्री ने 400 का लक्ष्य रखा, जिसके बाद भाजपा पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट मतदाताओं को एकजुट करने का लगातार दबाव महसूस हुआ।

सम्मानजनक सीट बंटवारा

आरएलडी के सूत्रों ने टाइम्स नाउ नवभारत को बताया कि भाजपा कुछ समय से जयंत चौधरी से बातचीत का प्रयास कर रही थी और डील लगभग तय हो गई है। इसमें वो सीटें जयंत ने मांगी हैं, जो आरएलडी की परंपरागत और प्रतिष्ठा वाली सीट हैं।

जयंत को कैबिनेट में जगह

बीजेपी और जयंत की बीच जो बातचीत हुई है, उसमें रालोद अध्यक्ष को केंद्र में मंत्री और प्रदेश में एक मंत्री का पद देना भी प्रस्ताव का हिस्सा है। संभावना है कि जयंत दिल्ली में कैबिनेट मंत्री बनेंगे और अपने नौ विधायकों में से एक को उत्तर प्रदेश में मंत्री पद दिलाएंगे।

सपा का आरएलडी के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार

सूत्रों का कहना है कि अखिलेश-जयंत में इन दिनों तल्खियां बढ़ती जा रही हैं, विधानसभा चुनाव में भी कुछ मनमुटाव आये थे जब सपा के साथ-साथ आरएलडी के प्रत्याशियों के नाम भी अखिलेश यादव तय करने लगे थे। वहीं आरएलडी मुस्लिम उम्मीदवार न दे...ये दबाव भी अखिलेश यादव लगातार जयंत पर डाल रहे थे। वहीं लोकसभा में INDIA गठबंधन में आने के बाद स्थिति और बिगड़ी। जयंत चाहते थे कि बिना चर्चा के कैराना, मुज़फ़्फ़रनगर और बिजनौर सीट उन्हें दी जाये, लेकिन अखिलेश की तरफ़ से आरएलडी को भाजपा के गढ़ फ़तेहपुर सिखरी और मथुरा की पेशकश की जा रही थी।

रंजीता झा
रंजीता झाauthor

13 साल के राजनीतिक पत्रकारिता के अनुभव में मैंने राज्य की राजधानियों से लेकर देश की राजधानी तक सियासी हलचल को करीब से देखा है। प्लांट की गई बातें ख़बरें नहीं होती बल्कि बातों के पीछे छुपी सच्चाई असली ख़बर होती है। खबरें वही जो आपके सरोकार की हो वो आपतक लेकर आऊंगी।

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