MLC Election Results: 4 राज्यों में MLC चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच सियासी घमासान जोरों पर है। चार राज्यों में एमएलसी चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन इतना निराशाजनक रहा कि कर्नाटक में भी उसने चारों सीटें गंवा दी। महाराष्ट्र, कर्नाटक, यूपी और बिहार में एमलसी चुनाव हुए थे और इनकी मतगणना बहुत लंबी चली। यूपी एमएलसी चुनाव ने कांग्रेस ने उम्मीदवार खड़े नहीं किए थे। 28 अक्चूबर को गिनती होने तक कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली थी और बीजेपी ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर हमले तेज कर दिए थे। बीजेपी नेताओं-मंत्रियों और प्रवक्ताओं की ओर से एक्स पर 'कांग्रेस जीरो' के पोस्ट होने लगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सहित कई मंत्रियों ने 'कांग्रेस जीरो' को लेकर एक्स पर पोस्ट डाले। लेकिन अगले दिन 29 अक्टूबर को कांग्रेस ने नागपुर सीट पर कब्जा करके अपनी लाज बचा ली। इसके बाद कांग्रेस भी बीजेपी पर हमलावर हो गई और सीधे पीएम मोदी को निशाने पर ले लिया।
कहा- प्रवचनमंत्री जी को आत्मविश्लेषण की जरूरत
कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश ने पीएम मोदी को निशाने पर लिया। जयराम ने एक्स पर पोस्ट में कहा-
कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अतुल लोंढे ने कहा, MLC चुनाव फाइनल परिणाम आने से पहले ही मोदी जी और फडणवीस जी Zero-zero का प्रचार करने लगे थे। बैलट पेपर के इस चुनाव परिणाम ने दिखा दिया कि बीजेपी की मीन खिसक रही है..सत्ता हाथ से फिसल रही है। बीजेपी कृष्णा की नगरी (मथुरा), महादेव की नगरी (वाराणसी) और RSS के मुख्यालय (नागपुर) में भी हारे। इससे साबित हो रहा है कि बीजेपी की केंद्रीय सत्ता के साथ ना भगवान कृष्ण,न महादेव और ना मुख्यालय आपके साथ है।
प्रधानमंत्री मोदी के ताने पर पलटवार
इससे पहले कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी के ताने पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर प्रधानमंत्री को इतना भरोसा है कि ईवीएम का चुनाव परिणामों पर कोई असर नहीं पड़ता, तो उन्हें भाजपा की चुनावी क्षमता पर अपना भरोसा बयानबाजी से नहीं, बल्कि कार्यों से साबित करना चाहिए। कांग्रेस ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री को लगता है कि ईवीएम का चुनाव परिणामों पर कोई असर नहीं पड़ता, तो उन्हें आगे से सभी लोकसभा और आगामी विधानसभा चुनाव मतपत्रों के माध्यम से कराने की प्रतिबद्धता जतानी चाहिए।
विपक्षी दल का यह बयान प्रधानमंत्री मोदी द्वारा एमएलसी चुनावों में कांग्रेस के निराशाजनक प्रदर्शन पर कटाक्ष करने के बाद आया, जबकि ईवीएम के विरोध में विपक्षी दलों के अभियान में कागजी मतपत्रों का इस्तेमाल एक प्रमुख मांग थी। भाजपा और उसके एनडीए सहयोगियों ने चार राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में 28 में से 16 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को एक सीट मिली। समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में पांच सीटें जीतीं, जिनमें वाराणसी की दो सीटें शामिल हैं।
