Vice Admiral Krishna Swaminathan: एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने रविवार को भारत के नए नौसेना प्रमुख का पदभार संभाला। एडमिरल स्वामीनाथन ने यह पदभार ऐसे समय में संभाला है जब क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। एडमिरल स्वामीनाथन ने एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी का स्थान लिया, जो सेवानिवृत्त हो गए हैं। एडमिरल स्वामीनाथन इससे पहले पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में कार्यरत थे।
उन्होंने पत्रकारों से कहा, भारतीय नौसेना देश के हितों की रक्षा के लिए हर समय सतर्क है और वह ऐसे क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण में सक्रिय रूप से तैनात है, जो लगातार चुनौतीपूर्ण, जटिल, अप्रत्याशित और अनिश्चित बना हुआ है। मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना होगी कि भारतीय नौसेना उच्चतम स्तर की परिचालन तत्परता और युद्धक क्षमता बनाए रखे, ताकि वह देश की सुरक्षा और आर्थिक हितों की प्रभावी ढंग से रक्षा कर सके।
एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि भारतीय नौसेना क्षमता-वृद्धि और आधुनिकीकरण की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा, मेरा प्रयास होगा कि नौसेना की प्रगति की गति को बनाए रखा जाए, जारी सभी परियोजनाओं को सुदृढ़ किया जाए, जहां आवश्यकता हो वहां उन्हें और विस्तार दिया जाए तथा अत्याधुनिक व उभरती प्रौद्योगिकियों को शामिल करके हमारी परिचालन क्षमताओं को और अधिक मजबूत बनाया जाए।
उन्होंनेअपने लंबे करियर में उन्होंने INS विक्रमादित्य समेत कई बड़े युद्धपोतों और नौसैनिक बेड़ों की कमान संभाली है। उन्होंने नौसेना में ट्रेनिंग, सुरक्षा और ऑपरेशनल तैयारियों से जुड़े कई अहम पदों पर भी काम किया है। उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है। वाइस एडमिरल स्वामीनाथन ने भारत और विदेश के कई प्रतिष्ठित रक्षा संस्थानों से पढ़ाई की है और उनके पास स्ट्रैटेजिक स्टडीज में पीएचडी भी है।
प्रमुख कमान और अनुभव
1 जुलाई 1987 को भारतीय नौसेना में कमीशन प्राप्त करने वाले वाइस एडमिरल स्वामीनाथन कम्युनिकेशन और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उनका करियर सैन्य कौशल और रणनीतिक अनुभव से भरा रहा है। उन्होंने मिसाइल वेसल्स 'विद्युत' और 'विनाश', मिसाइल कार्वेट 'कुलिश', गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर 'मैसूर' और भारत के विशाल विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य की कमान संभाली है। नौसेना प्रमुख बनने से पहले, उन्होंने 1 मई 2024 से नौसेना के 46वें उप-प्रमुख (Vice Chief of Naval Staff) के रूप में कार्य किया। इसके बाद 31 जुलाई 2025 को उन्होंने पश्चिमी नौसेना कमान का कार्यभार संभाला था।
शिक्षा और सम्मान
वाइस एडमिरल स्वामीनाथन न केवल एक युद्धक रणनीतिकार हैं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका रिकॉर्ड शानदार है। वे नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से बीएससी, कोचीन यूनिवर्सिटी से टेलीकम्युनिकेशंस में एमएससी, किंग्स कॉलेज लंदन से डिफेंस स्टडीज में एमए और मुंबई विश्वविद्यालय से अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है। उन्होंने यूनाइटेड किंगडम के ज्वाइंट सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और अमेरिका के यूनाइटेड स्टेट्स नेवल वार कॉलेज से भी प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) और विशिष्ट सेवा पदक (VSM) से सम्मानित किया जा चुका है।
देश को मिला नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ
देश को नया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ भी मिला है। भारत सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि (सेवानिवृत्त) को देश का नया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (NS Raja Subramani CDS) नियुक्त किया है। वे रक्षा मंत्रालय के सैन्य मामलों के विभाग के सचिव का अतिरिक्त कार्य भी संभालेंगे। यह जिम्मेदारी वे कार्यभार संभालने की तारीख से अगले आदेश तक निभाएंगे। मौजूदा CDS जनरल अनिल चौहान 30 मई 2026 को अपना कार्यकाल पूरा करेंगे। लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि फिलहाल राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं।
