लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य (फोटो साभार: @RohiniAcharya2)
Lalu Family: बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को मिली करारी शिकस्त के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के परिवार में खलबली मच गई। एक ओर राजद सुप्रीमो के बड़े बेटे तेज प्रताप ने तेजस्वी को फेलस्वी करार दिया तो दूसरी तरफ लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य ने परिवार से नाता तोड़ दिया। रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर सारा दोष अपने ऊपर लेने की बात कही। उनका यह पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गया और चुनाव नतीजों के बाद राजद की कलह सभी के सामने आ गई।
रोहिणी आचार्य ने अपने पोस्ट में राजनीति छोड़ने और परिवार से नाता तोड़ने की कही। साथ ही कहा कि संजय यादव और रमीज़ ने मुझसे यही करने को कहा था... और मैं पूरा दोष अपने ऊपर ले रही हूं। रोहिणी आचार्य के पोस्ट के बाद संजय यादव और रमीज का नाम सुर्खियों में छाया रहा। संजय यादव के बारे में सब जानते ही हैं, लेकिन रमीज कौन हैं, जिनका रोहिणी आचार्य ने अचानक जिक्र किया। कहा तो ऐसा जाता है कि रमीज भी संजय यादव की तरह तेजस्वी के भरोसेमंद साथी हैं तो चलिए विस्तार से उनके बारे में जानते हैं।
रमीज का पूरा नाम रमीज नेमत है और वो झारखंड और पूर्वी क्षेत्र के लिए 30 प्रथम श्रेणी का मैच खेल चुके हैं। रमीज के ससुर मेरठ से सपा सांसद रह चुके हैं। झारखंड क्रिकेट के जानकार बताते हैं कि तेजस्वी यादव और रमीज के बीच क्रिकेट मैदान में ही दोस्ती हुई, जो राजनीतिक मैदान पर भी जारी रही। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, तेजस्वी यादव ने रांची के मेकॉन स्टेडियम में 10 से 13 नवंबर, 2009 को प्रथम श्रेणी मैच में डेब्यू किया था तब टीम में रमीज भी शामिल थे।
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रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के रहने वाले रमीज एक राजनीतिक परिवार से संबंधित हैं और वह तेजस्वी के पुराने दोस्तों में से एक हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब तेजस्वी यादव क्रिकेट खेलते थे तब से उनके साथ रमीज दिखाई देते थे। हालांकि, रमीज तस्वीरों में ज्यादा दिखाई नहीं देते हैं। इस वजह से उनके सार्वजनिक जीवन के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।
हिंदी समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक, संजय यादव, राजद के राज्यसभा सदस्य हैं और तेजस्वी यादव के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक माने जाते हैं, जबकि रमीज को तेजस्वी का पुराना मित्र बताया जाता है, लेकिन वह बिहार के रहने वाले नहीं हैं। हालांकि, रोहिणी की पोस्ट से यह स्पष्ट नहीं हो सका कि संजय यादव और रमीज ने उनसे किस बारे में ऐसा कहा था और न ही दोनों नेताओं की इस मामले में अभी तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
रोहिणी आचार्य ने अपने पोस्ट में कहा, ''मैं राजनीति छोड़ रही हूं और अपने परिवार से नाता तोड़ रही हूं…... संजय यादव और रमीज़ ने मुझसे यही करने को कहा था...… और मैं पूरा दोष अपने ऊपर ले रही हूं।'' कुल साल पहले पिता लालू प्रसाद को अपनी किडनी डोनेट करने की वजह से चर्चा में आई रोहिणी ने पिछले साल सारण संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
राजनीतिक गलियारों में ऐसी भी चर्चाएं रही हैं कि तेज प्रताप यादव की परिवार से बेदखली को लेकर रोहिणी आचार्य नाखुश थीं। उन्हें यह ठीक नहीं लग रहा था कि बड़े भाई को पार्टी से भी निकाल दिया गया है। हालांकि, वह विधानसभा चुनाव के दरमियां तेजस्वी यादव के लिए प्रचार करती रहीं। इसके बावजूद राजद चुनाव में कोई खास कमाल नहीं पाई और उसकी सीटें 75 से घटकर 24 रह गईं।
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