देश

₹2,300 करोड़ के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को लेकर पंजाब और हरियाणा में टकराव, जानें- क्या है मालवा नहर परियोजना?

Malwa Canal Project Punjab: मालवा नहर प्रोजेक्ट पंजाब सरकार की ₹2,300 करोड़ की महत्वाकांक्षी परियोजना है। पंजाब सरकार का दावा है कि भारत की आजादी के बाद राज्य में प्लान की गई यह पहली सबसे बड़ी नहर परियोजना है।

Image

₹2,300 करोड़ के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को लेकर पंजाब और हरियाणा में टकराव, जानें- क्या है मालवा नहर परियोजना?

Times Now Navbharat Explainer: हाल ही में पंजाब के प्रस्तावित मालवा नहर प्रोजेक्ट को लेकर पंजाब और हरियाणा के बीच टकराव देखने को मिला। नदियों के पानी के बंटवारे का यह पुराना विवाद, नॉर्दर्न जोनल काउंसिल (NZC) की 22वीं स्टैंडिंग कमिटी की बैठक में एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक गतिरोध में बदल गया। क्या है मालवा नहर परियोजना? क्यों पंजाब की इस ₹2300 करोड़ की नहर पर भड़का है हरियाणा? जानिए पंजाब-हरियाणा जल विवाद और SYL से इसके कनेक्शन का पूरा सच।

यह पंजाब सरकार की ₹2,300 करोड़ की एक महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजना है। पंजाब सरकार का दावा है कि भारत की आजादी के बाद राज्य में प्लान की गई यह पहली सबसे बड़ी नहर परियोजना है।

नहर की लंबाई और क्षमता: यह नहर 150 किलोमीटर लंबी, 50 फीट चौड़ी और 12.5 फीट गहरी होगी। इसकी जल वहन क्षमता 2,000 क्यूसेक होगी।

कहां से शुरू और कहां खत्म?: यह नहर फिरोजपुर में सतलुज नदी पर बने हरिके हेडवर्क्स से निकलेगी। यह पहले से मौजूद सरहिंद फीडर और राजस्थान फीडर नहरों के समानांतर बहेगी और हरियाणा सीमा के करीब मुक्तसर जिले के वारिंग खेड़ा गांव में समाप्त होगी।

किसे होगा फायदा?: इसका मुख्य उद्देश्य पंजाब के सूखाग्रस्त और पानी की किल्लत से जूझ रहे दक्षिणी मालवा क्षेत्र को सिंचाई के लिए पानी देना है। इससे करीब 2 लाख एकड़ कृषि भूमि को पानी मिलेगा, खासकर खरीफ (धान की बुवाई) के सीजन में जब पानी की मांग बहुत बढ़ जाती है।

हरियाणा क्यों कर रहा है इस परियोजना का विरोध?

हाल ही में उत्तरी क्षेत्रीय परिषद (NZC) की बैठक में हरियाणा ने इस प्रोजेक्ट पर कड़ी आपत्ति जताई। हरियाणा के विरोध के दो मुख्य कारण हैं:

DPR (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) की मांग

हरियाणा ने पंजाब सरकार से इस नहर की तकनीकी ब्लूप्रिंट और DPR मांगी है। हरियाणा का कहना है कि पंजाब यह साफ करे कि इस नहर के लिए 2,000 क्यूसेक पानी कहां से आएगा? हरियाणा को डर है कि इस नहर के कारण नीचे के बहाव वाले क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता कम हो जाएगी।

'सोर्सिंग पैराडॉक्स' (पानी का विरोधाभास) और SYL विवाद

यह पूरा विवाद दशकों पुराने सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर विवाद की तरह ही राजनीतिक है।

-हरियाणा का तर्क है कि जब भी कानूनी रूप से अनिवार्य SYL नहर के जरिए हरियाणा को पानी देने की बात आती है, तो पंजाब हमेशा कहता है कि उसके पास पानी की एक भी अतिरिक्त बूंद नहीं है।

-ऐसे में हरियाणा का सवाल है कि यदि पंजाब के पास दूसरे राज्यों को देने के लिए पानी नहीं है, तो अचानक अपनी एक नई और विशाल नहर में भरने के लिए 2,000 क्यूसेक पानी कहां से आ गया? हरियाणा इसे पानी की कपटी जमाखोरी मान रहा है।

पंजाब का इस पर क्या बचाव है?

पंजाब सरकार ने इस मामले में केंद्रीय एजेंसियों और डेटा की सटीकता पर ही सवाल उठा दिए हैं।

डेटा पर सवाल: पंजाब ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) द्वारा दिए गए जलाशयों के डेटा और उनकी मूल्यांकन पद्धतियों को चुनौती दी है। पंजाब का कहना है कि केंद्रीय एजेंसियों के पास उत्तरी जलाशयों में उपलब्ध वास्तविक पानी का रीयल-टाइम सटीक माप नहीं है।

पंजाब का दावा है कि मालवा नहर के लिए वह किसी बाहरी पानी का इस्तेमाल नहीं कर रहा है, बल्कि अपने ही आंतरिक कोटे का उपयोग कर रहा है ताकि राज्य के सूखा प्रभावित कृषि क्षेत्रों को बचाया जा सके।

पंजाब के भीतर ही इस प्रोजेक्ट का आंतरिक विरोध क्यों हो रहा है?

सिर्फ हरियाणा ही नहीं, बल्कि पंजाब के अंदर भी पर्यावरणविदों और स्थानीय किसानों द्वारा इस परियोजना का विरोध किया जा रहा है।

पर्यावरण को नुकसान: इस 150 किलोमीटर लंबी नहर के रास्ते में आने वाले बड़े वन क्षेत्र को काटना पड़ेगा, जिससे पर्यावरणविद नाराज हैं।

किसानों की चिंताएं: स्थानीय किसानों ने भूमि अधिग्रहण के खिलाफ सैकड़ों आपत्तियां दर्ज कराई हैं। किसानों को डर है कि इस नहर के बनने से उनके निजी लिफ्ट सिंचाई पंप बेकार हो जाएंगे और नहर के आस-पास के खेतों में 'वॉटरलॉगिंग' (जलभराव/सेम की समस्या) का गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा।

अब आगे क्या? केंद्र सरकार का हस्तक्षेप

दोनों राज्यों के बीच बढ़ते तनाव और गतिरोध को देखते हुए अब केंद्र सरकार को बीच में आना पड़ा है। उत्तरी क्षेत्रीय परिषद (NZC) की बैठक में केंद्र सरकार ने दोनों राज्यों (पंजाब और हरियाणा) को इस नहर परियोजना और व्यापक जल प्रबंधन के मुद्दों पर आपस में मिलकर एक सहयोगात्मक समाधान खोजने के लिए एक महीने की समय सीमा दी है।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

और पढ़ें
End of Article
Subscribe to our daily Newsletter!

संबंधित खबरें