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आखिर सीएम भगवंत मान को हुआ क्या है? AAP की चुप्पी पर विपक्ष ने उठाए सवाल

Punjab Politics: अचानक पंजाब के सीएम भगवंत मान की तबीयत बिगड़ गई, उन्हें अस्पताल ले जाया गया, अस्पताल में भर्ती कराया गया, सीएम केजरीवाल ने फोन किया और उनका हालचाल लिया। इस बीच विपक्ष ने AAP की चुप्पी पर ये सवाल उठाए हैं कि आखिर सीएम भगवंत मान को हुआ क्या है?

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (फोटो: @BhagwantMann)

Photo : Twitter

Bhagwant Mann Health Updates: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान अपने स्वास्थ्य को लेकर लगातर चर्चा में हैं। बीते बुधवार को अचानक सेहत बिगड़ने के बाद उन्हें मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया। खबरों के मुताबिक, सीएम मान तीन बार बेहोश हो चुके हैं, जिसके बाद अस्पताल में उनका अलग-अलग मेडिकल टेस्ट करवाया जा रहा है। फिलहाल सीएम भगवंत मान की सेहत स्थिर बताई जा रही है। लेकिन उन्हें क्या हुआ है और वह किस समस्या से जूझ रहे हैं। इसकी असल वजह अभी तक सामने नहीं आई है।

भगवंत मान की पहले भी अचानक बिगड़ी थी सेहत

करीब 9 दिन पहले भी सीएम भगवंत मान की चंडीगढ़ में अचानक सेहत बिगड़ गई थी। जिसके बाद उन्हें चंडीगढ़ के एक अस्पताल में एडमिट करवाया गया। लेकिन, बाद में उन्हें दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया। दिल्ली के पूर्व सीएम और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने फोन कर उनका हालचाल भी जाना था।

आम आदमी पार्टी की चुप्पी पर विपक्ष का निशाना

उधर मुख्यमंत्री मान की सेहत को लेकर आम आदमी पार्टी की चुप्पी पर शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस ने निशाना साधा। पंजाब सीएम भगवंत मान की सेहत बार-बार खराब होने पर शिरोमणि अकाली दल के नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम मजीठिया ने चिंता जाहिर की और उनके जल्द स्वास्थ्य होने की कामना की। मजीठिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह तक दावा कर दिया कि सीएम मान लिवर सिरोसिस से पीड़ित हैं और उन्हें लिवर ट्रांसप्लांट की तत्काल आवश्यकता है। इसके साथ ही उन्होंने फोर्टिस अस्पताल से सीएम के स्वास्थ्य के बारे में मेडिकल बुलेटिन जारी करने की बात भी कही।

वीडियो शेयर कर सीएम की सेहत पर उठाया सवाल

बिक्रम मजीठिया ने एक्स पोस्ट पर वीडियो शेयर करते हुए कहा कि सीएम मान एक संवैधानिक पद पर बैठे हैं, राज्य और देश के लोगों को उनकी सेहत के बारे में जानने का हक है, मुझे इस बात की चिंता हो रही है कि उनकी सेहत के बारे में गुप्त रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर जांच नियमित थी, तो मुख्यमंत्री को रात में अस्पताल में भर्ती कराने की कोई जरूरत नहीं थी। कुछ घंटों के बाद वह अस्पताल से घर आ सकते थे। आम आदमी पार्टी लगातार झूठ बोल रही है। मुझे पुख्ता जानकारी है कि सीएम मान दो-तीन बार बेहोश भी हुए हैं। सीएम मान लिवर सिरोसिस से पीड़ित हैं, उनकी हालत गंभीर है। सीएम मान का सही से इलाज करवाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले को जितना सीक्रेट रखा जा रहा है। इससे कई सवाल पैदा होते हैं। सीएम मान की सेहत को लेकर साफ किया जाना चाहिए ताकि ऐसी स्थिति से बचा जा सके। कहीं किसी अप्रत्याशित घटना की स्थिति में जांच की जरूरत ही ना पड़े, जैसा कि तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रही जयललिता मामले में हुआ था।

वहीं, कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'सीएम भगवंत मान का स्वास्थ्य लगातार अफवाहों का विषय बन गया है। अब वक्त आ गया है कि पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ.बलबीर सिंह हर घंटे स्वास्थ्य बुलेटिन जारी करके इस पर ध्यान दें। जनता को यह अनुमान लगाने के लिए क्यों छोड़ा जाए कि वह दिल्ली या चंडीगढ़ के इस या उस अस्पताल में भर्ती हैं?'

बार-बार अस्पताल में क्यों कराना पड़ा रहा भर्ती?

उधर आम आदमी पार्टी की तरफ से पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की सेहत को लेकर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई। 'आप' की खामोशी को लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है कि आखिर पंजाब सीएम मान को क्या हुआ है? क्यों उन्हें बार-बार अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा रहा है? क्या उनकी तबीयत ज्यादा खराब है? आप की चुप्पी पर विपक्ष के नेताओं का कहना है कि पंजाब सरकार सीएम भगवंत मान के स्वास्थ्य स्थिति पर पर्दा डाल रही है?

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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