Chandrayaan-3: सफल चंद्रयान-3 मिशन के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि क्या सूर्योदय के बाद दोबारा चंद्रयान काम करेगा। लेकिन इसरो वैज्ञानिक ने कहा है कि चंद्रमा पर सूर्य उगने के बाद चंद्रयान 3 के लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान के दोबारा जागने की बहुत कम संभावना है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के चंद्रयान-3 मिशन के परियोजना निदेशक पलानीवेल वीरमुथुवेल ने यह बात कही है। उन्होंने कहा कि चांद रात के दौरान वातावरण बहुत सख्त होता है और तापमान 175 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। उन्होंने कहा कि इस बात की बहुत कम संभावना है कि लैंडर और रोवर पर मौजूद उपकरण ऐसे तापमान में टिक पाएंगे।
मिशन सफलता के साथ हुआ पूरा
भोपाल में एक कार्यक्रम में मीडिया से बातचीत के दौरान वीरमुथुवेल ने कहा कि मिशन का उद्देश्य पहले ही पूरा हो चुका है। मिशन के एक चंद्र दिवस तक चलने की उम्मीद थी और वह पूरा हो गया है। फिर भी हमें उम्मीद है कि जैसे ही सूर्य की किरणें चंद्रमा की सतह को फिर से रोशन करेंगी, लैंडर और रोवर जाग जाएंगे। यह पूछे जाने पर कि क्या चंद्रयान-3 मिशन से आम आदमी को कुछ बड़ फायदा होगा, वीरमुथुवेल ने कहा कि इसका कोई प्रत्यक्ष और तत्काल लाभ नहीं है, लेकिन यह अंतरिक्ष की खोज करने और यह जानने की दिशा में एक कदम है कि हमारा सौर मंडल कैसे बना।
इससे क्या-क्या फायदे होंगे
उन्होंने कहा, इसके अलावा ऐसी भी संभावना है कि पानी के अणु चंद्रमा के स्थायी रूप से छाया वाले क्षेत्र में मौजूद हो सकते हैं और उनका उपयोग अंतरिक्ष यान को बिजली की आपूर्ति करने, चंद्रमा पर उपनिवेश स्थापित करने और इसे प्रवेश द्वार, अन्य ग्रहों के मिशन के लिए लॉन्चिंग पैड के रूप में उपयोग करने के लिए किया जा सकता है। वीरमुथुवेल ने कहा कि चंद्रमा पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग हर भारतीय के लिए गर्व की बात है। सिर्फ मेरा परिवार ही नहीं, हर किसी का परिवार खुश है।
उन्होंने कहा कि इसरो अध्यक्ष, निदेशक और मुझे युवा छात्रों से बहुत सारे पत्र मिल रहे हैं। हम अभिभूत हैं। आईआईटी-मद्रास के पूर्व छात्र रहे एयरोस्पेस वैज्ञानिक ने कहा कि छात्रों को नवाचार करना चाहिए और नई चीजों को आजमाना चाहिए।
