Uttarkashi Tunnel Collapse Latest Updates: उत्तराखंड के उत्तरकाशी में हुए सिलक्यारा सुरंग (निर्माणाधीन) हादसे में बुधवार (22 नवंबर, 2023) को रेस्क्यू ऑपरेशन के 11वें दिन के तहत 41 जिंदगियों (फंसे मजदूरों) को बचाने के लिए पुरजोर कोशिशें की गईं। बुधवार (22 नवंबर, 2023) को मिले ताजा अपडेट के मुताबिक, सिल्कयारा छोर की तरफ की 38 मीटर तक खुदाई हो गई है।
मजूदरों तक पहुंचने के लिए अमेरिकन ऑगर मशीन से 53 मीटर तक की खुदाई करनी है। फिलहाल ड्रिलिंग से जुड़ा काम तेजी से चल रहा है, जिसके लिए पहले 900 एमएम में 800 एमएम पाइप लगाया गया और फिर 800 एमएम के अंदर 700 एमएम का पाइप फिट किया गया। वहीं, बरकोट की तरफ ड्रिलिंग शुरू हो गई है। मजदूरों के पहुंचने के लिए 450 मीटर खुदाई करनी है, जिसमें 12 मीटर तक काम हो चुका है।
उधर, टनल पर वर्टिकल ड्रिलिंग का काम अभी शुरू नहीं हुआ है। मशीन लगाई जा रही है। ऐसा बताया जा रहा है कि दोपहर तक काम शुरू हो गया है और वर्टिकल ड्रिलिंग के जरिए मजूदरों तक पहुंचने के लिए 87 मीटर तक ड्रिलिंग करनी पडे़गी। साथ ही सिल्कयारा छोर की तरफ की 41 मेडिकल एबुलेंस पहुंच रही हैं, जिसमें चार मौके पर पहुंच चुकी हैं, जबकि मजदूरों के निकलने के बाद उन्बें सिलयानी एयरपोर्ट से ऋषिकेश एम्स पहुंचाया जाएगा। सुरंग के भीतर छह इंची चौड़ा पाइप से सभी श्रमिकों को खाना पहुंचाया गया। संतरा-केला और अन्य बड़ी चीजें भी इस दौरान भेजी गईं।
वैसे, एक रोज पहले यानी मंगलवार (21 नवंबर, 2023) को सुरंग के अंदर से आए फोटो और वीडियो के बाद पीड़ित परिजन का थोड़ा सा हौसला बढ़ा है। ऐसा इसलिए क्योंकि सुरंग में फंसे लोग वॉकी-टॉकी से अपने घर वालों से अब बात कर पा रहे हैं। चूंकि, पहले आवाज साफ नहीं आती थी, मगर अब वे सही से बात कर पा रहे हैं। इस बीच, पांच तरफ से ड्रिलिंग का काम भी चल रहा है। आइए, जानते हैं इस मसले से जुड़े बड़े और ताजातरीन अपडेट्सः
मजदूरों तक पहुंची रोटी-सब्जी और पुलाव
उधर, एनएचआईडीसीएल सुरंग परियोजना निदेशक अंशु मनीष खलको ने बताया कि छह इंच के पाइप को पूरी तरह साफ कर लिया गया है। उससे मजदूरों के लिए संतरा, केला, मौसम्बी और कुछ दवाइयां भेजी गईं। पिछले चार-पांच दिन से वे लोग नमक की मांग कर रहे थे। नमक भी भेज दिया गया और रात के खाने के लिए रोटी, सब्जी व पुलाव भेजे गए हैं। दरअसल, सुरंग में दो किलोमीटर तक की जगह है। पहले श्रमिकों को चार इंच की पाइपलाइन से सूखे मेवे और खाने की अन्य चीजें भेजी जा रही थीं। लेकिन अब छह इंच की पाइपलाइन के जरिए एक वॉकी-टॉकी भेजकर उनसे संचार स्थापित किया गया है।ओडिशा से ले जाए जा रहे RSP पाइप
41 श्रमिकों की सुरक्षित निकासी के लिए देशभर में हो रहे इंतजार के बीच राउरकेला इस्पात संयंत्र (आरएसपी) में निर्मित विशेष किस्म के पाइप बचाव कार्य में इस्तेमाल की खातिर विमान के जरिए ले जाए गए हैं। अधिकारियों ने इस बारे में समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा को मंगलवार को बताया कि विशेष किस्म के पाइप विमान के जरिए उत्तरकाशी में उस स्थान पर इस्तेमाल के लिए ले जाए गए हैं, जहां सुरंग ढह गई है। संयंत्र के अफसरों के अनुसार, “उत्तराखंड ले जाए जा रहे पाइप की चौड़ाई काफी ज्यादा है।”हालांकि उन्होंने इस बारे में कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की।
क्षैतिज ‘ड्रिल' ही दूसरा सर्वश्रेष्ठ विकल्प- अधिकारी
मजदूरों को जीवित बाहर निकालने के लिए क्षैतिज ‘ड्रिल’ करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि केवल यही तरीका दूसरा सर्वश्रेष्ठ विकल्प होगा। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने कहा कि सुरंग में फंसे इन मजदूरों को बचाने के लिए पांच मोर्चे पर एक साथ प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘‘क्षैतिज ड्रिल करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा’’ क्योंकि चट्टान की संरचना लम्बवत ‘ड्रिल’ करने में चुनौती पेश कर रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव अनुराग जैन ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में ‘‘क्षैतिज ‘ड्रिल’ करना दूसरा सर्वश्रेष्ठ विकल्प है।’’खड़ी हैं चट्टान जैसी ये चुनौतियां
- 38 मीटर को पार करना भी कठिन लग रहा
- 22 से 45 मीटर के बीच ड्रिलिंग मुश्किल लग रही
- ऑपरेशन के दौरान सुरंग में कंपन का खतरा है
- मलबा गिरने की आशंका भी जताई गई।
