इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती 'जबरदस्ती' और 'आक्रामकता'को लेकर अमेरिका के इंडो-पैसिफिक कमांड के प्रमुख एडमिरल सैमुअल जे.पापारो ने गंभीर चिंता जताई है। नई दिल्ली दौरे पर आए वरिष्ठ अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को शांति को ताकत के जरिए बनाए रखने की साझा प्रतिबद्धता बताया। बिना चीन का नाम लिए पापारो ने चीन की सैन्य गतिविधियों की ओर संकेत किया। उन्होंने कहा कि इंडो-पैसिफिक, जहां दुनिया की 60 प्रतिशत आबादी और 60 प्रतिशत से अधिक जीडीपी है,वैश्विक रणनीतिक संतुलन के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। ऐसे में यहां बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा चिंता का विषय है।
'पीस थ्रू स्ट्रेंथ' पर जोर
पापारो ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंध तेजी से ऊपर की ओर बढ़ रहे हैं। दोनों देश समुद्री सुरक्षा,अंडरसी डोमेन अवेयरनेस और संयुक्त सैन्य अभ्यासों के जरिए सहयोग को और मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी साझेदारियां निरोधक क्षमता को कई गुना बढ़ाती हैं,क्योंकि वे शांति बनाए रखने के लिए साझा उद्देश्य को प्रदर्शित करती हैं।
ऑपरेशन सिंदूर में भारत के संयम की सराहना
इस दौरान एडमिरल पापारो ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सैन्य बलों द्वारा दिखाए गए संयम की सराहना की। उन्होंने कहा कि जटिल सैन्य अभियानों से हमेशा सीख मिलती है और उन्होंने भारतीय सेना की पेशेवर प्रतिबद्धता को सराहा। लंबी दूरी के हथियारों के इस्तेमाल पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि जटिल लंबी दूरी के हथियारों के साथ जटिल किल-चेन होती हैं,जिससे आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति स्पष्ट होती है।
चीन और पाकिस्तान पर अप्रत्यक्ष संकेत
पाकिस्तान द्वारा चीनी हथियारों के उपयोग पर पूछे गए सवाल का सीधा जवाब देने से बचते हुए पापारो ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में सतर्कता और मजबूत निरोधक क्षमता बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने दोहराया कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुरक्षा देने वाला है और अमेरिका स्वतंत्र नौवहन तथा समुद्री कानूनों के सम्मान के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध है।
रणनीतिक समानता
पापारो ने कहा कि दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र अमेरिका और सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के बीच आपसी सम्मान और संप्रभुता पर आधारित संबंध इंडो-पैसिफिक की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियां,समुद्री दावे और शक्ति प्रदर्शन वैश्विक चर्चा का विषय बने हुए हैं।
