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आम चुनाव में हलाल प्रोडक्ट बनेंगे बड़ा मुद्दा? यूपी के बाद बिहार में भी बैन की मांग

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Nov 23, 2023, 08:46 AM IST

Halal Certification: केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, हलाल कारोबार के अंतर्गत जिन चीजों का इस्लाम से कोई संबंध नहीं हैं, उनका कारोबारी इस्लामीकरण हो रहा है। कुछ संस्थाएं हलाल सर्टिफिकेट देने की स्वयंभू हो गई हैं।

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बिहार में हलाल सर्टिफिकेशन पर बैन की मांग

Photo : Twitter

Halal Certification: 2024 के चुनाव में हलाल सर्टिफाइड प्रोडक्ड बड़ा मुद्दा बन सकते हैं। दरअसल, उत्तर प्रदेश के बाद बिहार में भी इन उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठी है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर इन उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। गिरिराज सिंह की ओर से लिखे गए पत्र में कहा गया है कि हलाल कारोबार के अंतर्गत जिन चीजों का इस्लाम से कोई संबंध नहीं है, उनका कारोबारी इस्लामीकरण हो रहा है।

बता दें, अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने हलाल सर्टिफाइड प्रोडक्ट पर उत्तर प्रदेश की सीमा के अंदर बिक्री पर प्रतिबंध लगाया है। यह बैन लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली में इस मामले पर दर्ज एफआईआर के बाद लगाया गया है। आशंका जताई गई है कि हलाल सर्टिफिकेशन के जरिए राष्ट्र विरोधी गतिविधियों की फंडिंग की जा रही है।

गिरिराज सिंह ने क्या कहा?

हलाल सर्टिफिकेशन पर बैन की मांग करते हुए केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा है कि बिहार में अनेक खाद्य पदार्थों एवं अन्य आवश्यक सामग्रियों जैसे खाद्य तेल, नमकीन, ड्राई फ्रूट, मिठाईयां, कॉस्मेटिक, दवाओं और मेडिकल उपकरणों का हलाल कारोबार हो रहा है। जबकि इस प्रकार की सामग्रियों के मानक से संबंधित प्रमाण के लिए FSSAI जैसे मानक ही वैध हैं। उन्होंने कहा, हलाल कारोबार के अंतर्गत जिन चीजों का इस्लाम से कोई संबंध नहीं हैं, उनका कारोबारी इस्लामीकरण हो रहा है। कुछ संस्थाएं हलाल सर्टिफिकेट देने की स्वयंभू हो गई हैं और सामान बनाने वाली कंपनियों को मोटी रकम देकर सर्टिफिकेट दे रही हैं। उन्होंने कहा इस बात की आशंका है कि इसके पीछे एक बहुत बड़ा षडयंत्र है।

हलाल सर्टिफिकेट के जरिए आतंकी गतिविधियों की आशंका

गिरिराज सिंह ने कहा, भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र में हलाल कारोबार ना सिर्फ संविधान के खिलाफ है, बल्कि देशद्रोह भी है। उन्होंने कहा, पूरे विश्व में प्रमाणन संबंधी व्यावसायिक गतिविधियों का आकार लगभग 3 ट्रिलियन डॉलर तक है, अर्थव्यवस्था के इस स्वरूप के आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े होने की बात प्रकाश में आ रही है। उन्होंने नीतीश कुमार से इन उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही गहन जांच की भी मांग की है।

क्या है हलाल सर्टिफिकेशन?

दरअसल, इस्लामी मान्यताओं के अनुसार में जो-जो करने की मनाही होती है उसे हराम कहा जाता है और जिस चीज की इजाजत होती है उसे हलाल बताया गया है। ये सबकुछ खाने-पीने की चीजों के निर्माण और पशु वध पर लागू होता है। हलाल सर्टिफाइड से तात्पर्य है कि किसी भी उत्पाद को इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार तैयार किया गया हो। इसको लेकर कई कंपनियां उत्पादों पर मुहर लगाती है, जो हलाल सर्टिफाइड हो जाता है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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