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नीतीश कुमार ज्यादा बूढ़े हैं या तेजस्वी यादव? जीतनराम मांझी ने किया अजब-गजब दावा

Bihar Politics: बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। चुनावी उठापटक के बीच जीतनराम मांझी ने लालू यादव के बेटे और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा है कि नीतीश कुमार से ज्यादा बूढ़े तो तेजस्वी हैं। आपको बताते हैं, उन्होंने क्या कुछ कहा।

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तेजस्वी यादव पर जमकर बरसे केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी

Jitan Ram Manjhi Slams Tejashwi Yadav: हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख जीतनराम मांझी ने शुक्रवार को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की तरफ से नीतीश कुमार को ‘टायर्ड और रिटायर्ड’ बताए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी। जीतनराम मांझी ने कहा कि नीतीश कुमार से ज्यादा बूढ़े तो तेजस्वी यादव खुद हैं। उन्होंने दिल्ली रवाना होने से पहले पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह प्रतिक्रिया दी।

तेजस्वी यादव पर जमकर बरसे केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी

मांझी ने तेजस्वी यादव द्वारा सत्ता में आने पर ताड़ी पर लगे प्रतिबंध को हटाए जाने के संदर्भ में कहा कि सरकार ने जो नियम बनाए हैं, वो बिल्कुल ठीक बनाए हैं। उसमें किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा। बता दें कि पांच मार्च को बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा था कि राज्य देश का सबसे युवा प्रदेश है, यहां सबसे ज्यादा युवा रहते हैं, इसलिए अब यहां 'टायर्ड और रिटायर्ड' मुख्यमंत्री नहीं चाहिए।

तेजस्वी ने कहा था- सरकार खटारा, सिस्टम नकारा, सीएम थका-हारा

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के पटना में आयोजित युवा चौपाल को संबोधित करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा था कि यह सरकार थोड़े दिन और रहेगी, तो पूरे बिहार को बीमार कर देगी। उन्होंने कहा था, 'सरकार खटारा, सिस्टम नकारा, सीएम थका-हारा है। हर एक व्यक्ति को 10-10 वोट का इंतजाम करना होगा। यहां से यही संकल्प लेकर जाइए। अब हमें निकम्मी सरकार नहीं चाहिए। रिटायरमेंट की उम्र 60 साल है। क्या आपको 75 साल का मुख्यमंत्री चाहिए? अब समय आ गया है कि हमें बिहार को नई गाड़ी से आगे ले जाना है, 'खटारा गाड़ी' से नहीं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से सवाल किया, '25 साल वालों, क्या आपको 75 साल का सीएम चाहिए? बिहार में 25 साल की आबादी के लोगों की संख्या 58 फीसदी है।'

तेजस्वी यादव ने उन्होंने कहा था कि पुलिस ताड़ी के नाम पर पासी समाज के लोगों को तंग करती है। उन्हें सामाजिक और आर्थिक तौर पर प्रताड़ना भी झेलनी पड़ रही है। पासी समाज के लोगों ने बताया कि ताड़ी एक नेचुरल पदार्थ है। लेकिन, उसे आय के स्रोत से अलग कर दिया गया है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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