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'पेट पर मुक्के मारे, छाती और चेहरे पर किए वार...' स्वाति मालीवाल की शिकायत में क्या-क्या? बढ़ सकती हैं केजरीवाल के पीए बिभव कुमार की मुश्किलें

Swati Maliwal Assault Case: स्वाति मालीवाल ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि जब वह मुख्यमंत्री आवास के ड्राइंग रूम में इंतजार कर रही थीं, तो उनके निजी सचिव बिभव कुमार आए और बिना किसी उकसावे के उन्हें थप्पड़ मारा और उनके पेट पर मुक्के भी मारे। मैं चिल्लाती रही, उससे रुकने और मुझे जाने देने की विनती करती रही, लेकिन वह मेरे साथ मारपीट करता रहा।

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स्वाति मालीवाल

Photo : BCCL

Swati Maliwal Assault Case: आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल की शिकायत के बाद अरविंद केजरीवाल के पीए बिभव कुमार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। जानकारी के मुताबिक, दिल्ली सीएम हाउस में हुई कथित मारपीट मामले में एफआईआर दर्ज करने के बाद पुलिस देर रात बिभव कुमार के घर पहुंची और उनसे पूछताछ भी की। कहा जा रहा है कि जल्द ही इस मामले में कड़ा एक्शन लिया जा सकता है। बता दें, स्वाति मालीवाल की शिकायत के बाद पुलिस ने बिभव कुमार के खिलाफ आईपीसी की धारा 323, 354 , 506 और 509 के तहत मामला दर्ज किया है।

उधर, दिल्ली पुलिस ने स्वाति मालीवाल का मेडिकल परीक्षण भी कराया। मालीवाल का मेडिकल करीब 4 घंटे तक चला। जानकारी के मुताबिक, एम्स में मेडिकल परीक्षण के दौरान स्वाति मालीवाल ने तेज दर्ज की शिकायत की। इसके बाद उनका एमआरआई और अल्ट्रासाउंट कराया गया। इस बीच उन्होंने पूरे मामले में पहली बार चुप्पी तोड़ी। स्वाति मालीवाल ने घटना के बारे में एक्स पर लिखा, "मेरे साथ जो हुआ वो बहुत बुरा था। मेरे साथ हुई घटना पर मैंने पुलिस को अपना स्टेटमेंट दिया है। मुझे आशा है कि उचित कार्यवाही होगी। पिछले दिन मेरे लिए बहुत कठिन रहे हैं। जिन लोगों ने प्रार्थना की उनका धन्यवाद करती हूं। जिन लोगों ने Character Assassination करने की कोशिश की, ये बोला की दूसरी पार्टी के इशारे पर कर रही है, भगवान उन्हें भी खुश रखे। देश में अहम चुनाव चल रहा है, स्वाति मालीवाल ज़रूरी नहीं है, देश के मुद्दे ज़रूरी हैं। बीजेपी वालों से खास गुजारिश है इस घटना पे राजनीति न करें।"

सीएम हाउस के ड्राइंग रूम में हुई मारपीट

सूत्रों के मुताबिक, स्वाति मालीवाल ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि जब वह मुख्यमंत्री आवास के ड्राइंग रूम में इंतजार कर रही थीं, तो उनके निजी सचिव बिभव कुमार आए और बिना किसी उकसावे के उन्हें थप्पड़ मारा और उनके पेट पर मुक्के भी मारे। आप सांसद ने दिल्ली पुलिस के विशेष सेल द्वारा दर्ज किए गए बयान में कहा, मैं ड्राइंग रूम में दाखिल हुई और वहां इंतजार कर रही थी। बिभव आया और मुझे गाली देना शुरू कर दिया। बिना किसी उकसावे के उसने मुझे बार-बार थप्पड़ मारे। मैं चिल्लाती रही, उससे रुकने और मुझे जाने देने की विनती करती रही, लेकिन वह मेरे साथ मारपीट करता रहा।

छाती, चेहरे, पेट पर किए वार

सूत्रों ने बयान में स्‍वाति मालीवाल के हवाले से कहा, उसने 'देख लेंगे, निपटा देंगे' जैसी बातें कहते हुए धमकियां दीं। उसने मेरी छाती, चेहरे, पेट और मेरे शरीर के निचले हिस्से पर वार किया। मैंने उसे बताया कि मैं मासिक धर्म से गुजर रही हूं और काफी दर्द में हूं, मैंने उससे वहां से चले जाने की गुहार लगाई। आखिरकार, मैं भागने में सफल रही और कमरे से बाहर जाकर मदद के लिए पुलिस को बुलाया।

इन धाराओं में दर्ज हुई एफआईआर

एफआईआर आईपीसी की धारा 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 354 (महिला की शील भंग करने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल प्रयोग), 506 (आपराधिक धमकी), और 509 (महिला की शील का अपमान करना) के तहत दर्ज की गई है। सोमवार को डीसीपी (नॉर्थ) मनोज कुमार मीणा ने बताया था कि सुबह 9:34 बजे सिविल लाइंस थाने में एक पीसीआर कॉल आई, जिसमें कॉलर ने दावा किया कि सीएम केजरीवाल के आधिकारिक आवास पर मुख्यमंत्री के पीएस बिभव कुमार ने उसके साथ मारपीट की।स्वाती मालीवाल ने घटना के तीन दिन बाद दिल्ली पुलिस में इस मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई है।

(भाषा एजेंसी इनपुट)

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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