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कौन हैं CM केजरीवाल के पीए बिभव कुमार? जिनका विवादों से रहा है गहरा नाता; अब स्वाति मालीवाल...!

Who is Bibhav Kumar: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पीए बिभव कुमार का लंबे समय से विवादों से गहरा नाता रहा है। हाल ही में उनके खिलाफ दिल्ली विजिलेंस ने एक्शन लेते हुए बर्खास्तगी का फरमान जारी किया था। अब उनके खिलाफ एक और गंभीर आरोप सामने आया है, आपको बताते हैं आखिर बिभव कौन हैं।

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कौन हैं बिभव कुमार?

Photo : Times Now Digital

Delhi News: आम आदमी पार्टी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं, सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिले हुए अभी जुम्मा जुम्मा 4 दिन भी नहीं हुए हैं कि अरविंद केजरीवाल पर संकट के नए और काले बादल छा गए हैं। इस बीच सूत्रों ने दावा किया है कि सीएम केजरीवाल के पीए बिभव कुमार पर AAP नेता, राज्यसभा सांसद और दिल्ली महिला आयोग की स्वाति मालीवाल ने मारपीट का आरोप लगाया है।

केजरीवाल के पीए बिभव कुमार का विवादों से नाता

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पीए बिभव कुमार का लंबे समय से विवादों से गहरा नाता रहा है। हाल ही में उनके खिलाफ दिल्ली विजिलेंस ने एक्शन लेते हुए बर्खास्तगी का फरमान जारी किया था। 2007 के केस में उनके खिलाफ ये कार्रवाई की गई थी। बता दें, बिभव का विवादों से पुराना नाता रहा है। 2007 के मामले के अलावा वर्ष 2017 में उनसे एंटी करप्शन ब्रांच ने कथित टैंकर घोटाले में भी पूछताछ की थी।

2007 में भी बिभव पर लगा था दुर्व्यवहार का आरोप

बिभव कुमार से जुड़ा साल 2007 वाला विवाद उस वक्त सुर्खियों में आया था जब विजिलेंस विभाग ने उनके खिलाफ कार्रवाई की थी। विशेष सचिव वाईवीवीजे राजशेखर ने पिछले माह 10 अप्रैल, 2024 को एक आदेश पारित किया था, जिसमें 2007 के मामले का हवाला देकर उन्हें बर्खास्त किया गया था। उस मामले में बिभव पर सरकारी काम में बाधा डालने का आरोप लगा था।

सरकारी कर्मचारी ने बिभव कुमार पर लगाया था आरोप

बर्खास्तगी के दौरान ये बताया गया था कि वर्ष 2007 में बिभव पर महेश पाल नाम के एक सरकारी कर्मचारी ने ये आरोप लगाया था कि उन्होंने 'उसके काम में बाधा डाली और उनके साथ दुर्व्यवहार किया।' उस वक्त अपने आदेश में विजिलेंस ने कहा था कि बिभव कुमार के खिलाफ आरोप गंभीर प्रकृति के हैं।

क्या शराब घोटाले में भी जुड़े हैं बिभव कुमार के तार?

बीते अप्रैल के महीने में दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति 2021-22 से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विभव कुमार और आप विधायक दुर्गेश पाठक से पूछताछ की थी। इससे पहले फरवरी में भी ED ने बिभव से पूछताछ की थी और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के प्रावधानों के तहत उनके बयान दर्ज किए थे।

टैंकर घोटाले को लेकर भी हो चुकी है पूछताछ

भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने वर्ष 2017 में कथित टैंकर घोटाले में भी मुख्यमंत्री केजरीवाल के निजी सचिव बिभव कुमार से पूछताछ की थी। दरअसल, जून 2015 में केजरीवाल के नेतृत्व वाली आप सरकार ने दिल्ली जल बोर्ड (Delhi Jal Board) द्वारा करीब 285 स्टेनलेस स्टील के पानी के टैंकरों की खरीद में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए एक समिति का गठन किया था। सरकार ने जून 2016 में इस कमेटी की एक रिपोर्ट को भेजा और बाद में इस मामले में FIR दर्ज की गई थी। बीते मार्च, 2024 में इससे जुड़ी एक और खबर आई थी कि दिल्ली जल बोर्ड घोटाला मामले में (ED) ने कोर्ट चार्जशीट दाखिल की है।

आम आदमी पार्टी की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। खुद सीएम अरविंद केजरीवाल और राज्यसभा सांसद संजय सिंह जमानत पर बाहर हैं, लेकिन मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन जैसे नेता सलाखों के पीछे हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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